Supertech Supreme Court : सुप्रीम कोर्ट ने सुपरटेक के बहुचर्चित सुपरनोवा प्रोजेक्ट से जुड़े घर खरीदारों और कमर्शियल यूनिट मालिकों के हितों को ध्यान में रखते हुए बड़ा आदेश दिया है। CJI सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने सुपरटेक रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की सहायक कंपनी सुपरटेक रिटेल्स यानी S Retails का प्रबंधन पूर्व जस्टिस एमएम कुमार की अध्यक्षता वाली अधिकार प्राप्त समिति को सौंप दिया है।
पुराने निदेशकों को हटाकर तीन नए निदेशक नियुक्त
अदालत ने S Retails के मौजूदा निदेशक बिजेंद्र सिंह और मोहम्मद तारिक को उनके पद से हटाने का आदेश दिया। उनकी जगह पूर्व जस्टिस एमएम कुमार, राजीव मेहरोत्रा और अनंत कुमार को कंपनी के नए निदेशक के रूप में नियुक्त किया गया है। कोर्ट ने समिति की ओर से 30 जून को लिए गए प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए यह व्यवस्था लागू की है।
होमबॉयर्स के हितों की सुरक्षा पर जोर
सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सुपरनोवा प्रोजेक्ट में पैसा लगाने वाले होमबॉयर्स और कमर्शियल यूनिट के मालिकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत के आदेश का उद्देश्य कंपनी के प्रबंधन और संपत्तियों को लेकर पारदर्शिता बनाए रखना तथा प्रोजेक्ट से जुड़े हितधारकों के हितों की रक्षा करना है। समिति अब कंपनी के कामकाज और संपत्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों की निगरानी करेगी।
S Retails की संपत्तियों पर यथास्थिति का आदेश
अदालत ने S Retails की संपत्तियों को लेकर भी सख्त निर्देश जारी किए हैं। आदेश के अनुसार समिति की लिखित पूर्व अनुमति के बिना कंपनी की किसी भी संपत्ति को बेचा, स्थानांतरित या गिरवी नहीं रखा जा सकेगा। यह व्यवस्था 12 जून 2024 के बाद बेची गई संपत्तियों पर भी लागू होगी। इस कदम का मकसद संपत्तियों के संभावित हस्तांतरण या इस्तेमाल पर नियंत्रण बनाए रखना है।
एस्ट्रालिस टावर की फंडिंग को लेकर चिंता
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान S Retails की प्रमुख संपत्ति एस्ट्रालिस टावर से जुड़े वित्तीय पहलुओं पर भी गौर किया। अदालत के मुताबिक इस टावर का निर्माण पूरी तरह सुपरटेक रियल्टर्स प्राइवेट लिमिटेड के फंड से हुआ था। पुराने प्रबंधन के दौरान फंड ट्रांसफर और संभावित डायवर्जन को लेकर गंभीर आशंकाएं सामने आईं। इसी वजह से कंपनी का नियंत्रण अधिकार प्राप्त समिति को देना जरूरी समझा गया।
CFMARC को सुपरनोवा फ्लैटों पर कार्रवाई से रोका
अदालत ने सीएफएम एसेट रिकंस्ट्रक्शन कंपनी यानी CFMARC के खिलाफ भी महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। कोर्ट ने उसे सुपरनोवा प्रोजेक्ट के 1,239 फ्लैटों और संबंधित पार्किंग स्पेस पर कब्जा करने, उन्हें नीलाम करने या बेचने से रोक दिया है। अदालत का मानना है कि ऐसी कार्रवाई से नए डेवलपर की नियुक्ति और प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।
नोएडा अथॉरिटी से मांगा गया हलफनामा
सुप्रीम कोर्ट ने नोएडा प्राधिकरण से भी जवाब मांगा है। मामला सुपरटेक रियल्टर्स की ओर से S Retails को दी गई करीब 8,000 वर्ग मीटर जमीन की सब-लीज और अतिरिक्त एफएआर यानी फ्लोर एरिया रेशियो की मंजूरी से जुड़ा है। अदालत ने नोएडा अथॉरिटी को इस संबंध में हलफनामा दाखिल कर स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है।
प्रोजेक्ट पूरा होने की उम्मीदों को मिला बल
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सुपरनोवा प्रोजेक्ट के खरीदारों के बीच आगे की प्रक्रिया को लेकर उम्मीद बढ़ी है। नई समिति के नेतृत्व में कंपनी के प्रबंधन और संपत्तियों पर निगरानी मजबूत होने की संभावना है। साथ ही, अदालत द्वारा संपत्तियों की बिक्री या हस्तांतरण पर लगाए गए प्रतिबंध से प्रोजेक्ट की संपत्तियों को लेकर किसी भी संभावित विवाद को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
आरके अरोड़ा ने फैसले का किया स्वागत
सुपरटेक के निलंबित निदेशक आरके अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य होमबॉयर्स को तय समयसीमा के भीतर उनके घरों का पजेशन दिलाना है। उन्होंने यह भी कहा कि वे अदालत के सभी निर्देशों का समर्थन करते हैं और प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया में सहयोग करेंगे।
एक अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 अक्टूबर की तारीख तय की है। तब तक अधिकार प्राप्त समिति प्रबंधन की जिम्मेदारी संभालेगी और संपत्तियों से जुड़े महत्वपूर्ण फैसलों पर नियंत्रण बनाए रखेगी। अब सभी की नजर अगली सुनवाई पर है, जहां सुपरनोवा प्रोजेक्ट से जुड़े वित्तीय, संपत्ति और निर्माण संबंधी मामलों पर आगे की दिशा स्पष्ट हो सकती है।
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