Teachers held shovels : बलरामपुर और सूरजपुर जिले को जोड़ने वाली सड़क की बदहाली अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गई है। दरअसल, वर्षों से जर्जर पड़ी इस सड़क की मरम्मत जब जिम्मेदार विभागों ने नहीं की तो थक-हारकर यहां के शिक्षकों ने खुद फावड़ा उठाया और गड्ढों को भरने निकल पड़े। सड़क पर श्रमदान करते शिक्षकों की तस्वीरें और वीडियो अब तेजी से वायरल हो रहे हैं।

यह सड़क खडगवा कला पंचायत (सूरजपुर) से खोखनिया पंचायत (बलरामपुर) को जोड़ती है और रोजाना सैकड़ों शिक्षक व कर्मचारी इसी रास्ते से होकर स्कूल व ड्यूटी के लिए गुजरते हैं। बरसात में हालात और बिगड़ जाते हैं, गड्ढों में पानी भरने से यहां से गुजरना और भी मुश्किल हो जाता है। मजबूरी में शिक्षकों ने खुद ही सड़क सुधारने का बीड़ा उठाया ताकि बच्चों तक पढ़ाई की रोशनी पहुंचाने में उन्हें रोज़ाना जद्दोजहद न करनी पड़े।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत दोनों जिलों की सीमाओं तक पक्की सड़क तो बनी, लेकिन बीच का करीब एक किलोमीटर हिस्सा अब भी अधूरा है। यही कारण है कि लोग रोज़ाना इस दलदलनुमा सड़क से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों ने दोनों जिलों के अफसरों से सामंजस्य बनाकर अधूरे हिस्से का निर्माण पूरा करने की मांग की है।
भूपेश बघेल और सिंह देव ने किया फेसबुक पर वीडियो पोस्ट
इस मामले में राजनीति भी गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने फेसबुक पर पोस्ट कर कहा – “विष्णुदेव फेल! भाजपा का कथित सुशासन देखिए…”। बघेल ने लिखा कि प्रदेश की जनता सरकार से इतनी निराश हो चुकी है कि अपनी समस्याओं का समाधान अब खुद करने मजबूर है।
प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री टीएस सिंह देव ने भी फेसबुक पर वायरल वीडियो पोस्ट कर कहा कि गुरुजन अब शिक्षा दिलाएंगे या सड़क बनाएँगे?
स्थानीय लोगों की बार-बार की मांग के बावजूद प्रशासन और विभाग ने कुछ नहीं किया। क्या यही है सरकार का विकास मॉडल – जहाँ बच्चों का भविष्य सँवारने वाले गुरुजनों को ही सड़कें भी सँवारनी पड़ें?











