अंतरराष्ट्रीय

Trump 100% Tariff : यूक्रेन युद्ध पर ट्रंप का बड़ा ऐलान, रूस को सपोर्ट करने वाले देशों पर 100% सेकेंडरी टैरिफ की चेतावनी

Trump 100% Tariff : अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और आगामी चुनावों में फिर से उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध को रोकने के लिए एक नई और कड़ी रणनीति का संकेत दिया है। सोमवार को नाटो महासचिव मार्क रूटे के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने घोषणा की कि यदि जल्द ही युद्धविराम नहीं होता, तो अमेरिका रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत सेकेंडरी टैरिफ लगाएगा। ट्रंप ने व्हाइट हाउस में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “अब समय आ गया है कि वास्तविक बदलाव हो, नहीं तो परिणाम बेहद दर्दनाक होंगे।”

सेकेंडरी टैरिफ की मार पड़ सकती है भारत-चीन-ब्राजील पर

नाटो सेक्रेटरी मार्क रूटे ने ट्रंप की घोषणा का समर्थन करते हुए कहा कि सेकेंडरी टैरिफ का असर सीधे भारत, चीन और ब्राजील जैसे देशों पर पड़ेगा। रूटे के अनुसार, ये देश रूस के प्रमुख व्यापारिक साझेदार हैं और अमेरिका के प्रस्तावित टैरिफ से इनकी अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो सकती हैं। उन्होंने चेतावनी दी, “अगर आप बीजिंग, दिल्ली या ब्राजील में हैं, तो आपको इस नीति पर गंभीरता से विचार करना चाहिए, क्योंकि इसका असर बड़ा होगा।”

रूस के साथ गहरे आर्थिक रिश्तों वाले देशों के लिए संकट की चेतावनी

रूस के वर्तमान व्यापारिक भागीदारों में चीन, भारत, ब्राजील, तुर्की और दक्षिण कोरिया प्रमुख हैं। ये देश रूस से तेल, गैस, खाद, धातुएं और रक्षा उत्पाद आयात करते हैं। यदि अमेरिका इन देशों पर सेकेंडरी टैरिफ लगाता है, तो उन्हें अमेरिका या रूस में से किसी एक के साथ व्यापार चुनना पड़ेगा। यह स्थिति न केवल वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित करेगी, बल्कि ऊर्जा कीमतों में उछाल और ब्रिक्स जैसे समूहों में मतभेद पैदा कर सकती है।

क्या होता है सेकेंडरी टैरिफ और क्यों है ये खतरनाक?

सेकेंडरी टैरिफ ऐसे व्यापारिक या आर्थिक प्रतिबंध होते हैं जो किसी देश द्वारा उन तीसरे पक्षों पर लगाए जाते हैं जो प्रतिबंधित देश (जैसे रूस) के साथ व्यापार करते हैं। ये प्राइमरी टैरिफ से अलग होते हैं, जो सीधे उस देश पर लगते हैं जिसके खिलाफ प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। सेकेंडरी टैरिफ का असर उन कंपनियों, संस्थानों या सरकारों पर पड़ता है जो अप्रत्यक्ष रूप से किसी प्रतिबंधित देश से जुड़ी होती हैं। ऐसे प्रतिबंध आर्थिक सहयोग को सीमित कर देते हैं, जिससे वैश्विक व्यापार संतुलन प्रभावित होता है।

ट्रंप की धमकी के पीछे अमेरिका की रणनीति

ट्रंप द्वारा दी गई यह धमकी कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं है। दरअसल, रूस पर लगाए गए अब तक के प्रतिबंध यूक्रेन युद्ध को रोकने में कारगर नहीं रहे हैं। अमेरिका यह मानता है कि रूस को मिलने वाला आर्थिक सहयोग उसकी युद्ध जारी रखने की ताकत बना हुआ है। ऐसे में अमेरिका अब उन देशों पर दबाव बनाना चाहता है जो रूस को अप्रत्यक्ष आर्थिक समर्थन दे रहे हैं।

भारत-रूस व्यापार संबंध

भारत और रूस के बीच हाल के वर्षों में व्यापार संबंधों में काफी बढ़ोतरी हुई है, खासकर तेल और रक्षा क्षेत्र में। भारत को रूस से सस्ती दरों पर कच्चा तेल मिल रहा है, जिससे देश में महंगाई नियंत्रित रखने में मदद मिली है। अमेरिका का सेकेंडरी टैरिफ भारत को एक कठिन कूटनीतिक स्थिति में डाल सकता है, जहां उसे अमेरिका और रूस के बीच संतुलन बनाना होगा।

चीन और ब्राजील के लिए भी बढ़ेगी दुविधा

चीन, रूस का सबसे बड़ा आर्थिक सहयोगी बनकर उभरा है। दोनों देशों के बीच डॉलर मुक्त व्यापार प्रणाली भी विकसित हो रही है। वहीं ब्राजील भी रूस से खाद्य और ऊर्जा संबंधी सामग्री खरीदता रहा है। ऐसे में अमेरिका के टैरिफ प्रस्ताव से इन देशों की आर्थिक रणनीति पर गहरा असर पड़ेगा।

सेकेंडरी टैरिफ के प्रभाव

यदि ट्रंप सत्ता में लौटते हैं और वाकई सेकेंडरी टैरिफ लागू करते हैं, तो यह वैश्विक व्यापार पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियों को नए नियमों का पालन करना पड़ेगा, जिससे वैश्विक निवेश की धाराएं भी प्रभावित हो सकती हैं। इससे दुनिया भर में ऊर्जा संकट, महंगाई और आर्थिक अस्थिरता पैदा हो सकती है।

रूस पर अब तक के प्रतिबंधों का असर सीमित क्यों रहा?

पश्चिमी देशों द्वारा रूस पर लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बावजूद, रूस की अर्थव्यवस्था अब भी स्थिर बनी हुई है। इसका मुख्य कारण यह है कि रूस ने चीन, उत्तर कोरिया और ईरान के साथ मिलकर एक वैकल्पिक आर्थिक तंत्र तैयार किया है। साथ ही रूस ने भारत, तुर्की और ब्राजील जैसे देशों के साथ व्यापारिक रिश्ते बनाए रखे हैं, जिससे उसे बायपास सिस्टम के तहत आय बनी रही है।

क्या भारत झुकेगा अमेरिकी दबाव में?

भारत ने यूक्रेन युद्ध में शुरू से ही एक तटस्थ और संतुलित कूटनीति अपनाई है। उसने रूस के साथ व्यापार भी जारी रखा और अमेरिका तथा यूरोप के साथ रणनीतिक संबंध भी मजबूत बनाए रखे। लेकिन यदि अमेरिका सेकेंडरी टैरिफ लागू करता है, तो भारत को रणनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए कड़ी कूटनीति अपनानी होगी।

क्या रूस-यूक्रेन युद्ध का दायरा अब वैश्विक होता जा रहा है?

ट्रंप की धमकी यह संकेत देती है कि रूस-यूक्रेन युद्ध अब केवल दो देशों के बीच नहीं, बल्कि पूरे वैश्विक व्यापार और कूटनीति को प्रभावित करने वाला मुद्दा बन चुका है। सेकेंडरी टैरिफ लागू होते हैं तो भारत, चीन, ब्राजील जैसे देशों के सामने नई आर्थिक चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं। यह स्थिति वैश्विक स्तर पर नई आर्थिक ध्रुवीयता की ओर भी इशारा कर सकती है।

Read more  :  Lawrence Bishnoi Canada : कनाडा में लॉरेंस बिश्नोई गैंग को आतंकवादी संगठन घोषित करने की मांग तेज, टारगेट किलिंग और हिंसा के गंभीर आरोप

Thetarget365

Share
Published by
Thetarget365

Recent Posts

Balrampur Opium Farming: बलरामपुर में अफीम की खेती पर बड़ी कार्रवाई, प्रशासन ने 58 पटवारियों का किया सामूहिक तबादला

Balrampur Opium Farming: बलरामपुर जिले में अवैध अफीम की खेती की शिकायतों और राजस्व विभाग…

6 minutes ago

Raigarh News: घरघोड़ा की कुरकुट नदी में मिले दो हाथी शावकों के शव, करंट से मौत की आशंका, जांच में जुटी टीमें

Raigarh News: छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से वन्यजीव प्रेमियों को विचलित करने वाली एक हृदयविदारक…

3 hours ago

Durg Police Brutality: दुर्ग में पुलिस का खौफनाक चेहरा, भाजपा नेता के भाई को बंदूक के बट से लहूलुहान किया; भारी बवाल

Durg Police Brutality: छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले से पुलिस की कार्यप्रणाली को शर्मसार करने वाला…

3 hours ago

This website uses cookies.