WPI Inflation : कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने देश में बढ़ती महंगाई को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने थोक महंगाई दर यानी WPI के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि अगस्त में यह दर 9.92 प्रतिशत तक पहुंच गई है। उनके मुताबिक, पिछले चार महीनों से थोक महंगाई करीब 10 प्रतिशत के आसपास बनी हुई है। उन्होंने कहा कि WPI को महज एक सरकारी प्रेस रिलीज समझना बड़ी भूल होगी, क्योंकि इसका सीधा असर आने वाले समय में आम लोगों की जेब पर दिखाई देता है।
फ्यूल और एनर्जी की कीमतों में 23 प्रतिशत बढ़ोतरी का दावा
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि पेट्रोल, डीजल, LPG और बिजली जैसी जरूरी चीजों से जुड़ी फ्यूल एवं एनर्जी महंगाई में करीब 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने दावा किया कि इसका असर अभी फैक्ट्रियों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में दिखाई दे रहा है। आने वाले समय में उत्पादन और परिवहन लागत बढ़ने के साथ इसका प्रभाव घरेलू बजट तक पहुंच सकता है। कांग्रेस प्रवक्ता ने सरकार पर आंकड़ों को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
WPI का असर बाद में आम लोगों तक पहुंचता है
कांग्रेस नेता ने WPI और CPI के बीच संबंध का उल्लेख करते हुए कहा कि थोक स्तर पर बढ़ने वाली कीमतों का असर कुछ समय बाद खुदरा बाजार में भी दिखाई देता है। उनके अनुसार, कंपनियों की उत्पादन लागत और परिवहन खर्च बढ़ने के बाद इसका बोझ धीरे-धीरे उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि इसलिए मौजूदा WPI आंकड़ों को हल्के में लेना आम जनता के हित में नहीं होगा।
बेरोजगारी और कम आय के बीच महंगाई की दोहरी मार
सुप्रिया श्रीनेत ने कहा कि मौजूदा महंगाई की स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि देश में बेरोजगारी का स्तर बढ़ा हुआ है और मजदूरी दर भी दबाव में है। उन्होंने दावा किया कि लोगों की आय और घरेलू आमदनी प्रभावित हुई है, जबकि घरेलू बचत भी निचले स्तर पर पहुंच गई है। कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि आर्थिक दबाव के कारण कुछ परिवारों को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए सोना गिरवी रखने तक की नौबत आ रही है।
गांवों में महंगाई का असर ज्यादा होने का दावा
उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुद्दा उठाते हुए कहा कि गांवों में रहने वाले लोगों पर महंगाई का असर शहरों की तुलना में अधिक पड़ रहा है। उनके मुताबिक, गरीब परिवार अपनी आय का बड़ा हिस्सा भोजन, ईंधन और परिवहन जैसी आवश्यक जरूरतों पर खर्च करते हैं। ऐसे में इन क्षेत्रों में कीमतों में बढ़ोतरी सीधे उनके घरेलू बजट को प्रभावित करती है। उन्होंने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए तंज भी कसा।
महंगाई को लेकर पीएम मोदी पर साधा निशाना
कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे से जुड़े एक वीडियो का जिक्र करते हुए महंगाई पर सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि जब विकास और ग्रोथ को लेकर वीडियो बनाए जा सकते हैं, तो महंगाई से परेशान लोगों की स्थिति पर सरकार की ओर से जवाब कब आएगा। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, घटती आय और बढ़ती कीमतों का एक साथ होना आम परिवारों के लिए गंभीर आर्थिक चुनौती बन गया है।
ग्रोथ और महंगाई के आंकड़ों पर कांग्रेस के सवाल
सुप्रिया श्रीनेत ने सरकार के विकास दर से जुड़े आंकड़ों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने डबल डिफ्लेटर और ग्रोथ के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए पूछा कि जब थोक महंगाई कई महीनों से करीब 10 प्रतिशत बनी हुई है, तब वास्तविक आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों को किस तरह समझा जाए। उन्होंने सरकार से यह स्पष्ट करने की मांग की कि इतनी ऊंची महंगाई से निपटने के लिए उसकी रणनीति क्या है।
कच्चे तेल की कीमतों को लेकर सरकार से सवाल
कांग्रेस नेता ने अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों का मुद्दा उठाते हुए सरकार से पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी जवाब मांगा। उन्होंने सवाल किया कि जब कच्चे तेल की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंची थी, तब घरेलू स्तर पर कीमतों में बढ़ोतरी की गई, लेकिन जब जुलाई में कच्चा तेल करीब 82 डॉलर तक आ गया, तो पेट्रोल-डीजल के दामों में उसी अनुपात में कमी क्यों नहीं की गई।
दूसरे देशों से तुलना कर सरकार पर लगाया आरोप
सुप्रिया श्रीनेत ने दावा किया कि पाकिस्तान, नेपाल, ब्रिटेन, ऑस्ट्रेलिया और जर्मनी जैसे देशों में खुदरा ईंधन कीमतों में कमी की गई, जबकि भारत में उपभोक्ताओं को इसका समान लाभ नहीं मिला। उन्होंने सरकार पर मुनाफाखोरी का आरोप लगाते हुए कहा कि आम जनता लगातार महंगाई का बोझ उठा रही है। उन्होंने केंद्र से ईंधन कीमतों और महंगाई पर तत्काल राहत देने की मांग की।
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