Iran War 2026
Iran War 2026 : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित शांति समझौते पर संदेह जताकर दुनिया को चौंका दिया है। केवल दो दिन पहले जहां ट्रंप ने कहा था कि अमेरिका और ईरान दोनों ‘डील’ करना चाहते हैं, वहीं अब उनके सुर पूरी तरह बदल चुके हैं। उन्होंने ईरान की कूटनीतिक चतुराई पर तंज कसते हुए कहा कि ईरान युद्ध के मैदान में भले ही कमजोर साबित हो रहा हो, लेकिन बातचीत की मेज पर वह बेहद ‘स्मार्ट’ है। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि वे समझौते के लिए उतावले नहीं हैं, बल्कि ईरान खुद वाशिंगटन से डील करने की ‘भीख’ मांग रहा है।
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि तेहरान की मंशा पूरे मिडिल ईस्ट क्षेत्र पर कब्जा करने की है। उन्होंने ईरानी नेतृत्व को दो टूक चेतावनी दी कि या तो वे अमेरिकी शर्तों पर समझौते के लिए राजी हो जाएं या फिर विनाशकारी सैन्य हमलों का सामना करने के लिए तैयार रहें। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने अब तक ईरान के लगभग 90 फीसदी मिसाइल लॉन्चर और उसकी अधिकांश मिसाइलें नष्ट कर दी हैं। उन्होंने कहा, “हम उनके ड्रोन और मिसाइल बनाने वाले कारखानों को एक-एक करके मटियामेट कर रहे हैं और यह सिलसिला तब तक जारी रहेगा जब तक वे पूरी तरह आत्मसमर्पण नहीं कर देते।”
ईरान संकट के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने अपने पारंपरिक सहयोगियों यानी नाटो देशों के प्रति भी कड़ी नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने कहा कि वे नाटो के रुख से बहुत निराश हैं। ट्रंप का तर्क है कि अमेरिका हमेशा नाटो देशों की मदद के लिए सबसे आगे रहता है, लेकिन जब अमेरिका को जरूरत पड़ी, तो इन देशों ने मुंह मोड़ लिया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि नाटो के सदस्य देश अब कह रहे हैं कि युद्ध खत्म होने के बाद वे मदद के लिए आएंगे। ट्रंप ने इसे नाटो के लिए एक ‘अग्निपरीक्षा’ बताया और चेतावनी दी कि अगर इस संकट के समय सहयोगियों ने साथ नहीं दिया, तो अमेरिका इस विश्वासघात को हमेशा याद रखेगा।
राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान की दोहरी छवि पेश करते हुए कहा कि ईरानी लोग बेवकूफ नहीं हैं। उनके अनुसार, ईरान बातचीत के जरिए वक्त काटने और लाभ उठाने में माहिर है। ट्रंप ने कहा, “मुझे पक्का नहीं पता कि हम ईरान के साथ वास्तव में कोई स्थायी डील कर पाएंगे या नहीं, क्योंकि उनका इतिहास भरोसे के लायक नहीं रहा है।” एक तरफ जहां ट्रंप ईरान को सैन्य रूप से ‘बर्बाद’ बता रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी ‘स्मार्ट’ बातचीत की क्षमता से सतर्क भी नजर आ रहे हैं। यह विरोधाभास दर्शाता है कि अमेरिका ईरान पर अधिकतम सैन्य दबाव बनाने के साथ-साथ उसे कूटनीतिक रूप से अलग-थलग करने की रणनीति पर काम कर रहा है।
व्हाइट हाउस से जारी बयानों के अनुसार, अमेरिका अब ईरान की रीढ़ यानी उसके हथियार निर्माण केंद्रों को निशाना बना रहा है। ट्रंप ने साफ कर दिया है कि अमेरिकी वायुसेना और नौसेना ईरान के उन कारखानों को चुन-चुनकर नष्ट कर रही है जहां ड्रोन और आधुनिक मिसाइलें बनाई जाती हैं। उनका उद्देश्य ईरान की जवाबी हमला करने की क्षमता को पूरी तरह खत्म करना है। इस कड़े रुख ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के उन प्रयासों को धक्का पहुंचाया है जो मध्य-पूर्व में जल्द से जल्द शांति बहाली की उम्मीद कर रहे थे। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि ईरान इस ‘करो या मरो’ वाली स्थिति में क्या कदम उठाता है।
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