Sukma Project
Sukma Project: छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला, जो कभी नक्सलवाद से सबसे बुरी तरह प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता था, अब विकास और समृद्धि का एक नया अध्याय लिख रहा है। यहां का स्थानीय प्रशासन ‘आम बगीचा परियोजना’ के माध्यम से ग्रामीणों की आय बढ़ाने और आजीविका के अवसरों का विस्तार करने के लिए व्यापक प्रयास कर रहा है। इस पहल के परिणामस्वरूप, घने जंगलों में बसे उन गांवों में भी बदलाव की बयार दिखाई दे रही है, जहां पहले आजीविका के सीमित साधन थे। सरकार की मजबूत मंशा और प्रशासन के अथक प्रयासों ने बाग-बगीचों पर आधारित पहलों के जरिए ग्रामीण जीवन में फसल की नई उम्मीद जगाई है।
सुकमा के कलेक्टर देवेश कुमार ध्रुव ने इस परियोजना की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “छत्तीसगढ़ सरकार के निर्देशों के अनुसार, हम क्षेत्र के लोगों की आजीविका को बढ़ावा देने के लिए नियमित रूप से काम कर रहे हैं।” कलेक्टर ने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस संबंध में स्पष्ट निर्देश दिए हैं, और यह कदम केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘लखपति दीदी’ कार्यक्रम के विजन के अनुरूप है। कलेक्टर ने कहा, “हमारा मुख्य प्रयास ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की आजीविका को बढ़ाना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।”
कलेक्टर ध्रुव ने स्पष्ट किया कि ‘आम बगीचा परियोजना’ को इसलिए लागू किया जा रहा है ताकि ग्रामीण खेती के अलावा अन्य गतिविधियों से भी कमाई कर सकें। चूंकि सुकमा की जलवायु और मिट्टी आम और अन्य मौसमी फलों की खेती के लिए उपयुक्त है, इसलिए स्थानीय समुदायों को अपनी उपलब्ध जमीन पर आम, नारियल, नींबू और अन्य प्रकार के फल उगाने के लिए प्रेरित किया गया है।
स्थानीय ग्रामीण मरकम दुला ने बताया कि कैसे कलेक्टर ने गांव में आकर लोगों से मुलाकात की और उन्हें आम तथा अन्य मौसमी फलों के पौधे लगाने के फायदे समझाए। उन्होंने कहा कि इन फायदों के बारे में जानने के बाद, ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक इस विचार को अपनाने का फैसला किया।
स्थानीय लोगों ने बताया कि जैसे ही उन्होंने फलों की किस्में लगाने का फैसला किया, प्रशासन ने उन्हें भरपूर सहयोग दिया। प्रशासन की मदद से फलों के बगीचों में बाड़ लगाने (फेंसिंग), बोरवेल की स्थापना, ट्रांसफार्मर लगाने और अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाओं को स्थापित करने में सहायता मिली।
स्थानीय ग्रामीण मडकम संतु ने बताया कि इस परियोजना को शुरू हुए अब दो साल हो गए हैं और जल्द ही फसल आने वाली है, जिससे उन्हें पूरी कमाई मिलेगी। उन्होंने बताया कि लगभग 8 एकड़ भूमि पर लगभग 350 संकर किस्मों (Hybrid Varieties) के फलों के पौधे लगाए गए हैं। मडकम संतु ने सरकार के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन से मिल रहे भरपूर सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि वे रोपी गई किस्मों का पूरा ध्यान रखते हैं। उन्होंने कहा कि कलेक्टर के नेतृत्व में प्रशासन हमारी काफी मदद कर रहा है और यह पहल बहुत लाभदायक सिद्ध हो रही है।
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