Ram Setu case: सुप्रीम कोर्ट ने राम सेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग को लेकर दायर याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। यह याचिका पूर्व राज्यसभा सांसद और बीजेपी नेता डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने दायर की थी। शुक्रवार को जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने इस मामले में सुनवाई करते हुए केंद्र को नोटिस जारी किया। अब इस मामले की अगली सुनवाई चार हफ्ते बाद होगी।
राम सेतु, जिसे एडम्स ब्रिज (Adam’s Bridge) भी कहा जाता है, भारत के तमिलनाडु के रामेश्वरम को श्रीलंका के मन्नार द्वीप से जोड़ने वाली एक चूने की उथली चट्टानों की श्रृंखला है। यह पुल लगभग 48 किलोमीटर (30 मील) लंबा है और मन्नार की खाड़ी तथा पाक जलडमरूमध्य को अलग करता है।
ऐतिहासिक और पौराणिक दृष्टिकोण से राम सेतु का विशेष महत्व है। रामायण में इसे वह पुल बताया गया है जिसे भगवान श्रीराम ने वानर सेना की मदद से लंका तक पहुंचने के लिए बनवाया था।
1993 में नासा द्वारा जारी की गई सैटेलाइट तस्वीरों में राम सेतु स्पष्ट रूप से दिखाई दिया था। कई रिपोर्टों में इसे मानव निर्मित ढांचा भी बताया गया, जिससे इसके ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व को लेकर बहस तेज हो गई।
ऐसा माना जाता है कि 15वीं शताब्दी तक यह पुल समुद्र तल के ऊपर था और लोग इस पर चलकर रामेश्वरम से मन्नार द्वीप तक पहुंच सकते थे। लेकिन बाद में समुद्री तूफानों और प्राकृतिक बदलावों की वजह से यह संरचना समुद्र में डूब गई।
डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका का मकसद है कि राम सेतु को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए ताकि इसका संरक्षण और प्रचार-प्रसार किया जा सके। याचिका में यह भी तर्क दिया गया है कि यह भारत की धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का हिस्सा है जिसे संरक्षित करना जरूरी है।
इस याचिका के जरिए स्वामी ने केंद्र सरकार से यह भी पूछा है कि अब तक इस मुद्दे पर कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया।
पिछले कुछ वर्षों में केंद्र सरकार ने राम सेतु को संरक्षित रखने की बात तो कही है, लेकिन इसे अभी तक राष्ट्रीय विरासत स्थल (National Heritage Site) का दर्जा नहीं दिया गया। सुप्रीम कोर्ट के नोटिस के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस पर क्या रुख अपनाती है।
राम सेतु को लेकर एक बार फिर सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक विमर्श तेज हो गया है। सुप्रीम कोर्ट की सक्रियता इस ऐतिहासिक संरचना के भविष्य को नई दिशा दे सकती है। अब सबकी नजर केंद्र सरकार के जवाब और कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है।
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