Surguja Bank Crisis
Surguja Bank Crisis: छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में समर्थन मूल्य पर धान बेचने वाले किसानों के सामने एक नया संकट खड़ा हो गया है। अपनी उपज बेचने के बाद जब किसान अपनी मेहनत की गाढ़ी कमाई निकालने बैंक पहुँच रहे हैं, तो उन्हें निराशा हाथ लग रही है। जिले के सहकारी बैंकों में इन दिनों किसानों की भारी भीड़ उमड़ रही है। सुबह से लेकर शाम तक लाइन में खड़े रहने के बावजूद किसानों को पूरा पैसा नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह है कि घंटों के इंतजार के बाद एक किसान को केवल 20 हजार रुपये ही दिए जा रहे हैं, जो उनकी जरूरतों के लिहाज से बेहद कम है।
आकाशवाणी चौक स्थित सहकारी बैंक की शाखा में शुक्रवार को अफरातफरी का माहौल देखा गया। किसानों ने अपनी व्यथा सुनाते हुए बताया कि उन्होंने लाखों रुपये का धान सरकारी केंद्रों पर बेचा है, लेकिन बैंक प्रबंधन नकद भुगतान में आनाकानी कर रहा है। बैंक की ओर से नियम बना दिया गया है कि एक बार में केवल 20 हजार रुपये ही निकाले जा सकते हैं। इतना ही नहीं, एक बार पैसे निकालने के बाद किसान को दोबारा राशि निकालने के लिए चार दिन का इंतजार करने को कहा जा रहा है। इस व्यवस्था ने उन किसानों की कमर तोड़ दी है जिन्हें खाद, बीज या अन्य घरेलू कार्यों के लिए बड़ी रकम की तत्काल आवश्यकता है।
वर्तमान में शादियों का सीजन चल रहा है, ऐसे में किसानों को टेंट, कैटरिंग और अन्य खर्चों के लिए नकद रुपयों की सख्त जरूरत है। कई किसानों ने बताया कि उनके घर में विवाह समारोह हैं, लेकिन बैंक से पर्याप्त राशि न मिलने के कारण वे काफी मानसिक तनाव में हैं। बैंक अधिकारियों को अपनी समस्या बताने के बावजूद उन्हें कोई विशेष राहत नहीं मिल पा रही है। किसानों का कहना है कि डिजिटल लेन-देन हर जगह संभव नहीं है, खासकर ग्रामीण इलाकों में जहाँ आज भी नकद व्यवहार को प्राथमिकता दी जाती है।
इस अव्यवस्था पर सहकारी बैंक के एडिशनल सीईओ बीकेपी सिंह ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि बैंकों के पास नकदी (Cash) की भारी कमी है। उन्होंने बताया कि सरकारी और निजी बैंकों से सहकारी बैंक को प्रतिदिन सीमित मात्रा में ही नकद राशि उपलब्ध हो पा रही है। वर्तमान में एक शाखा को अधिकतम दो करोड़ रुपये ही प्रतिदिन दिए जा रहे हैं, जो किसानों की मांग की तुलना में बहुत कम है। इसके अलावा, बैंक में कर्मचारियों की कमी भी एक बड़ा मुद्दा है, जिसके कारण कई काउंटरों के बजाय केवल एक ही काउंटर पर काम हो पा रहा है और लाइनें लंबी होती जा रही हैं।
बैंक प्रबंधन का मानना है कि किसान आधुनिक बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाने के बजाय केवल नकद राशि पर निर्भर हैं। एडिशनल सीईओ के अनुसार, किसानों को चेक, एटीएम और RTGS जैसी सुविधाएं दी गई हैं, लेकिन वे इनका उपयोग नहीं करना चाहते। इसके साथ ही एक बड़ी समस्या यह भी है कि किसान सहकारी बैंकों में अपना पैसा जमा नहीं रखना चाहते। वे यहाँ से पैसे निकालकर निजी या अन्य सरकारी बैंकों में जमा कर देते हैं, जबकि सहकारी बैंक अन्य बैंकों की तुलना में अधिक ब्याज दे रहे हैं। फिलहाल, प्रशासन का दावा है कि स्थिति को सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं।
Money Laundering : पंजाब की राजनीति में उस वक्त हड़कंप मच गया जब गुरुग्राम की…
Chandranath Rath Murder : पश्चिम बंगाल की राजनीति में भूचाल लाने वाले चंद्रनाथ रथ हत्याकांड…
Mali Massacre : पश्चिम अफ्रीकी राष्ट्र माली एक बार फिर जिहादी आतंकवाद की भीषण आग…
Mithun Chakraborty : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग का सूत्रपात हो चुका…
Tamil Nadu CM : तमिलनाडु की राजनीति में आज एक नया इतिहास रचा गया है।…
D Sudhakar Death : कर्नाटक सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और कांग्रेस के कद्दावर नेता…
This website uses cookies.