India Canada Trade Deal
India Canada Trade Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कनाडा पर 100 फीसदी टैरिफ (आयात शुल्क) लगाने की धमकी ने उत्तरी अमेरिकी देशों के बीच आर्थिक युद्ध की स्थिति पैदा कर दी है। इस भारी वित्तीय दबाव और रणनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अब भारत की ओर रुख किया है। ट्रंप की इस आक्रामक नीति ने कनाडा को अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए नए और मजबूत साझेदारों की तलाश करने पर मजबूर कर दिया है, जिसमें भारत सबसे महत्वपूर्ण खिलाड़ी के रूप में उभरा है।
कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने ‘रॉयटर्स’ को दिए एक विशेष साक्षात्कार में पुष्टि की है कि प्रधानमंत्री मार्क कार्नी मार्च 2026 के पहले सप्ताह में भारत का दौरा कर सकते हैं। यह यात्रा 1 फरवरी को पेश होने वाले भारत के केंद्रीय बजट के तुरंत बाद होगी। इस दौरे का मुख्य आकर्षण ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते’ (CEPA) के लिए औपचारिक वार्ता की शुरुआत होगी। इसके अलावा, दोनों देश परमाणु ऊर्जा, तेल और गैस, पर्यावरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे भविष्य के क्षेत्रों में बड़े समझौतों पर हस्ताक्षर करेंगे।
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का यह प्रयास भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनावपूर्ण संबंधों को सुधारने की एक बड़ी कोशिश है। ज्ञात हो कि पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो द्वारा 2023 में लगाए गए निराधार आरोपों के बाद दोनों देशों के कूटनीतिक संबंधों में भारी गिरावट आई थी। भारत ने हमेशा उन आरोपों का खंडन किया है। अब कार्नी प्रशासन उन पुरानी कड़वाहटों को भुलाकर यूरेनियम, ऊर्जा और खनिज क्षेत्रों में भारत के साथ मिलकर काम करने का शेयर्ड रोडमैप तैयार कर रहा है।
दावोस वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम में मार्क कार्नी ने एक ‘नए वर्ल्ड ऑर्डर’ का संकेत दिया था। उन्होंने साफ कहा था कि पुराने नियमों पर आधारित व्यवस्था अब चरमरा गई है। कनाडा अब भारत जैसी उभरती हुई शक्तियों के साथ गठबंधन बनाना चाहता है। दिलचस्प बात यह है कि कार्नी ने 26 जनवरी 2026 को चीन का दौरा भी किया था, जहाँ कुछ व्यापारिक टैरिफ कम करने पर सहमति बनी, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि चीन के साथ किसी ‘फ्री ट्रेड डील’ का कोई इरादा नहीं है। उनका झुकाव स्पष्ट रूप से भारत के लोकतांत्रिक और स्थिर बाजार की ओर है।
भारत-कनाडा संबंधों की मजबूती का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 26 जनवरी 2026 को कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। इस बैठक में आपसी हितों और रणनीतिक सहयोग को और गहरा करने पर विस्तृत चर्चा हुई। पिछले साल जून में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी और मार्क कार्नी की मुलाकात ने जो नींव रखी थी, अब उस पर कूटनीति की नई इमारत खड़ी हो रही है। दोनों देशों ने अपने उच्चायुक्तों को बहाल कर दिया है, जो एक सकारात्मक भविष्य का संकेत है।
कनाडा खनिज संसाधनों और यूरेनियम का भंडार है, जबकि भारत को अपनी बढ़ती अर्थव्यवस्था के लिए इन संसाधनों की सख्त जरूरत है। कार्नी की आगामी यात्रा केवल एक राजनीतिक दौरा नहीं, बल्कि एक आर्थिक आवश्यकता है। शिक्षा, संस्कृति और ऊर्जा के क्षेत्र में होने वाले ये समझौते न केवल ट्रंप की टैरिफ धमकी का जवाब होंगे, बल्कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में एक नए रणनीतिक संतुलन को भी जन्म देंगे।
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