Tej Pratap Yadav : तेज प्रताप यादव की चाल से बढ़ी आरजेडी की मुश्किलें, शाहपुर से उतारे अपने प्रत्याशी

Tej Pratap Yadav : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो चुकी है। लालू यादव के बड़े बेटे और आरजेडी नेता तेज प्रताप यादव भी सक्रिय रूप से मैदान में उतर आए हैं। शनिवार को भोजपुर जिले के दौरे पर जन संवाद यात्रा के तहत तेज प्रताप ने बिहिया के एक खेत में धान की रोपाई कर जनता से सीधे संवाद स्थापित किया। इसी दौरान उन्होंने शाहपुर सीट से अपने समर्थक मदन यादव को प्रत्याशी घोषित कर सभी को चौंका दिया।

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बढ़ सकती है पार्टी में अंदरूनी कलह

तेज प्रताप यादव ने जिस शाहपुर सीट से मदन यादव को मैदान में उतारने की घोषणा की है, वहां फिलहाल आरजेडी के मंटू तिवारी विधायक हैं। ऐसे में यदि मदन यादव स्वतंत्र रूप से या तेज प्रताप के समर्थन से चुनाव लड़ते हैं, तो इससे आरजेडी को नुकसान होना तय माना जा रहा है। यह कदम पार्टी की अंदरूनी राजनीति में तनाव बढ़ा सकता है, खासकर तब जब महागठबंधन सीट बंटवारे को लेकर लगातार बैठकें कर रहा है।

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तेज प्रताप की दोहरी रणनीति ने चौंकाया

तेज प्रताप यादव ने अपने संबोधन में यह भी दावा किया कि आगामी चुनाव के बाद बिहार में राजद की सरकार बनेगी, जिसमें गरीबों, किसानों और युवाओं को प्राथमिकता मिलेगी। लेकिन इसी मंच से उन्होंने अपने अलग प्रत्याशी की घोषणा कर सबको चौंका दिया। यह दोहरी रणनीति राजनीतिक विश्लेषकों के लिए भी हैरानी का कारण बनी हुई है।

तेजस्वी को दबाव में लाने की कोशिश

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि तेज प्रताप यादव की यह रणनीति सोची-समझी है। वे पार्टी और परिवार में अपने राजनीतिक महत्व और सम्मान को रेखांकित करना चाहते हैं। प्रत्याशी की घोषणा कर वे न केवल दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं, बल्कि भविष्य की सौदेबाजी में अपनी भूमिका को भी मजबूत कर रहे हैं।

तेज प्रताप बन सकते हैं निर्णायक फैक्टर

2020 के विधानसभा चुनाव में एनडीए और महागठबंधन के बीच कई सीटों पर महज 10-15 हजार वोट का अंतर था। ऐसे में यदि तेज प्रताप यादव अपने प्रभाव से इतनी संख्या में वोट खींचने में सफल होते हैं, तो आरजेडी को बड़ा नुकसान हो सकता है। यही कारण है कि पार्टी भविष्य में उन्हें मनाने की कोशिश कर सकती है, ताकि विपक्षी दलों को इसका लाभ न मिल सके।

तेज प्रताप यादव की हालिया रणनीति बिहार चुनावी परिदृश्य को प्रभावित कर सकती है। उनकी चाल से न केवल आरजेडी के भीतर असंतोष गहराएगा, बल्कि तेजस्वी यादव की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है। अब देखना होगा कि पार्टी किस तरह से इस सियासी संतुलन को साधती है।

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