Trump vs Judges
Trump vs Judges: अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और देश की सर्वोच्च न्यायपालिका के बीच एक अभूतपूर्व संवैधानिक संकट गहरा गया है। एक ऐतिहासिक फैसले में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति द्वारा लगाए गए कई अंतरराष्ट्रीय टैरिफ को अवैध घोषित कर दिया है। इस फैसले ने न केवल ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ व्यापार नीति को बड़ा झटका दिया है, बल्कि राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमा भी तय कर दी है। कोर्ट के इस कड़े रुख से नाराज होकर ट्रंप ने न केवल न्यायपालिका की तीखी आलोचना की, बल्कि अदालती आदेश की काट के रूप में तुरंत एक नया 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया है।
चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स की अध्यक्षता वाली बेंच ने 6-3 के बहुमत से यह निर्णायक फैसला सुनाया। अदालत ने माना कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ थोपने के लिए 1977 के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) का गलत इस्तेमाल किया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यद्यपि यह कानून राष्ट्रपति को राष्ट्रीय आपातकाल के दौरान व्यापार को ‘नियंत्रित’ करने की अनुमति देता है, लेकिन यह उन्हें संसद (कांग्रेस) की अनुमति के बिना मनमाने ढंग से नए कर या टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता। इसी कानून की आड़ में ट्रंप ने मेक्सिको, कनाडा, चीन और भारत जैसे देशों पर भारी आयात शुल्क लगाए थे, जिन्हें अब कोर्ट ने असंवैधानिक करार दिया है।
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने अत्यंत तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, गवर्नर्स के साथ एक निजी बैठक के दौरान ट्रंप ने इस फैसले को ‘शर्मनाक’ और ‘देश विरोधी’ बताया। उन्होंने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इन अदालतों के बढ़ते दखल के बारे में कुछ करना होगा। ट्रंप ने तंज कसा कि एक राष्ट्रपति के तौर पर उनके पास किसी देश के साथ व्यापार पूरी तरह बंद करने या उसे बर्बाद करने वाले कड़े प्रतिबंध लगाने की शक्ति तो है, लेकिन उन्हें देश की भलाई के लिए एक डॉलर शुल्क वसूलने की इजाजत नहीं दी जा रही, जो उनके अनुसार हास्यास्पद है।
अदालती आदेश के तुरंत बाद अपनी आर्थिक नीतियों को बचाने के लिए ट्रंप ने नया मास्टरस्ट्रोक खेला है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर 10 प्रतिशत का नया ‘इंपोर्ट सरचार्ज’ लगाने की घोषणा की है। ट्रंप का तर्क है कि यह टैरिफ सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए पुराने शुल्कों से हुई राजस्व हानि की भरपाई करेगा। ट्रंप का मानना है कि उच्च टैरिफ के बिना अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता और फैक्ट्रियों को वापस अमेरिका लाने के लिए आयातित सामान को महंगा करना जरूरी है।
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को उन अमेरिकी आयातकों और राज्यों की बड़ी जीत माना जा रहा है जिन्होंने टैरिफ के कारण बढ़ती महंगाई के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी थी। इन कंपनियों का तर्क था कि टैरिफ का बोझ अंततः अमेरिकी उपभोक्ताओं पर ही पड़ता है। इस फैसले के बाद अब उन कंपनियों के लिए अरबों डॉलर के रिफंड (Refund) का रास्ता खुल गया है जिन्होंने पिछले वर्षों में ये शुल्क चुकाए थे। हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि वे कानूनी पेचीदगियों के जरिए इस रिफंड की प्रक्रिया को लंबे समय तक लटका सकते हैं। फिलहाल, इस अदालती आदेश ने वैश्विक व्यापार बाजार में भारी अनिश्चितता पैदा कर दी है।
Iran Israel War: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य अभियान…
13 March 2026 Ka Rashifal: आज चैत्र कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि और शुक्रवार का दिन…
LPG Crisis Rumors: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में एलपीजी (LPG) की आपूर्ति को लेकर…
IPL 2026: इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के 19वें सीजन का बिगुल बज चुका है। भारतीय…
Balrampur Opium: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में अवैध अफीम की खेती का जाल उम्मीद से…
LPG Crisis India: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव के कारण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज'…
This website uses cookies.