Ajit Doval-Iran Meeting: भारत की अध्यक्षता में नई दिल्ली में दो दिवसीय ‘ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक’ का आयोजन किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण मंच पर सदस्य देशों के प्रमुख सुरक्षा अधिकारी एकजुट हुए हैं ताकि वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों और उभरते रणनीतिक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की जा सके। बैठक का मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स राष्ट्रों के बीच आपसी सुरक्षा सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करना है। इस आयोजन के दौरान, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों के साथ द्विपक्षीय वार्ता की, जो भारत की कूटनीतिक सक्रियता को दर्शाता है।

ईरान के साथ पश्चिम एशिया की स्थिति पर गहन मंथन
बैठक के दौरान एनएसए अजित डोभाल ने ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल (एसएनएससी) के रक्षा मामलों के उप सचिव गदीर नेजामी के साथ महत्वपूर्ण बैठक की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने ‘एक्स’ पर इस मुलाकात की जानकारी साझा की। दोनों नेताओं के बीच मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में व्याप्त मौजूदा अस्थिरता और तनावपूर्ण स्थिति पर चर्चा हुई। इसके अतिरिक्त, ब्रिक्स मंच के अंतर्गत दोनों देशों के बीच सहयोग की संभावनाओं और भारत-ईरान के पारंपरिक द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने पर भी विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। यह बैठक क्षेत्रीय स्थिरता के प्रति भारत की गंभीरता को प्रदर्शित करती है।

इथियोपिया के साथ रणनीतिक साझेदारी को मिली नई गति
अजित डोभाल ने इस दौरान इथियोपिया की नेशनल इंटेलिजेंस एंड सिक्योरिटी सर्विस के एनालिसिस विभाग के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मिलियन लेमा टैडेसे से भी मुलाकात की। इस बैठक में भारत और इथियोपिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को और अधिक मजबूत बनाने के विभिन्न क्षेत्रों पर सहमति बनी। दोनों देशों के अधिकारियों ने साझा सुरक्षा चिंताओं को दूर करने और भविष्य के सहयोग के लिए एक नई रूपरेखा तैयार करने की दिशा में चर्चा की। यह मुलाकात अफ्रीका महाद्वीप के साथ भारत के बढ़ते कूटनीतिक और रक्षा संबंधों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जा रही है।
गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियां और नई तकनीकों का सुरक्षा पर प्रभाव
ब्रिक्स एनएसए बैठक के एजेंडे में ‘आज की दुनिया के सामने मौजूद गैर-पारंपरिक सुरक्षा चुनौतियों’ को सबसे अधिक प्राथमिकता दी गई है। सुरक्षा विशेषज्ञ इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि तेजी से विकसित होती तकनीकें किस प्रकार राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नए खतरे उत्पन्न कर रही हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए सामूहिक तंत्र विकसित करना बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु है। इसके साथ ही, आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह और सूचना एवं संचार तकनीक (आईसीटी) के सुरक्षित उपयोग से संबंधित समूहों की हालिया बैठकों के परिणामों की समीक्षा की गई। इन चर्चाओं का उद्देश्य ब्रिक्स देशों की साइबर सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी क्षमताओं में तालमेल बिठाना है।
वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य में भारत की बढ़ती कूटनीतिक भूमिका
नई दिल्ली में आयोजित यह बैठक वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती कूटनीतिक साख का प्रमाण है। सदस्य देशों के बीच रणनीतिक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता यह दर्शाती है कि भारत अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के विषयों में एक प्रमुख स्तंभ के रूप में उभर रहा है। आतंकवाद, साइबर सुरक्षा और क्षेत्रीय तनाव जैसे जटिल विषयों पर ब्रिक्स देशों का साझा दृष्टिकोण विश्व शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। आगामी सत्रों में सुरक्षा सलाहकार इन मुद्दों पर ठोस कार्ययोजनाओं को अंतिम रूप देंगे, जिससे भविष्य में वैश्विक सुरक्षा ढांचे को और अधिक सुरक्षित और संतुलित बनाया जा सके।
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