Trump Threat India : भारत और अमेरिका के बीच व्यापार और टैरिफ को लेकर तनाव एक नई ऊंचाई पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर भारी टैरिफ लगाने की धमकी के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तल्खी देखी जा रही है। लेकिन मंगलवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब ट्रंप से पूछा गया कि क्या अमेरिका खुद रूस से व्यापार नहीं करता, तो वह साफ जवाब देने से बचते नजर आए। उन्होंने कहा, “मुझे इस बारे में कुछ नहीं पता, इसकी जांच करनी पड़ेगी।”

यह सवाल ऐसे वक्त पर पूछा गया, जब ट्रंप ने भारत को चेतावनी दी है कि अगर रूस से कच्चा तेल और हथियारों की खरीद नहीं रोकी गई, तो अमेरिका भारत पर 25% से अधिक का टैरिफ लगा सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब अमेरिका ने पहले ही भारत के आयात पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की समयसीमा 1 अगस्त से एक हफ्ते आगे बढ़ा दी थी।

ट्रंप का दोहरा मापदंड?
भारत सरकार ने ट्रंप के इस कदम को “अनुचित और अनैतिक” बताया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में तीखी प्रतिक्रिया दी और कहा, “अमेरिका खुद रूस से यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड, पैलेडियम और कई केमिकल्स का आयात करता है। फिर भारत को रूस से व्यापार करने पर टार्गेट करना दोगलापन है।” उन्होंने साफ किया कि भारत की ऊर्जा नीति देश की आर्थिक सुरक्षा, बाजार की उपलब्धता और वैश्विक परिस्थितियों पर आधारित है, न कि किसी तीसरे देश के दबाव पर।
अमेरिका की चुप्पी
भारत के इस पलटवार के बाद अमेरिका का रुख चौंकाने वाला रहा। अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी ब्रूस ने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा, “मैं किसी अन्य देश की नीति या बयान पर टिप्पणी नहीं करूंगी।”
इससे पहले, राष्ट्रपति ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा था कि “भारत दुनिया का सबसे अधिक टैरिफ लगाने वाला देश है।” उन्होंने भारत को “अच्छा व्यापारिक साझेदार नहीं” बताया और कहा कि भारत हमारे साथ व्यापार तो करता है, लेकिन हम उसके साथ व्यापार नहीं कर पाते क्योंकि उनके टैरिफ बहुत ज्यादा हैं।
भारत की खरी खरी
भारत ने ट्रंप के बयानों को खारिज करते हुए कहा है कि उसने रूस से व्यापार करने के लिए न तो किसी को सफाई दी है और न ही भविष्य में देने की जरूरत महसूस करता है। भारत ने कहा कि किसी भी द्विपक्षीय संबंध को किसी तीसरे देश के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए।
रूस से 44 खरब रुपये का तेल आयात
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2024-25 में रूस से लगभग 50.2 अरब डॉलर (लगभग 44 खरब रुपये) का कच्चा तेल आयात किया है। यह संख्या यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस से भारत के बढ़ते व्यापार को दर्शाती है, जहां भारत ने रियायती दरों पर तेल खरीदना जारी रखा।
डोनाल्ड ट्रंप के तीखे बयानों और भारत पर संभावित टैरिफ बढ़ोतरी की धमकी के बीच अमेरिका का अपना रूस से व्यापार करना एक बड़ा विरोधाभास उजागर करता है। ऐसे में जब पत्रकार ने इस विरोधाभास पर सवाल किया, तो राष्ट्रपति ट्रंप का जवाब टालमटोल भरा रहा। यह प्रकरण साफ करता है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में एकतरफा शर्तें अब उतनी आसानी से नहीं चलेंगी, और भारत ने भी स्पष्ट कर दिया है कि वह अपने हितों से समझौता नहीं करेगा।










