Suvendu PA Murder Case
Suvendu PA Murder Case : पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भूचाल आ गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के निजी सहायक (PA) चंद्रनाथ रथ की सनसनीखेज हत्या के मामले की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने अपने हाथों में ले ली है। राज्य सरकार की सिफारिश और केंद्र सरकार की अधिसूचना के बाद सीबीआई ने इस हत्याकांड में औपचारिक रूप से प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है। जांच एजेंसी अब इस हाई-प्रोफाइल मामले की तह तक जाने के लिए तैयार है।
सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB, कोलकाता) ने इस मामले को दोबारा दर्ज किया है। जांच एजेंसी द्वारा साझा की गई एफआईआर की कॉपी के अनुसार, यह मामला हत्या (Murder), आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) और गलत तरीके से रास्ता रोकने जैसी गंभीर धाराओं के तहत दर्ज किया गया है। सीबीआई अब उन कड़ियों को जोड़ने की कोशिश कर रही है जो इस हत्याकांड को किसी बड़ी राजनीतिक या पेशेवर साजिश की ओर इशारा करती हैं।
यह घटना 6 अप्रैल की रात करीब 10:10 बजे की है। शिकायतकर्ता सौमेन रथ (मृतक के भाई) के अनुसार, चंद्रनाथ रथ अपनी महिंद्रा स्कॉर्पियो गाड़ी से यात्रा कर रहे थे। जब उनकी कार दोहारिया शैलेश नगर के डोलतला इलाके में पहुंची, तभी पहले से घात लगाए बैठे हथियारबंद हमलावरों ने उन्हें घेर लिया। हमलावरों ने अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करते हुए बेहद करीब से अंधाधुंध फायरिंग की, जिससे मौके पर ही अफरा-तफरी मच गई और चंद्रनाथ रथ की जान चली गई।
मृतक के भाई सौमेन रथ ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में स्पष्ट किया है कि यह कोई सामान्य लूटपाट या अचानक हुई हिंसा नहीं थी। उनके अनुसार, हमलावरों ने बेहद संगठित और पेशेवर तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया। शिकायत में अंदेशा जताया गया है कि चंद्रनाथ रथ की हत्या के पीछे कोई बहुत बड़ी गहरी साजिश हो सकती है। इसी अंदेशे और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने जांच सीबीआई को सौंपने की सिफारिश की थी।
मामले की शुरुआती जांच के दौरान पश्चिम बंगाल पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया था। चौंकाने वाली बात यह है कि गिरफ्तार किए गए आरोपी मयंक राज मिश्रा, विक्की मौर्य और राज सिंह क्रमशः उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं। अंतरराज्यीय अपराधियों की संलिप्तता ने इस केस को और भी पेचीदा बना दिया है। सीबीआई अब यह पता लगाएगी कि इन शूटरों को किसने किराए पर लिया था और इनका असली हैंडलर कौन है।
सीबीआई ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए डीआईजी (DIG) रैंक के सात वरिष्ठ अधिकारियों की एक विशेष टीम का गठन किया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा अधिसूचना जारी होने के बाद यह टीम अब तकनीकी साक्ष्यों, मोबाइल फॉरेंसिक और चश्मदीदों के बयानों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाएगी। बंगाल पुलिस द्वारा जुटाए गए तमाम दस्तावेज अब सीबीआई के पास हैं और आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।
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