Chhattisgarh Dams: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर-रामानुजगंज जिले में हाल ही में लुत्ती बांध के टूटने से भारी जनधन की हानि हुई है। इस घटना ने राज्य के अन्य पुराने बांधों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रदेश में कई बांध इतने पुराने हो चुके हैं कि उनकी स्थिति चिंताजनक हो गई है।

50 वर्ष से पुराने 28 बांध, 7 बांध 100 वर्ष से अधिक पुराने
छत्तीसगढ़ में कुल 28 ऐसे बांध हैं जिनकी उम्र 50 वर्ष से अधिक है, जबकि 7 बांध तो 100 वर्ष से भी ज्यादा पुराने हैं। इन पुराने बांधों की सुरक्षा और मरम्मत को लेकर विभाग और सरकार की ओर से अब चर्चा शुरू हो गई है।

जर्जर स्थिति में पांच प्रमुख बांध
हाल ही में बांध सुरक्षा समिति ने प्रदेश के पांच बड़े बांधों को जर्जर श्रेणी में शामिल किया है। इनमें दुधावा, मुरुमसिल्ली, रविशंकर सागर, गंगरेल बांध, सोंदूर और रुद्री बैराज शामिल हैं। इन बांधों की नियमित निगरानी और मरम्मत की आवश्यकता सबसे ज्यादा है, क्योंकि बारिश के मौसम में इनका हाल चिंताजनक होता जा रहा है।
बारिश के मद्देनजर अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। इस वजह से प्रदेश के कई बांधों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे दुर्घटना की संभावना और बढ़ गई है।
मरम्मत के लिए बजट तो है, पर कार्य नहीं हुआ
राज्य सरकार ने 50 साल से अधिक उम्र वाले बांधों की मरम्मत के लिए बजट में राशि भी आवंटित की है। पूर्व जल संसाधन मंत्री केदार कश्यप ने विभागीय अधिकारियों को भी निर्देश दिए थे कि बरसात से पहले पुराने बांधों की मरम्मत पूरी की जाए। लेकिन अधिकारियों और इंजीनियरों की लापरवाही के कारण यह काम अधर में लटका हुआ है।
कोरबा में राखड़ बांध टूटने का इतिहास
कोरबा जिले में भी राखड़ बांध टूट चुका है, जिससे स्थानीय लोगों को भारी नुकसान झेलना पड़ा था। यह घटना एक बार फिर इस बात की पुष्टि करती है कि पुराने बांधों की हालत कितनी गंभीर है।
ग्रामवासियों की लगातार शिकायत, विभाग अनसुना
प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में छोटे बांधों की मरम्मत और गहरीकरण के लिए ग्रामवासियों ने बार-बार आवेदन दिए हैं। लेकिन विभाग की तरफ से इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि बांध बनने के बाद से उनकी हालत खराब होती जा रही है और मरम्मत का कोई काम नहीं हुआ।
बांधों के आसपास के लोग दहशत में
लुत्ती बांध के टूटने के बाद अब प्रदेश के कई जिलों में बांधों के किनारे रहने वाले लोग दहशत में हैं। बारिश के कारण अधिकांश बांधों में पानी की भरमार है, और कई बांधों के गेट तथा संरचनाएं भी जीर्ण-शीर्ण स्थिति में हैं। लोग डर रहे हैं कि कहीं उनके गांव के पास का बांध भी टूट न जाए।
छत्तीसगढ़ में पुराने बांधों की सुरक्षा अब सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है। समय रहते उचित मरम्मत और रखरखाव न किया गया तो बड़े हादसे होने का खतरा बना रहेगा। सरकार और संबंधित विभागों को चाहिए कि वे बजट का सही इस्तेमाल करते हुए पुराने बांधों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दें, ताकि भविष्य में कोई भी आपदा न हो।










