Trump India Policy: अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) और वरिष्ठ राजनयिक जैक सुलिवन ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर एक बड़ा और गंभीर आरोप लगाया है। सुलिवन का दावा है कि ट्रंप ने अपने परिवार के पाकिस्तान में कारोबारी हितों के चलते भारत-अमेरिका संबंधों को जानबूझकर कमजोर किया। उन्होंने इसे अमेरिका की बड़ी रणनीतिक गलती बताया।

सुलिवन, जो बाइडन प्रशासन में भी महत्वपूर्ण पद पर रहे हैं, ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और अमेरिका का स्वाभाविक सहयोगी है। ऐसे में भारत को दरकिनार करना अमेरिका के दीर्घकालिक हितों के लिए नुकसानदायक है।

ट्रंप पर क्यों लगे हैं आरोप?
सुलिवन ने MeidasTouch यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में कहा,“यह ट्रंप की विदेश नीति की सबसे कम रिपोर्ट की गई कहानियों में से एक है। पाकिस्तान में ट्रंप परिवार के कारोबारी समझौतों के कारण भारत-अमेरिका रिश्तों को किनारे कर देना अमेरिका की एक बड़ी भूल थी।” उन्होंने कहा कि इस प्रकार के फैसलों से जर्मनी, जापान और कनाडा जैसे अमेरिका के पारंपरिक सहयोगी भी अमेरिका की विश्वसनीयता पर सवाल उठाने लगते हैं।
ट्रंप परिवार के पाकिस्तान से कारोबारी रिश्ते
रिपोर्ट्स के अनुसार, इसी वर्ष अप्रैल 2025 में ट्रंप समर्थित वर्ल्ड लिबर्टी फाउंडेशन (WLF) ने पाकिस्तान क्रिप्टो काउंसिल (PCC) के साथ एक समझौता किया था। माना जा रहा है कि ट्रंप और उनके करीबी इस प्रोजेक्ट में 60% हिस्सेदारी रखते हैं। जैक सुलिवन का मानना है कि यह आर्थिक साझेदारी ही ट्रंप की भारत को लेकर ठंडी विदेश नीति की वजह बनी।
भारत के लिए अमेरिका की रणनीतिक भूमिका
जैक सुलिवन ने कहा,“भारत, अमेरिका के लिए तकनीक, टैलेंट, अर्थव्यवस्था और विशेषकर चीन के प्रभाव से मुकाबले के लिहाज से अहम साझेदार होना चाहिए। लेकिन जब आप ऐसे देश को किनारे करते हैं तो आपके बाकी दोस्त भी सोचने लगते हैं कि क्या अमेरिका पर भरोसा किया जा सकता है।”
उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अमेरिका की ताकत उसके भरोसेमंद साझेदारों के साथ संबंधों में रही है, और भारत को नजरअंदाज करना न केवल एशिया में, बल्कि वैश्विक स्तर पर अमेरिका की साख को नुकसान पहुंचा सकता है।
जैक सुलिवन के इन खुलासों ने भारत-अमेरिका रणनीतिक रिश्तों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। यदि ये आरोप सही हैं, तो यह अमेरिका की विदेश नीति में राजनीतिक और निजी स्वार्थों के घातक प्रभाव को दर्शाते हैं। भारत और अमेरिका दोनों लोकतांत्रिक मूल्यों को साझा करते हैं, और भविष्य की वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए सहयोग और विश्वास की मजबूत नींव आवश्यक है।










