Donald Trump: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर अदालत से बड़ा झटका लगा है। अमेरिकी संघीय अपील अदालत ने हाल ही में दिए गए अपने फैसले में ट्रंप के उस आदेश को गैरकानूनी करार दिया है, जिसके तहत उन्होंने देश के कुछ शहरों में सेना (नेशनल गार्ड) तैनात करने का निर्देश दिया था। अदालत ने स्पष्ट किया कि ट्रंप का यह कदम संविधान और संघीय कानूनों के अनुरूप नहीं था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने घरेलू अशांति और विरोध प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर अमेरिकी शहरों में सैनिकों की तैनाती का आदेश दिया था। अदालत ने इस फैसले को खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के कदम से लोकतांत्रिक स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों का उल्लंघन होता है।
अदालत ने कहा कि ट्रंप सरकार की ओर से ऐसे कोई ठोस सबूत नहीं दिए गए, जिनसे यह साबित हो सके कि विरोध प्रदर्शनों की स्थिति इतनी गंभीर थी कि सेना की जरूरत पड़ी हो। इस फैसले के बाद ट्रंप को लगातार दूसरी बार न्यायिक झटका लगा है।
यह कोई पहला मौका नहीं है जब अदालत ने ट्रंप के सैन्य फैसलों पर सवाल उठाया हो। इससे पहले ओरेगन के पोर्टलैंड शहर में 200 नेशनल गार्ड सैनिकों की तैनाती पर भी कोर्ट ने रोक लगा दी थी। अदालत ने कहा था कि “प्रदर्शनों की स्थिति में सेना की इतनी बड़ी तैनाती का कोई औचित्य नहीं दिखाया गया।”
ट्रंप प्रशासन का दावा था कि विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा बढ़ने लगी थी, इसलिए सेना तैनात करना आवश्यक था। लेकिन कोर्ट ने माना कि सैन्य हस्तक्षेप नागरिक मामलों में अनुचित है और इससे अमेरिकी कानून का उल्लंघन होता है।
अदालत ने अपने फैसले में “Posse Comitatus Act” का भी उल्लेख किया — यह एक संघीय कानून है, जो घरेलू कानून प्रवर्तन उद्देश्यों के लिए अमेरिकी सेना के उपयोग पर प्रतिबंध लगाता है। इस कानून का उद्देश्य है कि सेना का इस्तेमाल आम नागरिकों के मामलों में न हो, ताकि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक ढांचा सुरक्षित रह सके। हालांकि, इस अधिनियम में कुछ अपवाद भी दिए गए हैं, जैसे राष्ट्रीय आपातकाल या विशेष आदेश के हालात में।
ट्रंप के लिए यह झटका उस समय आया है जब उन पर टैरिफ नीति को लेकर भी कानूनी दबाव बढ़ रहा है। हाल ही में ट्रंप द्वारा लगाए गए कुछ आयात शुल्कों (tariffs) के खिलाफ अदालत में याचिकाएं दाखिल की गई हैं। इन मामलों पर सुनवाई जारी है और फैसला आने से पहले ही ट्रंप ने सोशल मीडिया पर अपनी “जीत की दुआ” की थी। लेकिन कोर्ट के इस नए फैसले ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
ट्रंप के लिए हाल के अदालत के ये फैसले उनके प्रशासनिक निर्णयों पर कानूनी सीमाओं की एक और याद दिलाते हैं। अमेरिकी न्यायपालिका ने दोहराया है कि सेना का इस्तेमाल घरेलू मामलों में नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
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