Throat Phlegm Remedies : गले में बलगम जमा होने से बार-बार गला साफ करने की इच्छा हो सकती है। इसके साथ खांसी, खराश, गले में भारीपन और निगलने में परेशानी भी महसूस हो सकती है। सर्दी-जुकाम, एलर्जी, सांस की नली में संक्रमण या नाक से बलगम गले की ओर आने जैसी स्थितियां इसकी वजह हो सकती हैं। कई लोगों को सुबह उठने पर गले में कफ ज्यादा महसूस होता है। अगर परेशानी हल्की है, तो कुछ सामान्य उपायों से अस्थायी राहत मिल सकती है।
गुनगुना पानी पीने से मिल सकता है आराम
गले में कफ जमा होने पर दिनभर पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। गुनगुना पानी गले को आराम देने और बलगम को पतला रखने में मदद कर सकता है, जिससे उसे बाहर निकालना आसान हो सकता है। इसके अलावा गुनगुना सूप या अन्य तरल पदार्थ भी लिए जा सकते हैं। बहुत गर्म पेय पदार्थों से बचें, क्योंकि वे गले में जलन पैदा कर सकते हैं। शरीर में पानी की कमी होने से बचना भी जरूरी है।
नमक वाले पानी से करें गरारे
गले में खराश या जलन महसूस होने पर गुनगुने नमक वाले पानी से गरारे करने से कुछ राहत मिल सकती है। इसके लिए एक गिलास गुनगुने पानी में थोड़ा नमक मिलाएं, फिर गरारे करके पानी थूक दें। इसे निगलें नहीं। छोटे बच्चों को गरारे तभी करवाएं, जब वे इसे सुरक्षित तरीके से कर सकें। यदि गरारे करने से परेशानी बढ़ती है, तो इसे बंद कर दें।
भाप और ह्यूमिडिफायर का इस्तेमाल
नाक बंद होने और गले में बलगम महसूस होने पर कमरे में साफ ह्यूमिडिफायर से नमी बनाए रखना कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है। ह्यूमिडिफायर की नियमित सफाई जरूरी है, ताकि उसमें कीटाणु न पनपें। उबलते पानी के बर्तन के ऊपर झुककर भाप लेने से बचें, क्योंकि इससे त्वचा और सांस की नली जलने का खतरा हो सकता है। आराम के लिए सुरक्षित तरीके अपनाना बेहतर है।
खांसी में शहद से मिल सकती है राहत
यदि गले में कफ के साथ खांसी भी हो, तो एक साल से अधिक उम्र के बच्चों और वयस्कों को थोड़ी मात्रा में शहद लेने से खांसी में राहत मिल सकती है। हालांकि, एक साल से छोटे बच्चों को शहद बिल्कुल नहीं देना चाहिए, क्योंकि इससे गंभीर संक्रमण का खतरा रहता है। ध्यान रखें कि शहद और दूसरे घरेलू उपाय लक्षण कम कर सकते हैं, लेकिन हर बीमारी का इलाज नहीं हैं।
गले में कफ होने पर किन बातों से बचें?
धूम्रपान, तंबाकू और धुएं के संपर्क से गले तथा सांस की नलियों में जलन बढ़ सकती है। इसलिए इनसे दूर रहें। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या कफ निकालने वाली दवाएं न लें, क्योंकि सही उपचार कफ के कारण पर निर्भर करता है। पर्याप्त आराम करें और शरीर में पानी की कमी न होने दें।
डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए?
कफ के साथ सांस लेने में परेशानी, सीने में दर्द या खून आने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। तेज बुखार, लगातार बढ़ती खांसी या कई दिनों तक सुधार न होने पर भी डॉक्टर से संपर्क करें। छोटे बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी बीमारी वाले लोगों में लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
जरूरी सलाह और डिस्क्लेमर
गले में कफ जमा होने के कारण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। घरेलू उपायों से आराम न मिले या परेशानी बार-बार हो, तो डॉक्टर से जांच कराएं। किसी भी दवा या उपचार को अपनाने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
Read More : INDIA Bloc Protest: राहुल गांधी का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च का ऐलान, दिल्ली प्रदर्शन पर भाजपा को घेरा