Terrorist Attacks in Pakistan: पाकिस्तान एक बार फिर आतंक के साए में कांप उठा है। शुक्रवार को देश के दो अलग-अलग प्रांतों में हुए आतंकी हमलों ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक हमला खैबर पख्तूनख्वा के डेरा इस्माइल खान में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल पर हुआ, जबकि दूसरा हमला पंजाब प्रांत के चनाब नगर स्थित अहमदी समुदाय की बेत-उल-महदी मस्जिद को निशाना बनाकर किया गया। इन दोनों घटनाओं में कुल 12 लोगों की मौत हो चुकी है और कई घायल हैं।

डेरा इस्माइल खान में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल पर आत्मघाती हमला
खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के अशांत माने जाने वाले क्षेत्र डेरा इस्माइल खान में आतंकियों ने पुलिस ट्रेनिंग स्कूल को निशाना बनाया। यह हमला आत्मघाती था और इसकी जिम्मेदारी तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने ली है। इस हमले में 3 पुलिसकर्मियों की मौत हुई है, जबकि सुरक्षा बलों की जवाबी कार्रवाई में 6 आतंकी मारे गए। यह हमला उस समय हुआ जब स्कूल परिसर में नियमित ट्रेनिंग चल रही थी।

हमले के तुरंत बाद सुरक्षाबलों ने इलाके को घेर लिया और सर्च ऑपरेशन चलाया। घायल कर्मियों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है।
चनाब नगर में मस्जिद पर हमला – अहमदी समुदाय को बनाया गया निशाना
पंजाब प्रांत के चनाब नगर में अहमदी मुस्लिम समुदाय की सबसे बड़ी मस्जिद बेत-उल-महदी पर आतंकियों ने हमला किया। यह हमला जुमे की नमाज के दौरान हुआ जब मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। हथियारों से लैस आतंकियों ने मस्जिद में घुसने की कोशिश की, लेकिन सुरक्षा में तैनात वॉलंटियर्स ने मोर्चा संभाल लिया। मुठभेड़ में एक आतंकी मारा गया और दो नागरिकों की भी मौत हो गई।
यह हमला न केवल सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय है, बल्कि धार्मिक सहिष्णुता पर भी सीधा हमला माना जा रहा है। अहमदी समुदाय पहले से ही पाकिस्तान में भेदभाव और हिंसा का शिकार होता रहा है।
बढ़ती आतंकी घटनाओं पर चिंता
हाल के वर्षों में पाकिस्तान में आतंकी हमलों में फिर से वृद्धि देखी जा रही है, विशेषकर TTP और अन्य कट्टरपंथी संगठनों की सक्रियता बढ़ी है। मस्जिद और ट्रेनिंग स्कूल जैसे संवेदनशील स्थानों को निशाना बनाया जाना यह दर्शाता है कि आतंकवादी अब भी पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बने हुए हैं।
इन दोहरे आतंकी हमलों ने पाकिस्तान की सुरक्षा व्यवस्था को झकझोर दिया है। धार्मिक स्थल और सुरक्षा बलों को निशाना बनाए जाने से यह स्पष्ट हो जाता है कि आतंकी संगठनों की पहुंच अब भी मजबूत है। सरकार को चाहिए कि वह कड़े कदम उठाकर इन गतिविधियों पर रोक लगाए और अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करे।










