West Bengal Politics : टीएमसी के भीतर बढ़ी सियासी हलचल, चुनाव आयोग की बैठक से क्या निकलेगा फैसला

West Bengal Politics :  पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में मिली करारी हार के बाद ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (AITC) में मची आंतरिक कलह अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई है। पार्टी की संस्थापक ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकने वाले बागी गुट ने अब अपनी लड़ाई राजधानी दिल्ली के निर्वाचन सदन तक पहुंचा दी है। बागी समूह के प्रमुख और पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 10 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आज दोपहर 12 बजे चुनाव आयोग (ECI) की फुल बेंच के साथ बैठक करेगा। इस हाई-प्रोफाइल मुलाकात में बागी गुट खुद को ‘असली’ तृणमूल कांग्रेस बताते हुए पार्टी के आधिकारिक नाम, चुनाव चिन्ह और फंड पर अपना मालिकाना हक जताने के लिए सबूत पेश करेगा।

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चुनाव आयोग के समक्ष ‘असली’ होने का दावा और कानूनी दस्तावेजीकरण

ऋतब्रत बनर्जी ने दिल्ली रवाना होने से पहले मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया कि पार्टी के भीतर हुए बदलाव पूरी तरह से संवैधानिक और लोकतांत्रिक हैं। उन्होंने बताया कि बीते 22 जून, 2026 को कोलकाता में पार्टी का एक विशेष प्रतिनिधि सत्र आयोजित किया गया था, जिसमें पार्टी के नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय कार्यसमिति का विधिवत गठन किया गया। बनर्जी का दावा है कि संगठन के इन संगठनात्मक बदलावों की कानूनी और औपचारिक जानकारी चुनाव आयोग को पहले ही दी जा चुकी है। उन्होंने चुनाव आयोग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आयोग ने उनके पक्ष को गंभीरता से सुना है और आज की बैठक में वे अपने दावों के समर्थन में सभी जरूरी दस्तावेज आधिकारिक रूप से प्रस्तुत करेंगे।

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सत्ता का समीकरण: 58 विधायकों का समर्थन और समानांतर पार्टी का गठन

तृणमूल कांग्रेस के भीतर का यह संकट तब विस्फोटक हो गया जब विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद पार्टी के कुल 80 विधायकों में से 58 विधायकों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व के प्रति अविश्वास जताते हुए उनसे किनारा कर लिया। इस बगावती समूह ने एकजुट होकर अनुभवी नेता ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता प्रतिपक्ष (LoP) चुना और पार्टी की समानांतर 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति की घोषणा कर दी। यह विवाद अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक गहरी कानूनी लड़ाई में बदल गया है। अब सवाल यह है कि चुनाव आयोग के आधिकारिक दस्तावेजों में किस गुट को पार्टी की वास्तविक राजनीतिक पहचान और संपत्ति का कानूनी उत्तराधिकारी माना जाएगा।

विवादों के बीच महुआ मोइत्रा पर ऋतब्रत बनर्जी का तीखा कटाक्ष

पार्टी के भीतर मचे इस राजनीतिक घमासान के बीच, ऋतब्रत बनर्जी ने तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा पर भी कड़े प्रहार किए। हाल ही में महुआ मोइत्रा से जुड़े कथित ‘अंडा फेंकने’ के विवाद पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में ऋतब्रत बनर्जी ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बिना किसी झिझक के कहा कि महुआ मोइत्रा को बेवजह का ड्रामा करने की आदत है और उन्हें सार्वजनिक जीवन में इस तरह के व्यवहार से बचना चाहिए। बनर्जी के इस बयान ने पार्टी के अंदर मचे वैचारिक मतभेदों और निजी टकरावों को और अधिक स्पष्ट कर दिया है, जिससे ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनौतियां लगातार बढ़ती जा रही हैं।

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Chandan Das

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