US-Iran Conflict: पहली बार Sea Drones से अमेरिका का हमला, बंदर अब्बास नौसैनिक अड्डा बना निशाना

US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक बड़ा मोड़ आया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि उसने युद्ध के दौरान पहली बार मानव रहित समुद्री ड्रोन (Unmanned Surface Vessels – USVs) का उपयोग किया है। अमेरिकी सेना के अनुसार, इस ऑपरेशन में ‘कॉर्सियर’ श्रेणी के तीन समुद्री ड्रोन्स को तैनात किया गया था। इन ड्रोन्स ने ईरान के बंदर अब्बास नौसैनिक अड्डे पर स्थित पनडुब्बी और जहाज रखरखाव की सुविधाओं को सफलतापूर्वक निशाना बनाया। CENTCOM ने इस हमले का एक वीडियो भी जारी किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अमेरिकी सेना अब अपनी युद्धनीति में अत्याधुनिक स्वायत्त तकनीक को प्राथमिकता दे रही है।

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हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर वर्चस्व की लड़ाई और बढ़ता तनाव

यह सैन्य कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब हॉर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर वाशिंगटन और तेहरान के बीच स्थिति अत्यंत विस्फोटक बनी हुई है। पिछले कुछ दिनों में दोनों देशों के बीच कई बार सैन्य टकराव देखने को मिला है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर आक्रामक रुख अपनाते हुए स्वयं को “द गार्जियन ऑफ द हॉर्मुज स्ट्रेट” (हॉर्मुज जलडमरूमध्य का रक्षक) घोषित कर दिया है। ट्रंप का दावा है कि अमेरिका अब इस महत्वपूर्ण तेल शिपिंग रूट को अपने नियंत्रण में लेने जा रहा है, ताकि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में कोई बाधा न आए।

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हॉर्मुज मार्ग से गुजरने वाले जहाजों पर नया ‘टैक्स’

तनाव के चरम पर होने के बीच, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक और विवादास्पद घोषणा की है। उन्होंने कहा कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी मालवाहक जहाजों (Cargo Ships) को अब अमेरिकी सुरक्षा के बदले 20 प्रतिशत शुल्क (टैक्स) चुकाना होगा। यह दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारा है, जहाँ से वैश्विक कच्चे तेल और गैस की एक बड़ी खेप गुजरती है। अमेरिका का मानना है कि इस कदम से न केवल समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि ईरान की आक्रामक गतिविधियों पर भी अंकुश लगेगा। हालाँकि, यह निर्णय अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार और भू-राजनीतिक संबंधों को और अधिक जटिल बना सकता है।

भविष्य के युद्धों में समुद्री ड्रोन्स की महत्ता

समुद्री ड्रोन्स (USVs) ऐसे मानव रहित नौसैनिक प्लेटफॉर्म हैं जो बिना किसी चालक दल के समुद्र की लहरों पर काम करने में सक्षम हैं। इनका उपयोग निगरानी, जासूसी, खुफिया जानकारी जुटाने और अब सटीक हमलों के लिए किया जा रहा है। अमेरिकी सेना का मानना है कि ये ड्रोन्स भविष्य के नौसैनिक युद्धों में गेम-चेंजर साबित होंगे, क्योंकि ये जोखिम भरे ऑपरेशंस में मानवीय क्षति को शून्य कर देते हैं। हॉर्मुज में इन ड्रोन्स का सफल इस्तेमाल यह साबित करता है कि अब समुद्र में भी तकनीक आधारित युद्ध का युग शुरू हो चुका है, जो भविष्य में वैश्विक नौसैनिक शक्तियों की रणनीति को पूरी तरह बदल देगा।

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Chandan Das

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