Tommy Robinson: ब्रिटेन की राजनीति में इन दिनों एक नाम फिर से सुर्खियों में है टॉमी रॉबिन्सन। हाल ही में लंदन की सड़कों पर हुए ‘यूनाइट द किंगडम’ एंटी-इमिग्रेशन मार्च में उनकी एक अपील पर 1 लाख से अधिक लोग सड़कों पर उतर आए। विरोध का यह नजारा इतना बड़ा था कि राजधानी लंदन में नेपाल जैसा भीड़भाड़ और प्रदर्शन का दृश्य देखने को मिला। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर कौन हैं टॉमी रॉबिन्सन, जिनकी आवाज आज भी इतनी ताकतवर है, जबकि उनका अतीत विवादों और अपराधों से भरा पड़ा है?
टॉमी रॉबिन्सन का असली नाम स्टीफन याक्सली-लेनन (Stephen Yaxley-Lennon) है। उन्होंने साल 2009 में ‘इंग्लिश डिफेंस लीग’ (EDL) नामक एक दक्षिणपंथी संगठन की स्थापना की थी, जो मुख्य रूप से ब्रिटेन में मुस्लिम समुदाय और प्रवासियों के विरोध के लिए जाना जाता है। टॉमी खुद को एंटी-इमिग्रेशन एक्टिविस्ट मानते हैं और अक्सर इस्लाम विरोधी टिप्पणियों के चलते चर्चा में रहते हैं।
टॉमी रॉबिन्सन का इतिहास हिंसा, गुंडागर्दी, और अपराधों से जुड़ा रहा है। उन पर दर्ज आपराधिक मामलों में हमला करना, बंधक बनाना, कोर्ट की अवमानना, धोखाधड़ी, और कई अन्य गंभीर आरोप शामिल हैं। साल 2024 में हाईकोर्ट के आदेश की अवहेलना पर उन्हें 18 महीने की जेल की सजा भी सुनाई गई थी।
एक और अहम बात यह है कि उन्हें जुए की लत है। साल 2021 में वे दिवालिया घोषित हो चुके हैं। उन्होंने खुद स्वीकार किया कि दान में मिली लाखों पाउंड की रकम को उन्होंने जुए में गंवा दिया, और अब उनके पास लौटाने के लिए कुछ नहीं बचा।
हालांकि रॉबिन्सन की छवि विवादित रही है, लेकिन सोशल मीडिया पर उनका प्रभाव अभी भी काफी मजबूत है। X (पूर्व में ट्विटर) पर उनके 10 लाख से अधिक फॉलोअर्स हैं। 2018 में उन्हें ट्विटर से बैन किया गया था, लेकिन X बनने के बाद उनका अकाउंट फिर से बहाल कर दिया गया।
ब्रिटेन में इमिग्रेशन और इस्लामिक समुदाय को लेकर चल रही बहस के बीच टॉमी रॉबिन्सन जैसे चरमपंथी नेताओं की सक्रियता लोकतांत्रिक और सामाजिक ढांचे के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। ‘यूनाइट द किंगडम’ मार्च के जरिए रॉबिन्सन ने सरकार के खिलाफ एक नई लहर खड़ी कर दी, जो ब्रिटेन की राजनीति को भविष्य में प्रभावित कर सकती है।
टॉमी रॉबिन्सन एक ऐसा नाम है जो प्रवासी विरोध, धार्मिक असहिष्णुता, और हिंसक विचारधारा का प्रतीक बन चुका है। फिर भी, उनके समर्थकों की संख्या यह दर्शाती है कि समाज के एक वर्ग में उनकी सोच को समर्थन मिल रहा है जो कि ब्रिटेन के लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
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