Trump Putin meeting: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति और संभावित 2024 के रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 15 अगस्त को होने वाली बहुप्रतीक्षित बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। इस बैठक का मुख्य एजेंडा यूक्रेन युद्ध और संभावित युद्धविराम होगा।

ट्रंप की सख्त चेतावनी
बैठक से पहले ट्रंप ने रूस को कड़ा संदेश देते हुए कहा है कि यदि पुतिन युद्धविराम के लिए तैयार नहीं होते, तो उन्हें “गंभीर परिणाम” भुगतने पड़ सकते हैं। ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि भविष्य में एक और बैठक की योजना है, जिसमें यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की भी शामिल हो सकते हैं।

जेलेंस्की को ट्रंप का समर्थन
बैठक से पहले ट्रंप और जेलेंस्की के बीच बातचीत हो चुकी है। इस बातचीत के बाद जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिका यूक्रेन का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दावा किया कि पुतिन अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के प्रभाव को लेकर “दुनिया को धोखा” दे रहे हैं।
यूरोप का खुला समर्थन
यूरोपीय देश भी अब इस बैठक से पहले सक्रिय हो गए हैं। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज़ ने कहा कि “युद्धविराम सर्वोच्च प्राथमिकता है। अगर रूस तैयार नहीं होता है, तो उस पर दबाव बढ़ाना होगा।” वहीं, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने यूक्रेन को लगातार समर्थन देने का वादा किया और इस पहल के लिए ट्रंप की तारीफ करते हुए कहा कि “कूटनीति ही एकमात्र रास्ता है।”
युद्धविराम की चुनौतियां
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप-पुतिन की मुलाकात भले ही उम्मीद जगा रही हो, लेकिन युद्धविराम की शर्तें अभी भी अस्पष्ट हैं। पुतिन युद्धविराम के बदले रूस के कब्जे वाले क्षेत्रों को मान्यता दिलवाने की कोशिश कर सकते हैं, जबकि जेलेंस्की ने स्पष्ट कर दिया है कि “यूक्रेन की एक इंच जमीन भी नहीं दी जाएगी।” वर्तमान में रूस ने यूक्रेन के करीब 20% हिस्से पर कब्जा कर रखा है, जिनमें डोनेत्स्क, लुहांस्क, ज़ापोरिज़्ज़िया और खेरसोन जैसे महत्वपूर्ण इलाके शामिल हैं।
पिछली कोशिशें और अब की उम्मीद
यह पहली बार नहीं है जब युद्धविराम की कोशिश हो रही है। इससे पहले तुर्की के अंकारा और सऊदी अरब के जेद्दा में भी शांति वार्ताएं हुई थीं, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि क्या ट्रंप पुतिन को राज़ी कर पाएंगे या यह भी एक और नाकाम कोशिश साबित होगी।
ट्रंप और पुतिन की यह बैठक वैश्विक राजनीति और यूक्रेन संकट की दिशा बदल सकती है। अगर दोनों नेता किसी समाधान तक पहुंचते हैं, तो यह न सिर्फ युद्ध के अंत की ओर पहला कदम होगा, बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी एक बड़ी जीत होगी।










