Jana Nayagan Controversy
Jana Nayagan Controversy: दक्षिण भारतीय सिनेमा के दिग्गज सुपरस्टार थलापति विजय की फिल्म ‘जन नायकन’ इन दिनों बॉक्स ऑफिस से ज्यादा अदालती गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है। फिल्म के सर्टिफिकेशन और रिलीज को लेकर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) और फिल्म निर्माताओं के बीच विवाद अब अपने चरम पर है। ताजा घटनाक्रम में, सेंसर बोर्ड ने देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में एक ‘कैविएट’ (Caveat) दाखिल की है। बोर्ड ने अदालत से स्पष्ट रूप से आग्रह किया है कि यदि फिल्म निर्माता सर्टिफिकेशन के संबंध में कोई याचिका दायर करते हैं, तो उस पर कोई भी आदेश पारित करने से पहले सेंसर बोर्ड का पक्ष अनिवार्य रूप से सुना जाना चाहिए।
सेंसर बोर्ड का यह कदम मद्रास हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा दिए गए उस फैसले का परिणाम है, जिसमें बोर्ड को बड़ी राहत मिली थी। दरअसल, इससे पहले हाईकोर्ट के सिंगल जज ने बोर्ड को आदेश दिया था कि वह फिल्म को ‘UA 16+’ सर्टिफिकेट जारी करे। हालांकि, डिवीजन बेंच ने इस आदेश को रद्द कर दिया, जिससे बोर्ड को अपनी समीक्षा प्रक्रिया जारी रखने की शक्ति मिली। अब सीबीएफसी इस बात को लेकर बेहद सतर्क है कि निर्माता सुप्रीम कोर्ट से कोई ‘एक्स-पार्टी’ (एकतरफा) आदेश प्राप्त न कर लें। बोर्ड का रुख साफ है कि फिल्म की विषयवस्तु की जांच नियमों और जनता से मिली शिकायतों के आधार पर करना उनका कानूनी अधिकार है।
विवादों के चलते ‘जन नायकन‘ की रिलीज का गणित पूरी तरह बिगड़ चुका है। केवीएन (KVN) प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी यह फिल्म पहले 9 जनवरी को पोंगल के त्योहार पर रिलीज होनी थी। निर्माताओं का दावा है कि उन्होंने दिसंबर 2025 में ही फिल्म सेंसर के लिए जमा कर दी थी और बोर्ड द्वारा सुझाए गए सभी कट्स और बदलावों को स्वीकार कर लिया था। इसके बावजूद, सेंसर बोर्ड ने शिकायतों का हवाला देते हुए मामले को रिवाइजिंग कमेटी (RC) के पास भेज दिया। हालांकि 15 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप से इनकार कर दिया था, लेकिन अब बोर्ड की कैविएट ने इस कानूनी लड़ाई को एक नया मोड़ दे दिया है।
यह फिल्म न केवल एक सिनेमाई प्रोजेक्ट है, बल्कि थलापति विजय के प्रशंसकों के लिए एक भावनात्मक अनुभव भी है। विजय पहले ही सक्रिय राजनीति में आने का ऐलान कर चुके हैं, और माना जा रहा है कि ‘जन नायकन’ उनके फिल्मी करियर की अंतिम फिल्म हो सकती है। फिल्म में विजय के साथ पूजा हेगड़े, बॉबी देओल और अनुभवी कलाकार प्रकाश राज मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म की कहानी में राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों का गहरा समावेश बताया जा रहा है, यही वजह है कि सेंसर बोर्ड इसकी रिलीज से पहले एक-एक संवाद और दृश्य की बारीकी से जांच कर रहा है ताकि कोई कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा न हो।
जैसे-जैसे अदालती कार्यवाही लंबी खींच रही है, फिल्म के वितरकों और सिनेमा मालिकों के बीच बेचैनी बढ़ती जा रही है। करोड़ों रुपये का निवेश दांव पर लगा है और प्रशंसकों का सब्र भी अब जवाब दे रहा है। विजय की आखिरी फिल्म होने के कारण इसे लेकर जबरदस्त ‘हाइप’ बनी हुई है। फिलहाल, पूरी इंडस्ट्री की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली संभावित सुनवाई पर टिकी हैं। क्या कोर्ट बोर्ड को सर्टिफिकेट जारी करने का आदेश देगा या फिल्म को अभी और कानूनी अग्निपरीक्षा से गुजरना होगा, यह आने वाला समय ही बताएगा।
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