Uddhav Thackeray on Hindi: महाराष्ट्र में स्कूलों में हिंदी को लेकर छिड़े भाषा विवाद पर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है। ठाकरे ने साफ किया कि वे किसी भी भाषा के विरोध में नहीं हैं, लेकिन जबरदस्ती भाषा थोपे जाने का वे खुलकर विरोध करेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए कहा कि पीएम गुजरात से हैं लेकिन हिंदी अच्छी बोलते हैं – इसका मतलब यह नहीं कि उन्हें जबरदस्ती हिंदी सिखाई गई थी।
उद्धव ठाकरे ने गुरुवार (7 अगस्त) को कहा, “हमारी स्थिति स्पष्ट है – हम किसी भी भाषा का विरोध नहीं करते, लेकिन किसी पर जबरन भाषा थोपना गलत है। क्या आप हिंदी भाषी प्रदेशों में तमिल, तेलुगू या मराठी जबरन पढ़ाएंगे?”उन्होंने आगे कहा कि जब किसी को किसी भाषा की ज़रूरत होती है, तो वह खुद सीख लेता है। “जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए,” ठाकरे ने दोहराया। गौरतलब है कि हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को तीसरी भाषा के रूप में अनिवार्य करने का आदेश दिया था, जिसे स्थानीय स्तर पर भारी विरोध के बाद सरकार को वापस लेना पड़ा।
उद्धव ठाकरे ने अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए 50% टैरिफ के मुद्दे पर भी मोदी सरकार को घेरा। उन्होंने तंज कसते हुए कहा, “जब किसान दिल्ली आना चाहते थे तो उन्हें रोका गया, दीवारें और कीलें लगाई गईं। तब किसान नहीं याद आए। अब अचानक सबको याद आ रहा है कि वे किसान के बेटे हैं।” ठाकरे का इशारा प्रधानमंत्री मोदी के उस बयान की ओर था, जिसमें उन्होंने कहा था कि “भारत अपने किसानों, मछुआरों और डेयरी क्षेत्र के हितों से कोई समझौता नहीं करेगा, चाहे इसके लिए कोई भी कीमत चुकानी पड़े।” उद्धव ने इस बयान पर सवाल उठाते हुए कहा कि अब असली चेहरा सामने आ रहा है।
प्रधानमंत्री की प्रस्तावित चीन यात्रा को लेकर भी उद्धव ठाकरे ने हमला बोला। “पहले कहा गया कि चीन हमारा दुश्मन है, अब उसी चीन में क्यों जा रहे हैं? पाकिस्तान से मैच क्यों खेल रहे हैं?” उन्होंने पूछा, “प्रधानमंत्री देश के लिए कब खड़े होंगे? जब संकट आता है, तब वे गायब हो जाते हैं।”
राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी और भाई राज ठाकरे को लेकर उद्धव ने कहा, “हम दोनों भाई समर्थ हैं। हमें पता है कि क्या करना है और हम करेंगे।”INDIA गठबंधन की आगामी बैठक को लेकर उन्होंने कहा कि रणनीति तय है और सही वक्त पर कदम उठाए जाएंगे।भाषा विवाद, अमेरिकी टैरिफ, किसानों की स्थिति और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर उद्धव ठाकरे ने मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा किया है। उनकी यह बयानबाज़ी न केवल आगामी चुनावों की तैयारियों का संकेत देती है, बल्कि शिवसेना (यूबीटी) के तेज़ होते तेवरों की झलक भी पेश करती है।
रिपोर्ट: डिजिटल डेस्क
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