DA Hike
DA Hike: त्रिपुरा की राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को होली और नए वित्तीय वर्ष से पहले एक शानदार सौगात दी है। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने राज्य के विकास और सरकारी सेवकों के कल्याण को प्राथमिकता देते हुए सोमवार को महंगाई भत्ते (DA) में महत्वपूर्ण वृद्धि की घोषणा की। यह कदम राज्य के आर्थिक ढांचे को मजबूत करने और सरकारी कर्मचारियों की क्रय शक्ति को बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है।
मुख्यमंत्री माणिक साहा ने सोमवार को विधानसभा में एक ऐतिहासिक निर्णय साझा किया। उन्होंने राज्य सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान किया। इस नई घोषणा के बाद, राज्य में प्रभावी कुल महंगाई भत्ता 36 प्रतिशत से बढ़कर अब 41 प्रतिशत के स्तर पर पहुंच गया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह वृद्धि 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। यह घोषणा वित्त मंत्री प्रणजीत सिंघा रॉय द्वारा बजट भाषण संपन्न करने के तुरंत बाद की गई, जिससे सरकारी गलियारों में खुशी की लहर दौड़ गई।
इस निर्णय का सीधा लाभ राज्य के एक बड़े कार्यबल और सेवानिवृत्त वर्ग को मिलने वाला है। आंकड़ों के अनुसार, त्रिपुरा सरकार के इस फैसले से कुल 1,02,563 नियमित कर्मचारी और 81,019 पेंशनभोगी लाभान्वित होंगे। मुख्यमंत्री ने बताया कि इस 5 प्रतिशत अतिरिक्त डीए और डीआर के भुगतान के लिए राज्य सरकार को हर साल लगभग 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार वहन करना होगा। उन्होंने कहा कि सरकार का निरंतर प्रयास है कि राज्य के कर्मचारियों का भत्ता केंद्र सरकार के कर्मचारियों के बराबर लाया जा सके, ताकि वे महंगाई के दौर में बेहतर जीवन स्तर बनाए रख सकें।
भले ही त्रिपुरा सरकार ने डीए बढ़ाकर 41 प्रतिशत कर दिया है, लेकिन केंद्र सरकार के मानकों की तुलना में अभी भी एक बड़ा अंतराल बना हुआ है। वर्तमान में, केंद्र सरकार अपने कर्मचारियों को 58 प्रतिशत की दर से महंगाई भत्ता प्रदान कर रही है। इस बढ़ोतरी के बावजूद त्रिपुरा के राज्य कर्मचारी केंद्र के मुकाबले 17 प्रतिशत पीछे हैं। मुख्यमंत्री माणिक साहा ने इस अंतर को स्वीकार करते हुए दोहराया कि उनकी सरकार भविष्य में भी वित्तीय संसाधनों की उपलब्धता के आधार पर इस अंतर को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है।
डीए की घोषणा के साथ-साथ, वित्त मंत्री प्रणजीत सिंघा रॉय ने राज्य का आगामी बजट भी पेश किया। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए कुल 34,212.31 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है। राहत की बात यह है कि इस बजट में जनता पर किसी भी नए टैक्स का बोझ नहीं डाला गया है। यह बजट पिछले वर्ष के 32,423 करोड़ रुपये के मुकाबले 5.52 प्रतिशत अधिक है। सरकार ने इस बार ग्रामीण रोजगार, डिजिटल परिवर्तन और बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास को अपनी प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा है।
राज्य की विकास गति को तेज करने के लिए वित्त मंत्री ने पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure) के लिए 8,945.92 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 13.19 प्रतिशत अधिक है। हालांकि, व्यापक विकास योजनाओं और डीए जैसे खर्चों के कारण बजट में 240.72 करोड़ रुपये के घाटे का अनुमान भी लगाया गया है। सरकार का मानना है कि बुनियादी ढांचे पर किया गया यह निवेश भविष्य में राज्य की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा।
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