Middle East Tension
Middle East Tension : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को अपनी विदेश नीति की एक “शानदार जीत” करार दिया है। बुधवार को दिए एक बयान में ट्रम्प ने कहा कि ईरान के चारों ओर जो सैन्य घेराबंदी की गई है, वह पूरी तरह से “अचूक” साबित हुई है। उन्होंने अमेरिकी नौसेना की ताकत का गुणगान करते हुए कहा कि आज अमेरिका के पास दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना है, जिसे उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान और अधिक आधुनिक बनाया है। ट्रम्प के अनुसार, इस नाकाबंदी ने ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है और अब तेहरान के पास हार मानने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचा है।
अमेरिकी दबाव के बीच ईरान ने भी कड़े तेवर दिखाए हैं। ईरान की सरकारी ‘प्रेस टीवी’ के अनुसार, नौसेना कमांडर रियर एडमिरल शाहराम ईरानी ने दुश्मन सेनाओं को चेतावनी दी है कि वे बहुत जल्द एक ऐसे नए और घातक हथियार का अनावरण करेंगे, जिससे अमेरिकी और इजरायली सैनिकों को “दिल का दौरा” पड़ सकता है। यह बयान उस समय आया है जब अमेरिका ने ईरान के उस प्रस्ताव को ठुकरा दिया, जिसमें प्रतिबंध हटाने के बदले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की पेशकश की गई थी। ईरानी कमांडर ने कहा कि “शत्रु” गलतफहमी में हैं कि वे आर्थिक दबाव और अकारण आक्रमण के जरिए ईरान को झुका लेंगे।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग माना जाता है, जिसकी नाकाबंदी ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में पहले ही हलचल पैदा कर दी है। ट्रम्प प्रशासन की रणनीति स्पष्ट है—ईरान के तेल निर्यात को पूरी तरह से रोककर उसे बातचीत की मेज पर लाया जाए। ईरान ने ट्रम्प की इस आर्थिक युद्ध नीति का मजाक उड़ाते हुए इसे विफल बताया है। हालांकि, अमेरिकी नाकाबंदी के कारण ईरानी तेल व्यापार अवरुद्ध हो गया है, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें $120 प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। ईरान का कहना है कि वे इस दबाव के सामने झुकने के बजाय अपनी सैन्य शक्ति से जवाब देंगे।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने साफ कर दिया है कि ईरान के साथ किसी भी प्रकार का समझौता तभी संभव है, जब तेहरान अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को पूरी तरह से त्याग दे। उन्होंने कहा कि “जब तक वे परमाणु हथियार नहीं रखने पर सहमत नहीं होते, कोई सौदा नहीं होगा।” तेहरान की वर्तमान आर्थिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए ट्रम्प ने इसे एक “मृत अर्थव्यवस्था” करार दिया। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि अब उन्हें बातचीत के लिए 18 घंटे की लंबी उड़ानें नहीं भरनी पड़तीं, बल्कि फोन पर ही सीधा संवाद हो रहा है, जो यह दर्शाता है कि दबाव काम कर रहा है।
अमेरिकी नाकाबंदी और कड़े प्रतिबंधों ने ईरान के भीतर गंभीर आर्थिक संकट पैदा कर दिया है। महंगाई दर और मुद्रा के गिरते मूल्य ने आम नागरिकों का जीवन कठिन बना दिया है। ट्रम्प का मानना है कि यह आर्थिक संकट ईरान को अपनी सैन्य और परमाणु नीतियों को बदलने पर मजबूर करेगा। दूसरी ओर, ईरानी नेतृत्व इस संकट को अपनी “प्रतिरोध अर्थव्यवस्था” (Resistance Economy) के जरिए मात देने का दावा कर रहा है। ईरान के नौसेना कमांडर शाहराम ईरानी ने विश्वास जताया है कि उनका देश इस आधुनिक नाकाबंदी को तोड़कर उभरेगा और दुश्मनों को उनकी “ऐतिहासिक गलती” का एहसास कराएगा।
वर्तमान स्थिति यह संकेत दे रही है कि मध्य पूर्व एक बार फिर बड़े सैन्य संघर्ष की ओर बढ़ रहा है। एक तरफ अमेरिका की “मैक्सिमम प्रेशर” नीति है, तो दूसरी तरफ ईरान की सैन्य जवाबी कार्रवाई की धमकियां। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इस बात को लेकर चिंतित हैं कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में कोई छोटी सी भी सैन्य गलती हुई, तो वह एक पूर्ण युद्ध में तब्दील हो सकती है। फिलहाल, दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या कूटनीति के जरिए इस नाकाबंदी का कोई हल निकलता है या फिर ईरान अपने कथित “हार्ट अटैक” वाले हथियार का इस्तेमाल कर संघर्ष को एक नए और खतरनाक मोड़ पर ले जाता है।
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