West Bengal Election
West Bengal Election : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के बीच राज्य की राजनीति से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आई है। दक्षिण 24 परगना के जयनगर लोकसभा क्षेत्र से पूर्व सांसद रहे डॉ. तरुण मंडल का नाम मतदाता सूची से हटा दिया गया है। चुनाव आयोग द्वारा शुक्रवार को जारी की गई नई ‘एक्सक्लूजन’ लिस्ट (वर्जित सूची) में उनका नाम शामिल होने के बाद राजनीतिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। एक पूर्व जन-प्रतिनिधि का नाम मतदाता सूची से बाहर होना न केवल प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है, बल्कि चुनावी माहौल में इसे एक बड़े मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है।
पूरा मामला डॉ. तरुण मंडल के गृह क्षेत्र से जुड़ा है। वे आधिकारिक तौर पर दक्षिण हावड़ा विधानसभा क्षेत्र के स्थायी निवासी हैं और उनका नाम इसी निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बूथ नंबर 279 में पंजीकृत था। हाल ही में मतदाता सूची के पुनरीक्षण और अपडेट की प्रक्रिया के दौरान उनका नाम काट दिया गया। दिलचस्प मोड़ तब आया जब उनकी पत्नी, महुआ मंडल का नाम भी जांच के दायरे में था। हालांकि, शुक्रवार को आई अंतिम सूची में महुआ मंडल को ‘वैलिड वोटर’ (वैध मतदाता) माना गया है, जबकि डॉ. तरुण मंडल का नाम सूची से बाहर कर दिया गया है। पूर्व सांसद ने इस पर आश्चर्य जताते हुए इसे एक गंभीर चूक बताया है।
डॉ. तरुण मंडल पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक प्रतिष्ठित नाम रहे हैं। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने ‘सोशल यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट)’ यानी SUCI (C) के टिकट पर जयनगर सीट से ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। उस समय बंगाल में सत्ता परिवर्तन की लहर चल रही थी और उन्होंने कांग्रेस-तृणमूल गठबंधन के समर्थन से वाम मोर्चे के दिग्गज नेता निमई बर्मन (RSP) को करारी शिकस्त दी थी। उनकी वह जीत इसलिए महत्वपूर्ण थी क्योंकि उन्होंने जयनगर सीट पर रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के दशकों पुराने एकछत्र राज को समाप्त कर दिया था।
राज्य की सभी 294 विधानसभा सीटों के लिए चुनावी बिगुल बज चुका है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, बंगाल में दो चरणों में मतदान होगा। पहले चरण की वोटिंग 23 अप्रैल और दूसरे चरण की 29 अप्रैल 2026 को तय की गई है। चुनाव के नतीजे 4 मई 2026 को घोषित किए जाएंगे। इस बार का चुनाव मुख्य रूप से सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच एक कड़े ‘पावर गेम’ के रूप में देखा जा रहा है। जहां ममता बनर्जी अपने चौथे कार्यकाल के लिए पसीना बहा रही हैं, वहीं भाजपा सत्ता परिवर्तन के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी सरकार के 15 साल के रिपोर्ट कार्ड के साथ मैदान में हैं और महिला कल्याण व सामाजिक योजनाओं को अपना मुख्य हथियार बना रही हैं। दूसरी ओर, नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व में भाजपा “सोनार बांग्ला” और “भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन” के नारे के साथ सत्ता पर काबिज होने की पुरजोर कोशिश कर रही है। पूर्व सांसद तरुण मंडल जैसे नेताओं का नाम मतदाता सूची से कटना प्रशासनिक सतर्कता पर सवाल उठाता है, जो चुनाव से पहले एक बड़ा विवाद बन सकता है।
चुनाव से ठीक पहले एक पूर्व सांसद का नाम ‘एक्सक्लूजन लिस्ट’ में आना प्रशासनिक पारदर्शिता की चुनौती को दर्शाता है। डॉ. तरुण मंडल के समर्थकों में इस बात को लेकर काफी रोष है। अब देखना यह होगा कि क्या चुनाव आयोग इस तकनीकी त्रुटि को समय रहते सुधारता है या यह मुद्दा चुनावी रैलियों में विपक्षी दलों के लिए एक नया हथियार बनेगा। फिलहाल, बंगाल की जनता 23 अप्रैल का इंतजार कर रही है जब वे राज्य की अगली सरकार की किस्मत का फैसला करेंगे।
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