Samudra Manthan: समुद्र मंथन और भगवान शिव के नीलकंठ बनने का रहस्य: जानिए क्यों शिव ने हलाहल विष को निगला नहीं?

Samudra Manthan: समुद्र मंथन की प्रसिद्ध कथा में जब विषाल हलाहल विष निकला था, तब उसे पीकर भगवान शिव ने देवताओं और असुरों की रक्षा की थी। परंतु बहुत से लोग यह नहीं जानते कि शिव ने यह विष पूरा निगला नहीं था, बल्कि उसे अपने कंठ में धारण किया था। इसी वजह से उनका गला गहरा नीला हो गया और वे नीलकंठ कहलाए।

ads

भगवान शिव ने हलाहल विष को क्यों नहीं निगला?

जगद्गुरु आदि शंकराचार्य शिवानंद लाहिड़ी ने इस प्रश्न का गूढ़ उत्तर दिया है। वे कहते हैं कि शिव ने विष को निगलने के बजाय अपने कंठ में रखा, क्योंकि यदि विष उनके पेट में जाता, तो समस्त सृष्टि नष्ट हो जाती। उनका पेट समस्त लोकों का आवास है, जिसे ‘उदर’ कहा जाता है। विष के पेट में जाने से सारी सृष्टि जलकर खाक हो जाती।

Adst

यह रहस्य केवल कथा नहीं, बल्कि शिव के ब्रह्मांडीय स्वरूप का वर्णन भी है। शिव विष को अपने कंठ में धारण करके न केवल अपनी महानता दिखाते हैं, बल्कि यह भी संदेश देते हैं कि वे संसार के पालनहार और रक्षा करने वाले हैं।

पौराणिक कथाओं में शिव का अद्भुत स्वरूप

शिव पुराण में एक कथा है जिसमें असुरों के गुरु शुक्राचार्य शिव के पेट में फंस गए थे। उन्होंने देखा कि शिव के पेट में कई लोक बसे हुए हैं—पाताल लोक, साल लोक, देव लोक और पृथ्वी लोक तक। यहां इंद्र, आदित्य, देवता, असुर, प्रमथ और अन्य प्राणियों के बीच युद्ध भी चल रहा था।

यदि विष उनके पेट तक पहुंच जाता, तो ये सभी लोक नष्ट हो जाते। इसलिए शिव ने विष को अपने कंठ में रखा और विष का दर्द एवं जलन सहते हुए सभी प्राणियों का जीवन बचाया। इस प्रकार शिव जीवन और मृत्यु के बीच की ढाल बन गए। उनकी यह भूमिका उन्हें “भोलेनाथ” का रूप भी देती है, जो सबका रक्षक है और अहंकार का नाश करने वाला है।

Adst

समुद्र मंथन के दौरान निकले 14 दिव्य रत्न

समुद्र मंथन की कथा में विष के अलावा कई अन्य अमूल्य और दिव्य वस्तुएं उत्पन्न हुईं, जिनमें शामिल हैं:

हलाहल विष

कामधेनु गाय

सात मुख वाला दिव्य घोड़ा

ऐरावत हाथी

कल्पवृक्ष

अप्सराएं

चंद्रमा

लक्ष्मी माता

वारुणी देवी

पारिजात वृक्ष

शंख

धन्वंतरि देव

अमृत कलश

और कई दिव्य वस्तुएं

ये रत्न समुद्र मंथन की महत्ता और देवताओं तथा असुरों के संघर्ष का प्रतीक हैं।

भगवान शिव ने अपने कंठ में विष धारण कर इस संसार को विनाश से बचाया। उनका नीलकंठ होना केवल एक कथा नहीं, बल्कि ब्रह्मांडीय संतुलन का अद्भुत प्रतीक है। यह हमें यह भी सिखाता है कि सच्चा त्याग और साहस ही जीवन को बचाने की असली ताकत है।

 

Adst
Admin

Admin

Writer & Blogger

All Posts
पिछले पोस्ट
अगला पोस्ट

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • FIFA World Cup 2026
  • Thetarget365
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अन्य
  • अपराध
  • कारोबार
  • कृषि
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • टेक
  • ट्रेंड
  • ताज़ा खबर
  • धर्म
  • पशु-पक्षी
  • मनोरंजन
  • मौसम
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय
  • विचार/लेख
  • शिक्षा और नौकरी
  • साहित्य/मीडिया
  • सेहत-फिटनेस

© 2026 | All Rights Reserved | Thetarget365.com | Made By Top News Portal Development Company

Contacts

Call Us At – +91-:9406130006
WhatsApp – +91 62665 68872
Mail Us At – thetargetweb@gmail.com
Meet Us At – Shitla Ward, Ambikapur Dist. Surguja Chhattisgarh.497001.