Cancer Prevention 2026
Cancer Prevention 2026: हाल के वर्षों में भारत सहित पूरी दुनिया में कैंसर के मामलों में चिंताजनक बढ़ोतरी देखी गई है। यह एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनते ही लोग सहम जाते हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सतर्कता और सही जानकारी से इस खतरे को काफी हद तक टाला जा सकता है। कैंसर भले ही एक जटिल और खतरनाक बीमारी हो, लेकिन इसका जोखिम पूरी तरह हमारे हाथ में है। यदि हम अपने दैनिक जीवन, खान-पान और आदतों में सकारात्मक बदलाव लाएं, तो इस जानलेवा बीमारी के जाल से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं।
मैक्स अस्पताल, वैशाली में वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. रोहित कपूर के अनुसार, कैंसर के केवल 5 से 10 प्रतिशत मामले ही जेनेटिक यानी अनुवांशिक होते हैं। बाकी के 90 प्रतिशत मामलों का सीधा संबंध हमारी रोजमर्रा की आदतों, खराब जीवनशैली और दोषपूर्ण खान-पान से होता है। डॉ. कपूर बताते हैं कि यदि कोई व्यक्ति अपने रूटीन को लेकर अनुशासित रहे, तो वह शरीर के भीतर कैंसर कोशिकाओं को पनपने से रोक सकता है। बचाव का पहला कदम जागरूकता है और दूसरा कदम उन आदतों का त्याग करना है जो शरीर को अंदर से खोखला बनाती हैं।
कैंसर के जोखिम को कम करने में हमारे भोजन की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। आज के दौर में ‘फास्ट फूड’ और ‘प्रोसेस्ड मील’ कैंसर का बड़ा कारण बन रहे हैं। रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट जैसे मैदा और अत्यधिक चीनी का सेवन शरीर में सूजन (inflammation) बढ़ाता है। इससे बचने के लिए अपनी थाली में हरी पत्तेदार सब्जियों और ताजे फलों को प्राथमिकता दें। विशेष रूप से संतरे, मौसंबी और नींबू जैसे खट्टे फल एंटी-ऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं। इसके साथ ही बादाम और अखरोट जैसे ड्राई फ्रूट्स का सेवन शरीर को ‘फ्री-रेडिकल्स’ से लड़ने में मदद करता है, जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकते हैं।
भारत में होने वाले कैंसर के मामलों में तंबाकू और शराब का सबसे बड़ा योगदान है। स्मोकिंग (धूम्रपान) और चबाने वाला तंबाकू न केवल फेफड़ों को खराब करता है, बल्कि यह मुंह, गले, भोजन नली और मूत्राशय के कैंसर का भी मुख्य कारक है। वहीं, शराब का नियमित और अधिक मात्रा में सेवन लिवर कैंसर और पेट के कैंसर के खतरे को कई गुना बढ़ा देता है। डॉ. कपूर स्पष्ट चेतावनी देते हैं कि कैंसर से बचने के लिए तंबाकू का किसी भी रूप में सेवन तुरंत बंद करना चाहिए। नशा छोड़ना केवल फेफड़ों के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे शरीर की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।
मोटापा केवल हृदय रोगों का ही नहीं, बल्कि कैंसर का भी एक प्रमुख द्वार है। शरीर में अतिरिक्त वसा हार्मोनल असंतुलन पैदा करती है, जो आगे चलकर कैंसर का कारण बन सकती है। अपने वजन को संतुलित रखने के लिए कैलोरी प्रबंधन बहुत जरूरी है। रोजाना कम से कम 20 से 30 मिनट की एक्सरसाइज, जैसे तेज चलना, साइकिल चलाना या योग, शरीर के मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखती है और कैंसर के जोखिम को कम करती है। सक्रिय जीवनशैली शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है, जिससे कोशिकाएं स्वस्थ रहती हैं।
कुछ विशेष प्रकार के कैंसर, जैसे ब्रेस्ट कैंसर या कोलन कैंसर, एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में जा सकते हैं। यदि आपके परिवार में माता-पिता या किसी नजदीकी रिश्तेदार को कैंसर रहा है, तो आपको अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता है। ऐसी स्थिति में महिलाओं को 20 से 25 साल की उम्र के बाद नियमित अंतराल पर कैंसर स्क्रीनिंग (जैसे मैमोग्राफी या पैप स्मीयर) करानी चाहिए। समय रहते जांच कराने से यदि शरीर में कोई बदलाव हो रहा है, तो उसका शुरुआती स्टेज पर ही पता लगाया जा सकता है, जिससे इलाज की सफलता दर 100 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।
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