Trump tariff warning India : अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत के खिलाफ टैरिफ युद्ध की चेतावनी दी है। एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा, “भारत रूस से तेल खरीदकर युद्ध मशीन को ईंधन दे रहा है, यह अमेरिका के हितों के खिलाफ है। अगर भारत यह जारी रखता है तो वह भारी कीमत चुकाने को तैयार रहे। अगले 24 घंटे में भारत पर बड़ा टैरिफ बम गिराया जाएगा।”

पहले ही लग चुका है 25% टैरिफ
ट्रंप प्रशासन ने 1 अगस्त 2025 से भारत के सभी प्रमुख निर्यातों पर 25% टैरिफ लागू किया है। 2024 में भारत ने अमेरिका को $87 बिलियन का निर्यात किया, जबकि अमेरिका को भारत के साथ $45.7 बिलियन का व्यापार घाटा हुआ। इस असंतुलन को ठीक करने के लिए ट्रंप ने टैरिफ को “आवश्यक कदम” बताया है।

किन क्षेत्रों पर पड़ेगा असर?
सबसे ज्यादा प्रभाव स्मार्टफोन, कपड़ा, ऑटो पार्ट्स और गहनों के निर्यात पर पड़ेगा। वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में अमेरिका ने 44% iPhone भारत से आयात किए, जो टैरिफ के चलते महंगे हो सकते हैं।
कपड़ा और रत्न-आभूषण उद्योग में लाखों भारतीय काम कर रहे हैं। टैरिफ बढ़ने से इन क्षेत्रों में निर्यात घटने और रोजगार प्रभावित होने की आशंका है।
टाटा मोटर्स और भारत फोर्ज जैसी कंपनियों को ऑटो सेक्टर में अमेरिकी मांग घटने का डर है।
हालांकि फार्मा और सेमीकंडक्टर सेक्टर अभी टैरिफ से बचे हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक प्रभाव इन पर भी संभव हैं।
भारत की प्रतिक्रिया: “राष्ट्रीय हितों से समझौता नहीं”
भारत सरकार ने ट्रंप की चेतावनी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि रूस से तेल और रक्षा सौदे भारत के राष्ट्रीय हितों से जुड़े हैं, जिनसे कोई समझौता नहीं किया जा सकता।सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि कृषि और डेयरी उत्पादों पर अमेरिकी दबाव के बावजूद टैरिफ यथावत रहेगा, हालांकि भारत ने बॉर्बन व्हिस्की और हार्ले डेविडसन जैसी अमेरिकी वस्तुओं पर टैरिफ में पहले कुछ राहत दी थी।
$500 बिलियन व्यापार लक्ष्य की कोशिश
भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर बातचीत चल रही है। दोनों देश 2030 तक $500 बिलियन के व्यापार का लक्ष्य तय कर चुके हैं। भारत टैरिफ के दीर्घकालिक असर का अध्ययन कर रहा है और रणनीतिक नीति निर्धारण की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।
ट्रंप की यह नई धमकी भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों में तनाव की एक और लकीर खींच सकती है। आने वाले 24 घंटे दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों और कूटनीतिक संतुलन की परीक्षा लेंगे। भारत के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वह राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए वैश्विक साझेदारियों को संतुलित रखे।










