T20 World Cup 2026
T20 World Cup 2026: टी20 वर्ल्ड कप 2026 को खत्म हुए अभी एक महीने से कुछ ज्यादा का वक्त बीता है। भारतीय फैंस अभी भी तीसरी बार विश्व विजेता बनने का जश्न मना रहे हैं, लेकिन इसी बीच क्रिकेट जगत को झकझोर देने वाली एक खबर सामने आई है। भारत और श्रीलंका की संयुक्त मेजबानी में आयोजित इस मेगा इवेंट के एक मुकाबले पर मैच फिक्सिंग का काला साया मंडरा रहा है। इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल (ICC) की एंटी-करप्शन यूनिट (ACU) ने टूर्नामेंट के एक विशेष मैच में संदिग्ध गतिविधियों की गंभीरता से जांच शुरू कर दी है, जिससे क्रिकेट गलियारों में हड़कंप मच गया है।
विवादों के केंद्र में टी20 वर्ल्ड कप 2026 का 31वां मुकाबला है, जो कनाडा और न्यूजीलैंड के बीच खेला गया था। इस मैच में हुई कुछ अप्रत्याशित घटनाओं ने आईसीसी के भ्रष्टाचार विरोधी अधिकारियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। विशेष रूप से कनाडा के कप्तान दिलप्रीत बाजवा द्वारा फेंका गया एक ओवर अब संदेह के घेरे में है। क्रिकेट पंडितों और जांच अधिकारियों को उस ओवर की गेंदबाजी की शैली और परिस्थितियों में कुछ असामान्य नजर आया है। इसके साथ ही, क्रिकेट कनाडा के भीतर चल रहे भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोपों ने भी आग में घी डालने का काम किया है।
ईएसपीएन क्रिकइन्फो की रिपोर्ट के अनुसार, आईसीसी की एंटी-करप्शन यूनिट की सुई न्यूजीलैंड की पारी के पांचवें ओवर पर जाकर टिक गई है। यह ओवर कप्तान दिलप्रीत बाजवा ने डाला था। उस ओवर के दौरान दिलप्रीत ने न केवल नो-बॉल फेंकी, बल्कि लेग साइड की तरफ बेहद खराब वाइड गेंदें भी डालीं, जिसके चलते उन्होंने कुल 15 रन लुटा दिए। हालांकि उनसे पहले जसकरण सिंह और डिलोन हेलिगर जैसे तेज गेंदबाज भी महंगे साबित हुए थे, लेकिन बाजवा के ओवर की लाइन-लेंथ और एक्स्ट्रा गेंदों ने भ्रष्टाचार की आशंकाओं को जन्म दिया है। दिलचस्प बात यह है कि इसी मैच में साद बिन जफर ने एक ओवर विकेट मेडन भी निकाला था, जिससे प्रदर्शन का विरोधाभास और अधिक स्पष्ट हो गया।
इस पूरे मामले की जांच शुरू होने के पीछे कनाडा के सरकारी चैनल ‘कनाडियन ब्रॉडकास्टिंग कॉर्पोरेशन’ (CBC) की एक विस्फोटक डॉक्यूमेंट्री का बड़ा हाथ है। सीबीसी के खोजी प्रोग्राम ‘द फिफ्थ एस्टेट’ ने ‘करप्शन, क्राइम एंड क्रिकेट’ (Corruption, Crime and Cricket) नाम से 43 मिनट की एक विस्तृत रिपोर्ट जारी की है। इस डॉक्यूमेंट्री में दावा किया गया है कि कनाडा क्रिकेट में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आईसीसी के भ्रष्टाचार विरोधी नियमों की धज्जियां उड़ाई गई हैं। डॉक्यूमेंट्री के प्रसारण के बाद वैश्विक स्तर पर दबाव बढ़ा, जिसके बाद आईसीसी को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा।
जांच केवल मैच फिक्सिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह कनाडा क्रिकेट बोर्ड के अंदरूनी कामकाज और टीम चयन प्रक्रिया तक भी फैली हुई है। एक पुरानी टेलीफोन रिकॉर्डिंग ने मामले को और गंभीर बना दिया है। इस रिकॉर्डिंग में तत्कालीन कोच खुर्रम चोहान यह दावा करते सुने गए हैं कि क्रिकेट कनाडा बोर्ड के वरिष्ठ सदस्य उन पर खास खिलाड़ियों को टीम में शामिल करने के लिए अनुचित दबाव डाल रहे थे। यह खुलासा संकेत देता है कि टीम के भीतर सब कुछ ठीक नहीं था और खिलाड़ियों का चयन योग्यता के बजाय ‘पर्दे के पीछे’ के समझौतों के आधार पर हो रहा था।
इस जांच के परिणाम आने वाले हफ्तों में क्रिकेट जगत की दिशा तय करेंगे। आईसीसी ने स्पष्ट किया है कि वह खेल की गरिमा को बनाए रखने के लिए किसी भी स्तर के भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेगी। यदि मैच फिक्सिंग या स्पॉट फिक्सिंग के आरोप सिद्ध होते हैं, तो न केवल संबंधित खिलाड़ियों पर आजीवन प्रतिबंध लग सकता है, बल्कि कनाडा क्रिकेट बोर्ड को भी भारी दंड और प्रतिबंधों का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, क्रिकेट प्रेमी उम्मीद कर रहे हैं कि जांच पारदर्शी होगी ताकि टी20 वर्ल्ड कप जैसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की साख पर कोई आंच न आए।
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