Trump Board of Peace
Trump Board of Peace: गाजा में स्थायी शांति स्थापित करने के उद्देश्य से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ को लेकर भारत ने फिलहाल बेहद सतर्क रुख अपनाया हुआ है। केंद्र सरकार इस प्रस्ताव के राजनीतिक और रणनीतिक नफा-नुकसान का बारीकी से विश्लेषण कर रही है। सूत्रों के अनुसार, भारत को इस वैश्विक पहल का औपचारिक निमंत्रण प्राप्त हो चुका है, लेकिन नई दिल्ली ने अभी तक इसमें शामिल होने की कोई अंतिम प्रतिबद्धता नहीं जताई है। भारत की विदेश नीति हमेशा से ‘रणनीतिक स्वायत्तता’ पर आधारित रही है, और इसी कारण किसी भी वैश्विक मंच का हिस्सा बनने से पहले उसके दीर्घकालिक प्रभावों को तौलना सरकार की प्राथमिकता है।
इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर भारत का रुख ऐतिहासिक रूप से स्पष्ट रहा है। भारत का मानना है कि इस विवाद का एकमात्र न्यायसंगत और स्थायी समाधान ‘दो-राष्ट्र सिद्धांत’ (Two-State Solution) में निहित है। यद्यपि भारत क्षेत्र में शांति बहाली के हर प्रयास का स्वागत करता है, लेकिन ‘बोर्ड ऑफ पीस’ की कार्यप्रणाली और इसके उद्देश्यों को लेकर अभी कई सवाल अनुत्तरित हैं। ट्रंप ने लगभग 60 देशों को इस बोर्ड की परिकल्पना साझा करते हुए पत्र भेजे हैं, जिसमें शांति स्थापना के लिए एक नया बहुपक्षीय ढांचा तैयार करने की बात कही गई है।
भारत की इस प्रस्ताव को लेकर सबसे बड़ी हिचकिचाहट इसके भविष्य के कार्यक्षेत्र को लेकर है। भारतीय कूटनीतिज्ञों को अंदेशा है कि गाजा से शुरू होने वाला यह मंच भविष्य में अन्य क्षेत्रीय विवादों में भी हस्तक्षेप कर सकता है। विशेष रूप से, भारत को चिंता है कि कहीं कश्मीर जैसे आंतरिक और संवेदनशील मुद्दों को भी इस मंच पर न घसीटा जाए। यह डर बेवजह नहीं है; मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सीमित सैन्य संघर्ष के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने मध्यस्थता का दावा किया था, जिसे भारत ने सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि संघर्ष विराम पूरी तरह द्विपक्षीय बातचीत का परिणाम था।
सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि फ्रांस जैसे शक्तिशाली देश भी इस पहल को लेकर सशंकित हैं। फ्रांसीसी राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, पेरिस फिलहाल इस बोर्ड का हिस्सा बनने के पक्ष में नहीं है। फ्रांस की मुख्य चिंता यह है कि यह बोर्ड संयुक्त राष्ट्र (UN) के मौजूदा सिद्धांतों और बहुपक्षीय व्यवस्था के समानांतर एक नई प्रणाली खड़ी कर सकता है, जिससे वैश्विक व्यवस्था में टकराव की स्थिति पैदा होगी। फ्रांस इस बोर्ड के कानूनी ढांचे और अंतरराष्ट्रीय कानूनों पर इसके प्रभाव का अध्ययन कर रहा है।
इस बीच, रूस, बेलारूस, थाईलैंड और यूरोपीय संघ ने निमंत्रण मिलने की पुष्टि की है। कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए व्हाइट हाउस ने एक उच्च स्तरीय कार्यकारी समिति बनाई है। इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, पूर्व ब्रिटिश पीएम टोनी ब्लेयर, जेरेड कुश्नर और विश्व बैंक के अध्यक्ष अजय बंगा जैसे प्रभावशाली नाम शामिल हैं। यह बोर्ड मुख्य रूप से गाजा में इजरायल और हमास के बीच युद्धविराम के दूसरे चरण की निगरानी और पुनर्निर्माण से जुड़ा होगा।
PM Modi Trishul Kashi : धर्म और आध्यात्म की नगरी काशी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी…
Summer Drinks : भीषण गर्मी और तपती धूप के मौसम में शरीर को अंदरुनी ठंडक…
Blue Moon May 2026 : धार्मिक और ज्योतिषीय गणना के अनुसार, साल 2026 का मई…
Hamas Leader Dead : इजरायल और हमास के बीच चल रहे विनाशकारी युद्ध में इजरायली…
IIT Kharagpur : देश के प्रतिष्ठित संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी), खड़गपुर से एक…
CBSE 12th Result 2026 : केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की 12वीं की परीक्षा दे…
This website uses cookies.