Jaffar Express Blast
Jaffar Express Blast: पाकिस्तान के अशांत क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर चरमरा गई है। सिंध प्रांत के शिकारपुर इलाके में आतंकवादियों ने एक बार फिर जाफर एक्सप्रेस को अपना निशाना बनाया है। क्वेटा से रावलपिंडी की ओर जा रही इस ट्रेन के गुजरते समय रेलवे ट्रैक पर एक शक्तिशाली विस्फोट हुआ, जिससे ट्रेन के तीन डिब्बे (बोगियां) पटरी से उतर गए। इस हमले ने न केवल रेल यातायात को बाधित किया है, बल्कि पाकिस्तान के भीतर सक्रिय उग्रवादी समूहों के बढ़ते दुस्साहस को भी उजागर किया है। धमाका इतना जोरदार था कि इसकी गूंज दूर तक सुनी गई।
इस हमले के तुरंत बाद प्रतिबंधित संगठन बलूच रिपब्लिकन गार्ड्स (BRG) ने इसकी जिम्मेदारी स्वीकार की है। 26 जनवरी 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान में समूह ने कहा कि यह हमला बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के लिए उनके चल रहे संघर्ष का हिस्सा है। संगठन के प्रवक्ता ने चेतावनी दी है कि जब तक बलूचिस्तान को पाकिस्तान से पूर्ण आजादी नहीं मिल जाती, तब तक राज्य की संपत्तियों और सुरक्षा बलों पर इस तरह के हमले जारी रहेंगे। बीआरजी ने इस ऑपरेशन को अपने ‘कमांडो’ द्वारा सफलतापूर्वक अंजाम दिया गया मिशन बताया है।
बीआरजी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, उनके लड़ाकों ने शिकारपुर और जैकबाबाद के बीच स्थित सुल्तान कोट कस्बे के पास रेलवे ट्रैक पर एक आईईडी (Improvised Explosive Device) फिट किया था। जैसे ही जाफर एक्सप्रेस उस निश्चित स्थान पर पहुँची, आतंकवादियों ने रिमोट कंट्रोल के जरिए विस्फोट कर दिया। संगठन का दावा है कि उन्होंने इस ट्रेन को विशेष रूप से इसलिए चुना क्योंकि इसमें पाकिस्तानी सेना के जवान और अधिकारी यात्रा कर रहे थे। ब्लास्ट के बाद घटनास्थल पर चीख-पुकार मच गई और अफरा-तफरी का माहौल पैदा हो गया।
आतंकी संगठन ने अपने बयान में दावा किया है कि इस विस्फोट में पाकिस्तानी सेना के कई जवानों की मौत हो गई है और दर्जनों अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं। हालांकि, पाकिस्तानी सेना और रेल अधिकारियों ने अभी तक मरने वालों की सही संख्या की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। चश्मदीदों के अनुसार, ट्रेन की बोगियां पलटने की वजह से अंदर फंसे यात्रियों और जवानों को निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। घायलों को नजदीकी सैन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ कई की हालत गंभीर बताई जा रही है।
जाफर एक्सप्रेस पर हुआ यह हमला कोई पहली घटना नहीं है; इससे पहले भी बलूच विद्रोहियों ने इस ट्रेन को कई बार निशाना बनाया है। यह घटना दर्शाती है कि पाकिस्तान का सुरक्षा तंत्र बलूच उग्रवादियों की गतिविधियों को रोकने में विफल साबित हो रहा है। 26 जनवरी, जो कि एक महत्वपूर्ण वैश्विक तिथि है, उस दिन इस हमले को अंजाम देना पाकिस्तान के आंतरिक सुरक्षा दावों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि बलूचिस्तान में संसाधनों के दोहन और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों के कारण स्थानीय समूहों में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ भारी रोष व्याप्त है।
विस्फोट के बाद सिंध और बलूचिस्तान के बीच रेल संपर्क पूरी तरह टूट गया है। रेलवे के तकनीकी विशेषज्ञ और सुरक्षा बल मौके पर पहुँच गए हैं और पटरी से उतरे डिब्बों को हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। पाकिस्तानी सुरक्षा एजेंसियों ने आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान (Search Operation) तेज कर दिया है ताकि हमले में शामिल बीआरजी के लड़ाकों को पकड़ा जा सके। रेलवे प्रशासन का कहना है कि ट्रैक को पूरी तरह ठीक करने और यातायात बहाल करने में काफी समय लग सकता है।
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