Tamil Nadu Liquor Quality : तमिलनाडु में शराब की गुणवत्ता को लेकर राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री जोसेफ विजय ने राज्य की सभी डिस्टिलरी में कड़े गुणवत्ता परीक्षण कराने के निर्देश दिए हैं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तमिलनाडु राज्य विपणन निगम यानी TASMAC के माध्यम से उपभोक्ताओं को बेची जाने वाली शराब में अल्कोहल की मात्रा निर्धारित मानकों के अनुरूप हो। सरकार का यह फैसला हाल में एक शराब निर्माता की कई उत्पादों पर लगी रोक और उसके जल्द हटाए जाने के बाद उठे सवालों के बीच आया है।
एनरिका एंटरप्राइजेज के मामले के बाद बढ़ी चिंता
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला एनरिका एंटरप्राइजेज की 11 तरह की शराब की बिक्री पर अस्थायी प्रतिबंध से जुड़ा है। फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी FSSAI के निर्देश के बाद TASMAC ने 13 अगस्त को इन उत्पादों की बिक्री रोक दी थी। हालांकि, इसके अगले ही दिन प्रोहिबिशन एंड एक्साइज विभाग की ओर से रोक हटाने की सिफारिश कर दी गई। इतनी जल्दी निर्णय बदलने को लेकर उपभोक्ताओं और TASMAC कर्मचारियों के बीच सवाल खड़े हुए।
एक दिन में प्रतिबंध हटने से उठे सवाल
बिक्री पर रोक लगाए जाने के बाद अगले ही दिन उसे दोबारा शुरू करने की सलाह मिलने से शराब की गुणवत्ता और जांच प्रक्रिया को लेकर चिंता बढ़ी। इसके बाद TASMAC के जरिए बेचे जाने वाले सभी तरह के मादक पेय पदार्थों की गुणवत्ता जांच को और मजबूत करने की मांग सामने आई। सरकार अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि डिस्टिलरी से लेकर बाजार तक पहुंचने वाली शराब निर्धारित सुरक्षा और गुणवत्ता मानकों पर खरी उतरे।
डिस्टिलरी से सैंपल लेकर होती है जांच
TASMAC के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, डिस्टिलरी में शराब तैयार होने के बाद उसके नमूने लिए जाते हैं। इन सैंपल को चेन्नई के गिंडी स्थित केंद्रीय सरकारी प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जाता है। प्रयोगशाला से प्राप्त जांच प्रमाणपत्र के आधार पर प्रोहिबिशन एंड एक्साइज विभाग के अधिकारी उत्पाद की गुणवत्ता की पुष्टि करते हैं। इसके बाद ही शराब की बॉटलिंग और बिक्री के लिए भेजने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है।
रिटेल दुकानों से भी लिए जाते हैं सैंपल
अधिकारी ने बताया कि गुणवत्ता जांच केवल डिस्टिलरी तक सीमित नहीं रहती। TASMAC के अधिकारी खुदरा दुकानों से भी अलग-अलग बोतलों के नमूने चुनकर उन्हें प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजते हैं। इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह पता लगाना होता है कि बाजार में पहुंचने के बाद भी उत्पाद निर्धारित मानकों के अनुरूप बना हुआ है या नहीं।
सभी डिस्टिलरी की जांच के दिए गए निर्देश
एनरिका एंटरप्राइजेज से जुड़े विवाद के बाद अधिकारियों को राज्य की सभी डिस्टिलरी में व्यापक गुणवत्ता जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। खासतौर पर शराब में अल्कोहल की मात्रा निर्धारित सीमा के भीतर है या नहीं, इसकी पुष्टि पर जोर दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य उपभोक्ताओं को मानकों के अनुरूप और सुरक्षित उत्पाद उपलब्ध कराना है।
शराब में अल्कोहल की तय सीमा क्या है?
अधिकारियों के अनुसार, TASMAC लंबे समय से गिंडी स्थित राज्य प्रयोगशाला में होने वाले मानक रासायनिक विश्लेषण पर निर्भर रहा है। जांच में यह देखा जाता है कि शराब में अल्कोहल की मात्रा निर्धारित मानक के अनुरूप है या नहीं। आम जनता को बिक्री के लिए निर्धारित शराब में अल्कोहल की मात्रा 42.8 प्रतिशत ABV तक के मानक से जुड़ी होती है। वहीं, वाइन में सामान्यतः ABV 12 से 15 प्रतिशत और बीयर में करीब 5 से 8 प्रतिशत के बीच होता है।
विशेषज्ञों ने केवल ABV जांच पर जताई चिंता
हालांकि, हेल्थ एक्सपर्ट्स और उपभोक्ता संगठनों का कहना है कि केवल अल्कोहल प्रतिशत की जांच आधुनिक खाद्य सुरक्षा मानकों के लिए पर्याप्त नहीं मानी जा सकती। उनके मुताबिक, शराब की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अन्य संभावित रासायनिक और सुरक्षा मानकों की भी व्यापक जांच जरूरी है। इससे उपभोक्ताओं की सुरक्षा को और बेहतर बनाया जा सकता है।
TASMAC पर उपलब्ध हैं करीब 250 शराब ब्रांड
TASMAC के सूत्रों के अनुसार, सरकारी नेटवर्क के जरिए लगभग 250 स्थानीय और दूसरे राज्यों के शराब ब्रांड उपलब्ध हैं। इनमें 180 से अधिक स्थानीय शराब ब्रांड, 43 स्थानीय बीयर, तीन स्थानीय वाइन, छह अन्य राज्यों के शराब ब्रांड, पांच अन्य राज्यों की बीयर और आठ बाहरी राज्यों की वाइन शामिल हैं। ऐसे बड़े नेटवर्क में गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत करना सरकार के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। नई सख्ती के बाद सभी डिस्टिलरी में जांच व्यवस्था को और प्रभावी बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
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