Bihar Election 2025 :बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की तारीखों की घोषणा के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। नेताओं की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं। इसी कड़ी में राजद नेता और पूर्व मंत्री तेज प्रताप यादव ने भी मीडिया से बातचीत में कई बड़े बयान दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपने दल के साथ चुनाव मैदान में उतरेंगे और उम्मीदवारों की सूची दो दिन में घोषित की जाएगी।

“हम अपने दल के साथ चुनाव लड़ेंगे”
तेज प्रताप यादव ने चुनाव की तारीखों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा “बिहार की जनता अब बदलाव चाहती है। हम अपने दल के साथ चुनाव लड़ेंगे और परसों उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे। हमारा फोकस युवाओं, किसानों और गरीबों के मुद्दों पर होगा।”यह बयान ऐसे समय आया है जब महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर चर्चाएं तेज हैं, और तेज प्रताप का यह रुख बताता है कि वे इस बार अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता को लेकर मुखर हैं।

“मेट्रो का उद्घाटन हुआ, और जमीन धंस गई”
पटना मेट्रो परियोजना के उद्घाटन पर भी तेज प्रताप ने नीतीश सरकार पर तंज कसते हुए कहा,“पटना में मेट्रो का उद्घाटन हुआ और उसी दिन मीठापुर में जमीन धंस गई। कैसा मेट्रो होगा, ये देखना बाकी है। अभी लोग उसमें जाने से घबराएंगे, कोई नहीं जाएगा।”तेज प्रताप यादव ने यह भी कहा कि सरकार दिखावे के लिए उद्घाटन करती है, जबकि ज़मीनी स्तर पर तैयारियां अधूरी होती हैं। उन्होंने इसे “प्रचार की राजनीति” करार दिया।
नीतीश सरकार पर बरसे तेज प्रताप
तेज प्रताप ने मौजूदा एनडीए सरकार को पूरी तरह विफल बताया और आरोप लगाया कि पिछले 20 वर्षों में बिहार में विकास के नाम पर केवल “गंभीर घोषणाएं” हुई हैं, ज़मीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नहीं आया।उन्होंने बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का जिक्र करते हुए कहा कि युवा अब बदलाव चाहते हैं।“हम हर उस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएंगे, जिसे एनडीए सरकार ने नजरअंदाज किया है।”
क्या अलग राह पर हैं तेज प्रताप?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तेज प्रताप यादव का “अपने दल के साथ चुनाव लड़ने” वाला बयान यह संकेत देता है कि वह राजद से कुछ हद तक अलग रणनीति पर काम कर सकते हैं। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह एक राजनीतिक दबाव की रणनीति है या कोई बड़ी योजना का हिस्सा।
बिहार में चुनावी माहौल पूरी तरह से गर्म हो चुका है। तेज प्रताप यादव के बयान न सिर्फ एनडीए सरकार पर सीधा हमला हैं, बल्कि यह भी संकेत देते हैं कि वे इस चुनाव में अपनी स्वतंत्र राजनीतिक पहचान को मजबूत करने की कोशिश में हैं। अब देखना होगा कि उनकी अगली रणनीति क्या होती है और राजद की उम्मीदवार सूची में उनका प्रभाव कितना दिखता है।











