Maharashtra Politics : राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) में इन दिनों आंतरिक कलह चरम पर है। महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुने जाने की प्रक्रिया को लेकर विवाद गहरा गया है। पार्टी के ही वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय सचिव सच्चिदानंद सिंह ने दिल्ली की एक लॉ फर्म के माध्यम से कानूनी नोटिस भेजकर 26 फरवरी 2026 को संपन्न हुए चुनाव को अवैध करार दिया है। उन्होंने सुनेत्रा पवार, कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल और पार्टी सचिव बृजमोहन श्रीवास्तव को भेजे गए इस नोटिस में 15 दिनों के भीतर चुनाव प्रक्रिया को रद्द करने और स्वतंत्र चुनाव अधिकारी की देखरेख में नए सिरे से मतदान कराने की मांग की है।

संवैधानिक उल्लंघन और प्रक्रियात्मक खामियों का आरोप
सच्चिदानंद सिंह ने अपने नोटिस में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका मुख्य तर्क यह है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव पार्टी के संशोधित संविधान के विपरीत हुआ है। सिंह के अनुसार, 17 फरवरी 2026 को चुनाव आयोग को सौंपे गए संशोधित संविधान के तहत राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक बुलाने का एकमात्र अधिकार कार्यकारी अध्यक्ष प्रफुल्ल पटेल के पास था। ऐसे में पार्टी महासचिव बृजमोहन श्रीवास्तव द्वारा बैठक बुलाना पूरी तरह असंवैधानिक है। नोटिस में यह भी दावा किया गया है कि न तो केंद्रीय चुनाव प्राधिकरण का गठन हुआ, न ही कोई निर्वाचन अधिकारी नियुक्त किया गया। प्रतिनिधियों को न तो नामांकन का अवसर मिला और न ही मतदान का, जिससे पूरी चुनाव प्रक्रिया पर प्रश्नचिह्न लग गया है।

पार्टी ने आरोपों को बताया निराधार और राजनीति से प्रेरित
विपक्ष के इन आरोपों पर एनसीपी ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के प्रवक्ता सूरज चव्हाण ने सच्चिदानंद सिंह के दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए उन्हें ‘झूठा’ करार दिया है। चव्हाण का कहना है कि सच्चिदानंद सिंह खुद 26 फरवरी को आयोजित उस राष्ट्रीय अधिवेशन में उपस्थित थे और उन्होंने स्वयं हाथ उठाकर सुनेत्रा पवार के अध्यक्ष बनने का समर्थन किया था। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि चुनाव के दौरान सभी संवैधानिक और संगठनात्मक नियमों का सख्ती से पालन किया गया था। गौरतलब है कि सच्चिदानंद सिंह पिछले 15 वर्षों से पार्टी से जुड़े हैं और उन्हें दिसंबर 2023 में दिवंगत अजित पवार ने राष्ट्रीय सचिव के पद पर नियुक्त किया था।
अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार का राजनीतिक सफर
यह पूरा कानूनी विवाद जनवरी 2026 में अजित पवार की एक दुखद विमान दुर्घटना में हुई मृत्यु के बाद शुरू हुआ। पति की आकस्मिक मौत के बाद सुनेत्रा पवार ने न केवल परिवार की राजनीतिक विरासत संभाली, बल्कि महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनने का इतिहास भी रचा। उन्हें सरकार में खेल, अल्पसंख्यक विकास और उत्पाद शुल्क जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। साथ ही, बारामती विधानसभा उपचुनाव में शानदार जीत दर्ज कर उन्होंने अपनी मजबूत राजनीतिक स्थिति सिद्ध की है। अब, अध्यक्ष पद पर उठे इस कानूनी विवाद ने एनसीपी के भविष्य की राह को थोड़ा चुनौतीपूर्ण बना दिया है।
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