Twisha Sharma Case
Twisha Sharma Case : कटारा हिल्स थाना क्षेत्र की रहने वाली द्विशा शर्मा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत का मामला लगातार उलझता जा रहा है। इस केस में सबसे बड़ा मोड़ भोपाल एम्स की पोस्टमार्टम (ऑटोप्सी) रिपोर्ट आने के बाद आया है। रिपोर्ट से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जिस बेल्ट से द्विशा द्वारा फांसी लगाने का दावा किया जा रहा था, वह बेल्ट पुलिस ने पोस्टमार्टम के समय डॉक्टरों को उपलब्ध ही नहीं कराई थी।
बेल्ट की अनुपस्थिति के कारण डॉक्टर यह स्पष्ट नहीं कर सके कि मृतका के गले पर मिले निशान उसी बेल्ट के हैं या नहीं। इस गंभीर चूक के सामने आने के बाद जांच कर रही एसआईटी के प्रमुख और मिसरोद एसीपी रजनीश कश्यप ने पुलिस की लापरवाही को स्वीकार किया है। उन्होंने बताया कि इस गलती के बाद अब बेल्ट को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) टीम के माध्यम से एम्स भोपाल में जांच के लिए जमा करा दिया गया है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच मृतका के आरोपी पति समर्थ सिंह को भोपाल जिला न्यायालय से करारा झटका लगा है। अदालत ने मामले की गंभीरता और संदिग्ध परिस्थितियों को देखते हुए समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया है। जमानत याचिका खारिज होने के बाद से पुलिस की कार्रवाई और केस का रुख बदल गया है। वहीं दूसरी ओर, ससुराल पक्ष लगातार खुद को निर्दोष बताते हुए मृतका पर ही आरोप मढ़ रहा है। ससुराल वालों का दावा है कि द्विशा की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और वह नशे की आदी थी, जिसके कारण उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। हालांकि, न्यायालय ने इन दलीलों को दरकिनार करते हुए राहत देने से साफ इनकार कर दिया है।
द्विशा शर्मा के मायके पक्ष के लोगों ने पुलिस प्रशासन और जांच प्रक्रिया पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। मृतका के परिजन नवनिधि शर्मा का कहना है कि पुलिस कमिश्नर ने शुरुआत में दिल्ली एम्स में दोबारा पोस्टमार्टम (री-ऑटोप्सी) कराने की अनुमति दे दी थी, लेकिन बाद में अज्ञात कारणों से अपना फैसला बदल दिया। परिजनों ने आरोप लगाया कि सबूतों को नष्ट करने के उद्देश्य से शव को जानबूझकर लंबे समय तक रोक कर रखा गया ताकि वह डीकंपोज (गलना) हो जाए और महत्वपूर्ण फोरेंसिक साक्ष्य पूरी तरह से कमजोर पड़ जाएं। पीड़ित परिवार ने चेतावनी दी है कि यदि उन्हें इस मामले में निष्पक्ष न्याय नहीं मिला, तो आम जनता का कानून व्यवस्था से भरोसा उठ जाएगा। अब वे इस पूरे मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में किसी स्वतंत्र केंद्रीय एजेंसी या मध्य प्रदेश से बाहर कराने की मांग कर रहे हैं।
घटना के दिन की कड़ियों को जोड़ने पर पुलिस को कई संदिग्ध कृत्य मिले हैं। जानकारी के अनुसार, जब द्विशा का शव फंदे से लटका मिला, तो उसकी सास गिरिबाला सिंह और पति समर्थ सिंह पुलिस को बिना किसी सूचना दिए सीधे उसे अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। जांच एजेंसी का सबसे बड़ा सवाल यही है कि कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना शव को घटनास्थल से क्यों हटाया गया। इस जल्दबाजी के कारण पुलिस और फोरेंसिक टीम को घटनास्थल की तत्काल बारीकी से जांच करने का मौका नहीं मिल सका। पुलिस अब इसे केस का मुख्य पहलू मानकर घर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाल रही है, ताकि मौत के वास्तविक समय और परिस्थितियों का पता लगाया जा सके।
इस रहस्यमयी मौत के बीच सोशल मीडिया पर कुछ कथित चैट स्क्रीनशॉट वायरल हो रहे हैं, जो द्विशा और उसकी मां के बीच के बताए जा रहे हैं। इन चैट्स ने मायके पक्ष के दहेज हत्या के दावों को भारी मजबूती दी है। वायरल संदेशों में द्विशा अपनी मां से रो-रोकर गुहार लगा रही है कि उसे किसी भी तरह वापस घर ले जाएं। उसने अपनी शादीशुदा जिंदगी को ‘नर्क’ बताते हुए गंभीर मानसिक प्रताड़ना का जिक्र किया है। चैट्स के मुताबिक, पति समर्थ सिंह उस पर लगातार शक करता था, उसके गर्भपात (एबॉर्शन) को लेकर प्रताड़ित करता था और उसके पिता से जबरन माफी मंगवाने का दबाव बना रहा था। इन साक्ष्यों के आधार पर मृतका का परिवार निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़ा हुआ है।
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