Tendu Patta Collection
Tendu Patta Collection : छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी तेंदूपत्ता संग्रहण योजना जंगलों में रहने वाले हजारों ग्रामीण और आदिवासी परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। वनांचल क्षेत्रों में निवास करने वाले लोगों की आय का यह सबसे मुख्य और बड़ा स्रोत बन चुका है। बलरामपुर के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) आलोक बाजपेयी ने मीडिया एजेंसी एएनआई (ANI) से विशेष बातचीत के दौरान बताया कि यह पूरी योजना ‘छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ’ के माध्यम से अत्यंत पारदर्शी तरीके से संचालित की जा रही है। इस दूरगामी पहल से जिले के सुदूर क्षेत्रों में रहने वाले जरूरतमंद संग्रहकर्ताओं को सीधा आर्थिक लाभ मिल रहा है, जिससे उनका जीवन स्तर पहले से बेहतर हुआ है।
डीएफओ आलोक बाजपेयी के अनुसार, तेंदूपत्ता हमारे आदिवासी भाइयों और बहनों के लिए केवल एक वनोपज नहीं, बल्कि उनकी आजीविका का एक बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण साधन है। वर्तमान में बलरामपुर जिले के लगभग एक लाख तेंदूपत्ता संग्राहक इस कल्याणकारी योजना से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। प्रशासन ने इस सीजन के लिए तेंदूपत्ता की खरीद दर ₹5,500 प्रति मानक बोरी निर्धारित की है, जिसे वनवासियों के लिए एक बेहद फायदेमंद और ऐतिहासिक सौदा माना जा रहा है। इस पूरी खरीद व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए जिले में 44 विशेष समितियों का गठन किया गया है, जिसके तहत कुल 64 लॉट बनाकर संग्रहण का कार्य सुव्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाया जा रहा है।
बलरामपुर पूरी तरह से एक समृद्ध वन क्षेत्र है, इसलिए यह योजना यहां के स्थानीय लोगों की आर्थिक रीढ़ बन चुकी है। योजना के एक लाभार्थी ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि तेंदूपत्ता संग्रहण उनके परिवार का सबसे बड़ा वित्तीय सहारा है। उन्होंने बताया, “हम लोग रोजाना सुबह करीब 5 बजे घने जंगलों में जाकर सावधानी से तेंदूपत्ता तोड़ते हैं। दोपहर तक घर लौटकर पत्तों को साफ किया जाता है और फिर 50-50 पत्तों की गड्डियां तैयार की जाती हैं। शाम को जब हम इन्हें संग्रहण केंद्रों पर ले जाते हैं, तो वन विभाग के कर्मचारी हमारे पत्तों की गुणवत्ता की जांच करते हैं। इसके बाद हमारी मेहनत का पैसा बिना किसी बिचौलिए के सीधे हमारे बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है, जो आगे चलकर हमारी खेती-किसानी के काम आता है।”
छत्तीसगढ़ सरकार की इस दूरदर्शी योजना का दायित्व सिर्फ पत्तों की खरीद-फरोख्त तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत वनवासियों को कई अन्य सामाजिक और सुरक्षात्मक लाभ भी दिए जा रहे हैं। योजना के तहत सभी पंजीकृत तेंदूपत्ता संग्राहकों को मुफ्त जीवन बीमा कवरेज का सुरक्षा कवच प्रदान किया जा रहा है। इसके साथ ही, उनके बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए विशेष शिक्षा प्रोत्साहन योजनाएं चलाई जा रही हैं और मेधावी छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्तियां भी दी जा रही हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के मुताबिक, पूरे बलरामपुर जिले में कुल 482 सक्रिय तेंदूपत्ता संग्रहण केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर तैनात वन विभाग के विशेषज्ञ कर्मचारी केवल उच्च गुणवत्ता वाले पत्तों की ही खरीदी सुनिश्चित करते हैं।
चूंकि बलरामपुर जिले की भौगोलिक सीमाएं देश के तीन अन्य पड़ोसी राज्यों से आकर लगती हैं, इसलिए वन विभाग ने तेंदूपत्ता की तस्करी और अवैध आवाजाही को रोकने के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष सुरक्षा चेकपोस्ट स्थापित किए हैं। वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने जानकारी दी है कि सीमा पर वन रक्षकों द्वारा लगातार दिन-रात पेट्रोलिंग की जा रही है और संदिग्ध वाहनों की कड़ाई से जांच हो रही है। इस कड़े पहरे का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी योजना का शत-प्रतिशत वित्तीय लाभ केवल और केवल छत्तीसगढ़ के वास्तविक और मूल वनाश्रित संग्राहकों तक ही पहुंचे। अधिकारियों का दृढ़ विश्वास है कि इस व्यवस्था से जहां एक ओर वन आधारित समुदायों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, वहीं दूसरी ओर लघु वनोपज की सरकारी खरीद प्रणाली में अभूतपूर्व पारदर्शिता आई है।
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