Tiger Shroff Firing Case : बॉलीवुड अभिनेता टाइगर श्रॉफ से जुड़े फायरिंग मामले की जांच में मुंबई क्राइम ब्रांच को कई अहम जानकारियां मिली हैं। जांचकर्ताओं के मुताबिक, यह घटना अचानक नहीं हुई थी, बल्कि इसके पीछे कई महीने पहले से कथित तौर पर साजिश तैयार की जा रही थी। पुलिस जांच में सामने आया है कि इस पूरे ऑपरेशन की योजना मार्च 2026 के आसपास बनाई गई थी। यानी फायरिंग की घटना से करीब आठ महीने पहले ही इसकी तैयारियां शुरू होने का दावा किया जा रहा है। इस मामले में अब तक 11 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि कथित मुख्य साजिशकर्ता अनिल पंडित फरार बताया जा रहा है।

11 आरोपियों को तीन अलग-अलग समूहों में बांटा गया
मुंबई क्राइम ब्रांच की जांच के अनुसार, कथित मुख्य साजिशकर्ता अनिल पंडित ने पूरे ऑपरेशन को अंजाम देने के लिए 11 आरोपियों को तीन अलग-अलग समूहों में बांटा था। हर समूह को एक विशेष जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जांचकर्ताओं का मानना है कि काम को अलग-अलग हिस्सों में बांटने के पीछे उद्देश्य पूरी योजना को व्यवस्थित तरीके से संचालित करना था। इससे कथित तौर पर प्रत्येक व्यक्ति को केवल अपने हिस्से की जिम्मेदारी निभानी थी। पुलिस अब इन समूहों के बीच संपर्क और आपसी तालमेल की कड़ियों की जांच कर रही है।

पहला ग्रुप: रेकी और फायरिंग की जिम्मेदारी
जांच में सामने आए विवरण के मुताबिक, पहले समूह को कथित तौर पर रेकी करने और फायरिंग से जुड़ी जिम्मेदारी दी गई थी। इस समूह के सदस्यों का काम संबंधित स्थान और गतिविधियों पर नजर रखना बताया गया है। क्राइम ब्रांच यह पता लगाने में जुटी है कि इस समूह के सदस्यों ने कितने समय तक निगरानी की और घटना से पहले उनकी क्या भूमिका रही। पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के जरिए इस समूह की गतिविधियों की जानकारी जुटा रही है।
दूसरा ग्रुप: हथियारों का इंतजाम करने का काम
दूसरे समूह को कथित तौर पर हथियारों की व्यवस्था करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि हथियार कहां से प्राप्त किए गए और इस व्यवस्था में कौन-कौन लोग शामिल थे। पुलिस के लिए हथियारों के स्रोत और उनसे जुड़े नेटवर्क का पता लगाना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
तीसरा ग्रुप: मुंबई तक हथियार पहुंचाने की जिम्मेदारी
तीसरे समूह का काम कथित तौर पर हथियारों को मुंबई तक पहुंचाना था। जांच के मुताबिक, हथियारों की व्यवस्था और उनकी डिलीवरी के लिए अलग-अलग लोगों को जिम्मेदारी दी गई थी। क्राइम ब्रांच अब हथियारों की सप्लाई से जुड़े संपर्कों और आरोपियों के बीच हुई बातचीत की पड़ताल कर रही है।

मार्च 2026 में शुरू हुई थी कथित साजिश
जांचकर्ताओं के मुताबिक, इस पूरे मामले की योजना मार्च 2026 के आसपास तैयार की गई थी। इसका मतलब है कि कथित तौर पर फायरिंग की घटना से लगभग आठ महीने पहले ही इसकी रूपरेखा बननी शुरू हो गई थी। पुलिस यह भी जांच रही है कि इतने लंबे समय तक इस योजना को किस तरह आगे बढ़ाया गया और इसमें किन लोगों ने सहयोग किया।
अनिल पंडित पर फंडिंग का आरोप, पुलिस कर रही तलाश
मुंबई क्राइम ब्रांच के मुताबिक, अनिल पंडित को इस मामले का कथित मुख्य साजिशकर्ता बताया जा रहा है। जांच में उस पर पूरे ऑपरेशन की फंडिंग करने का भी आरोप है। फिलहाल वह फरार है और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फायरिंग के पीछे क्या मकसद था और इस नेटवर्क में अन्य कौन लोग शामिल हो सकते हैं।
11 गिरफ्तारियों के बाद अब किन पहलुओं पर जांच?
11 आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद क्राइम ब्रांच का ध्यान कथित फंडिंग नेटवर्क, हथियारों की सप्लाई और अनिल पंडित की भूमिका पर केंद्रित है। पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर पूरे मामले की कड़ियां जोड़ने में लगी है। जांच पूरी होने और आधिकारिक तथ्यों के सामने आने के बाद ही इस कथित साजिश की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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