Trump vs Iran
Trump vs Iran : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने अब एक नया और विनाशकारी रूप ले लिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्र के नाम एक संबोधन में बेहद चौंकाने वाला और बड़ा दावा किया है। ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी सेना ने पिछले एक महीने के भीतर ईरान को ऐसा जख्म दिया है जिससे उबर पाना उसके लिए नामुमकिन होगा। राष्ट्रपति ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में जारी इस जंग ने ईरान की कमर तोड़ दी है और अब अमेरिका को अपनी ऊर्जा जरूरतों या सुरक्षा के लिए मध्य पूर्व (Middle East) पर निर्भर रहने की कतई आवश्यकता नहीं है। उनके इस बयान ने वैश्विक राजनीति में खलबली मचा दी है।
डोनाल्ड ट्रंप ने जानकारी दी कि अमेरिकी सेना ने ठीक एक महीने पहले ईरान के खिलाफ एक सुनियोजित और व्यापक सैन्य अभियान का आगाज किया था। उन्होंने इस ऑपरेशन की सफलता का बखान करते हुए कहा कि इन चार हफ्तों में अमेरिकी जांबाजों ने जिस तेजी और सटीकता से लक्ष्य भेदे हैं, वैसी जीत युद्ध के इतिहास में पहले कभी नहीं देखी गई। ट्रंप के मुताबिक, अमेरिकी तकनीक और मारक क्षमता के सामने ईरानी प्रतिरोध पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। इस अभियान को उन्होंने ‘रणनीतिक रूप से पूर्ण’ करार दिया है।
राष्ट्रपति ट्रंप के दावों में सबसे गंभीर बात ईरान की रक्षा प्रणाली का पूरी तरह नष्ट होना है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, “ईरान की नौसेना अब अस्तित्व में नहीं है और उसकी वायुसेना पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है।” ट्रंप ने आगे बताया कि केवल मशीनें ही नहीं, बल्कि ईरान के कई शीर्ष सैन्य कमांडर, रणनीतिकार और आतंकी नेटवर्क से जुड़े प्रमुख चेहरे भी मारे जा चुके हैं। अमेरिकी हमलों ने ईरान की मिसाइल दागने और ड्रोन हमले करने की क्षमता को न्यूनतम स्तर पर पहुंचा दिया है। हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियां और रॉकेट लॉन्च पैड्स अब मलबे के ढेर में तब्दील हो चुके हैं।
ट्रंप ने कहा कि ईरान की सबसे खूंखार और ताकतवर मानी जाने वाली सैन्य इकाइयों (जैसे रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) का ‘कमांड एंड कंट्रोल’ सिस्टम अब काम नहीं कर रहा है। संचार के साधनों और नेतृत्व की कड़ियों को तोड़कर अमेरिका ने ईरानी सेना को दिशाहीन कर दिया है। ट्रंप ने इसे अब तक की सबसे बड़ी और प्रभावी सैन्य कार्रवाई बताया है। उनके अनुसार, दुश्मन को संभलने का मौका दिए बिना उसकी पूरी युद्धक क्षमता को शून्य कर देना ही इस मिशन का मुख्य उद्देश्य था, जिसे सफलतापूर्वक हासिल कर लिया गया है।
युद्ध के मैदान के अलावा, ट्रंप ने ईरान की आंतरिक स्थिति पर भी कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि ईरानी शासन ने अपने ही देश के लगभग 45 हजार बेगुनाह लोगों की हत्या कर दी है, जो सरकार की नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे। ट्रंप ने ईरान को “दुनिया का सबसे हिंसक और गुंडागर्दी वाला शासन” करार दिया। उन्होंने कहा कि युद्ध के इतिहास में इतने कम समय में किसी दुश्मन को इतना बड़ा और स्पष्ट नुकसान कभी नहीं हुआ है। ट्रंप का मानना है कि यह जीत केवल अमेरिका की नहीं, बल्कि उस क्षेत्र के पीड़ित लोगों की भी है।
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान से यह साफ है कि आने वाले दिनों में मध्य पूर्व की भू-राजनीति पूरी तरह बदल जाएगी। यदि ईरान की सैन्य शक्ति वास्तव में इतनी कमजोर हो गई है, तो होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे रणनीतिक रास्तों पर अमेरिका का वर्चस्व और बढ़ जाएगा। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक अभी इन दावों की जमीनी हकीकत परख रहे हैं, लेकिन ट्रंप के इस आत्मविश्वास भरे संबोधन ने तेहरान को बैकफुट पर ला दिया है। अब देखना यह होगा कि ईरान इस बड़े नुकसान के बाद क्या प्रतिक्रिया देता है या युद्ध विराम की ओर कदम बढ़ाता है।
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