Surajpur News : छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण और सर्वे की कार्रवाई शुक्रवार को हिंसक संघर्ष में बदल गई। प्रतापपुर विकासखंड के मदननगर-धरमपुर क्षेत्र में सर्वे के लिए पहुंची प्रशासनिक और पुलिस टीम का ग्रामीणों ने जोरदार विरोध किया। देखते ही देखते स्थिति बेकाबू हो गई और पथराव व लाठी-डंडों से हुए हमले में डीएसपी समेत दो दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी घायल हो गए। घटना के बाद पूरे इलाके को पुलिस छावनी में तब्दील कर दिया गया है और अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर हालात पर नजर रखी जा रही है।

सर्वे शुरू होते ही भड़का विरोध
जानकारी के अनुसार, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (SECL) की प्रस्तावित परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण संबंधी सर्वे करने प्रशासनिक अमला और पुलिस बल मदननगर-धरमपुर क्षेत्र पहुंचा था। ग्रामीणों का आरोप है कि खेती के मौसम में उनकी सहमति और पर्याप्त जानकारी के बिना सर्वे की कार्रवाई शुरू की गई, जिसका उन्होंने विरोध किया।

पथराव और लाठी-डंडों से हमला, कई पुलिसकर्मी घायल
विरोध के दौरान स्थिति अचानक हिंसक हो गई। ग्रामीणों ने पुलिस टीम पर पथराव शुरू कर दिया और लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस हमले में डीएसपी समेत आधा दर्जन से अधिक पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हुए, जबकि कुल मिलाकर दो दर्जन से अधिक जवान चोटिल बताए जा रहे हैं। घायलों में महिला पुलिसकर्मी, प्रधान आरक्षक और आरक्षक भी शामिल हैं। कई घायल जवानों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
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पुलिस को पीछे हटना पड़ा, कार्रवाई रोकी गई
ग्रामीणों के उग्र विरोध और लगातार पथराव के बीच पुलिस बल को पीछे हटना पड़ा। हालात बिगड़ते देख प्रशासन ने फिलहाल सर्वे और भूमि अधिग्रहण की कार्रवाई रोक दी है। पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।
इलाके में भारी पुलिस बल तैनात
घटना के बाद प्रशासन ने एहतियात के तौर पर कई जिलों से अतिरिक्त पुलिस बल बुलाकर पूरे क्षेत्र में तैनात कर दिया है। संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।
भूमि अधिग्रहण को लेकर पहले भी हो चुकी हैं हिंसक घटनाएं
सूरजपुर जिले में भूमि अधिग्रहण को लेकर विवाद नया नहीं है। इससे पहले फरवरी 2026 में लटोरी तहसील के सुंदरगंज गांव में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान भी ग्रामीणों और पुलिस के बीच पथराव हुआ था, जिसमें जेसीबी मशीन और पुलिस वाहन क्षतिग्रस्त हुए थे।
वहीं दिसंबर 2025 में SECL की अमेरका कोयला परियोजना के विस्तार के विरोध में हुए आंदोलन के दौरान भी 30 से अधिक पुलिसकर्मी घायल हुए थे। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से स्पष्ट है कि भूमि अधिग्रहण के मुद्दे पर क्षेत्र में ग्रामीणों और प्रशासन के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है।
ग्रामीणों की मांग और प्रशासन की पहल
ग्रामीणों का कहना है कि उनकी सहमति, उचित जानकारी और सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किए बिना भूमि अधिग्रहण स्वीकार नहीं किया जाएगा। दूसरी ओर प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है और स्थिति सामान्य करने के लिए ग्रामीणों, प्रशासन और SECL के बीच बातचीत की संभावना भी जताई जा रही है। फिलहाल पूरे मामले पर प्रशासन की कड़ी नजर बनी हुई है।











