Elephant Death Surajpur
Elephant Death Surajpur: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में एक 15 वर्षीय हाथी की रहस्यमयी मौत ने दिल्ली तक हलचल मचा दी है। 13 मार्च की सुबह करंजवार के एक खेत में हाथी का शव मिलने के बाद, वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे की आधिकारिक शिकायत पर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के ‘प्रोजेक्ट एलीफेंट डिवीजन’ ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से तत्काल जवाब मांगा है। मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (PCCF) को पत्र जारी कर इस पूरे मामले की गहन जांच करने और जल्द से जल्द एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
शुक्रवार को गांव की बस्ती से महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित एक खेत में जब ग्रामीणों ने हाथी का शव देखा, तो इलाके में सनसनी फैल गई। प्रारंभिक निरीक्षण में हाथी की सूंड पर कुछ काले निशान पाए गए हैं, जिससे प्रथम दृष्टया यह अंदेशा जताया जा रहा है कि हाथी की मौत बिजली का करंट लगने से हुई होगी। हालांकि, वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि मौके पर बिजली के खुले तार या शिकारियों द्वारा बिछाए गए ‘लाइव वायर’ के कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले हैं। विभाग का तर्क है कि केवल निशानों के आधार पर मौत का कारण तय करना जल्दबाजी होगी। असली सच्चाई का खुलासा पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।
हाथियों के संरक्षण को लेकर राज्य की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि पिछले सात वर्षों में अकेले सरगुजा संभाग में विभिन्न कारणों से कुल 63 हाथियों की जान जा चुकी है। यह आंकड़ा वन्यजीव प्रेमियों और प्रशासन के लिए एक बड़ी चेतावनी है। वन विभाग के दावों के बावजूद, हाथियों के सुरक्षित गलियारे (कॉरिडोर) बनाने और मानव-हाथी द्वंद्व को रोकने में जमीनी स्तर पर बड़ी खामियां नजर आ रही हैं। सूरजपुर की यह ताजा घटना इसी फेहरिस्त में एक और काला अध्याय जोड़ती दिख रही है।
विद्युत करंट छत्तीसगढ़ के हाथियों के लिए सबसे बड़ा दुश्मन बनकर उभरा है। पिछले सात सालों में हुई 63 मौतों में से 40 हाथी केवल बिजली की चपेट में आने के कारण मारे गए हैं। कई बार ग्रामीण अपनी फसलों को जंगली सूअरों से बचाने के लिए अवैध रूप से खेतों में बिजली के तार बिछाते हैं, तो कई बार शिकारियों के जाल में हाथी फंस जाते हैं। हालांकि वन विभाग और बिजली विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर जर्जर तारों और झुके हुए खंभों को सुधारने की बात कही जाती रही है, लेकिन धरातल पर किसी ठोस और प्रभावी सुरक्षा योजना का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
सूरजपुर जिले में हाथियों की मौत का यह कोई पहला मामला नहीं है। साल 2024 की शुरुआत में ही धुरिया गांव के पास घुई जंगल में तस्करों ने एक दंतैल हाथी को करंट लगाकर मौत के घाट उतार दिया था। उस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार भी किया था। इसी तरह, साल 2022 में दरहोरा गांव के पास भी एक मादा हाथी की करंट लगने से जान चली गई थी। बार-बार होने वाली इन घटनाओं से यह स्पष्ट है कि सुरक्षा घेरा कमजोर है और निगरानी तंत्र में सुधार की तत्काल आवश्यकता है।
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