अंतरराष्ट्रीय

Trump’s Mass Deportation: अमेरिका में भारतीयों को बड़ा झटका, ‘खूंखार अपराधियों’ की लिस्ट में 89 हिन्दुस्तानी

Trump’s Mass Deportation:  अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने अवैध प्रवासियों के खिलाफ अपने चुनावी वादों को अमली जामा पहनाते हुए एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक कार्रवाई शुरू की है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग (DHS) ने ‘वर्स्ट ऑफ द वर्स्ट’ (WOW) नाम से एक नया सार्वजनिक डेटाबेस लॉन्च किया है। इस पहल का उद्देश्य उन खूंखार अपराधियों को बेनकाब करना है जो अवैध रूप से अमेरिका में रहकर वहां की सुरक्षा के लिए खतरा बने हुए थे। इस सूची के सार्वजनिक होने से अमेरिकी नागरिकों को अपने समुदायों में छिपे संदिग्ध तत्वों की पहचान करने और सतर्क रहने में मदद मिलेगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

भारतीय मूल के 89 अपराधी सूची में शामिल: हत्या और तस्करी जैसे गंभीर आरोप

इस नए डेटाबेस में करीब 25,000 अवैध प्रवासियों का ब्योरा दिया गया है, लेकिन भारत के लिए चिंताजनक बात यह है कि इस सूची में कम से कम 89 भारतीय मूल के व्यक्तियों के नाम शामिल हैं। इन व्यक्तियों को अमेरिका के सबसे खतरनाक और वांछित अपराधियों की श्रेणी में रखा गया है। इन पर हत्या, यौन शोषण, गंभीर शारीरिक हमले और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे जघन्य अपराध साबित हो चुके हैं। यह डेटाबेस वेबसाइट WOW.DHS.GOV पर उपलब्ध है, जहाँ दोषियों की तस्वीरें, उनके अपराधों का विवरण और उनकी राष्ट्रीयता को पूरी पारदर्शिता के साथ दर्शाया गया है।

‘नेशनल इमरजेंसी’ और बड़े पैमाने पर निर्वासन की तैयारी

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कार्यभार संभालते ही दक्षिणी सीमा पर ‘नेशनल इमरजेंसी’ (राष्ट्रीय आपातकाल) घोषित कर दी थी। इसी के तहत अब निर्वासन (Deportation) की प्रक्रिया को युद्ध स्तर पर चलाया जा रहा है। होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने इन अपराधियों को ‘राक्षस’ की संज्ञा दी है, जिन्होंने शांतिपूर्ण अमेरिकी बस्तियों में असुरक्षा का माहौल पैदा किया। ट्रंप सरकार का कड़ा संकल्प है कि जब तक अंतिम अपराधी को अमेरिकी धरती से बाहर नहीं निकाल दिया जाता, तब तक यह अभियान रुकने वाला नहीं है। प्रशासन का मानना है कि देश की आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ऐसे कड़े कदम अनिवार्य हैं।

राजनीतिक घमासान: फंडिंग और सुरक्षा नियमों पर छिड़ी जंग

ट्रंप प्रशासन की इस कठोर कार्रवाई ने अमेरिका के भीतर एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। डेमोक्रेटिक पार्टी के सदस्य इस अभियान को अमानवीय बता रहे हैं और होमलैंड सिक्योरिटी विभाग की फंडिंग रोकने की कोशिश कर रहे हैं। विपक्ष की मांग है कि ऑपरेशन में शामिल सुरक्षा एजेंटों के लिए बॉडी कैमरा पहनना अनिवार्य हो और वे मास्क हटाकर अपनी पहचान स्पष्ट करें। हालांकि, ट्रंप प्रशासन इन मांगों को ‘सुरक्षा कार्यों में बाधा’ मान रहा है और फिलहाल पीछे हटने के मूड में नहीं दिख रहा है। कई शहरों में इस नीति के पक्ष और विपक्ष में हिंसक प्रदर्शनों की खबरें भी सामने आई हैं।

वैश्विक स्तर पर आव्रजन नियमों में सख्ती: 2025 का डेटा

अवैध प्रवास के खिलाफ केवल अमेरिका ही नहीं, बल्कि दुनिया के कई अन्य विकसित देश भी अब बेहद कड़ा रुख अपना रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में दुनिया भर के विभिन्न देशों ने सामूहिक रूप से लगभग 22,900 भारतीयों को अवैध रूप से रहने या नियमों का उल्लंघन करने के कारण वापस भारत भेजा है। यह आंकड़े इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इमिग्रेशन कानूनों को लेकर अब कोई ढिलाई नहीं बरती जा रही है। विकसित देशों का स्पष्ट संदेश है कि वैध दस्तावेजों के बिना प्रवेश करने वालों को अब अपने वतन वापस लौटने के लिए तैयार रहना होगा।

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