Akhilesh Yadav on Modi :प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी चीन दौरे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस पर चुटकी लेते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ को भी साथ ले जाने की मांग की है। संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश ने तीखे तंज के साथ केंद्र सरकार की विदेश नीति, अर्थव्यवस्था और युवाओं की बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठाए।
“चीन का भी नाम बदल सकते हैं योगी”
अखिलेश यादव ने अपने चिर-परिचित व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा, “अगर प्रधानमंत्री मोदी चीन जा रहे हैं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी साथ लेकर जाएं। वो नाम बदलने में माहिर हैं, हो सकता है चीन का भी नाम बदल दें।” यह टिप्पणी सीधे तौर पर यूपी में शहरों, जिलों और ऐतिहासिक स्थलों के नाम बदलने को लेकर सीएम योगी की नीति पर कटाक्ष मानी जा रही है।
विदेश नीति और किसानों पर निशाना
अखिलेश ने भारत की विदेश नीति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा,”जो लोग कहते थे कि भारत के दुनिया भर से अच्छे रिश्ते हैं, आज वही देश भारत पर पाबंदियां लगा रहे हैं। हमारी विदेश नीति पूरी तरह से विफल रही है।” उन्होंने किसानों की स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि खेती-बाड़ी, उद्योग, व्यापार सब संकट में हैं। नौजवान बेरोजगार हैं और देश की अर्थव्यवस्था लगातार गिरावट की ओर बढ़ रही है। “अगर किसान बर्बाद हो जाए, नौजवान को नौकरी न मिले और कारोबार ठप हो जाए तो देश किस दिशा में जा रहा है?”, उन्होंने पूछा।
पीएम मोदी का चीन दौरा क्यों अहम?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से दो दिवसीय चीन यात्रा पर रहेंगे, जहां वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में भाग लेंगे। यह दौरा खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह गलवान घाटी में भारत-चीन झड़प के बाद पीएम मोदी की पहली चीन यात्रा होगी। साथ ही, अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच यह दौरा भारत की कूटनीतिक रणनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
अखिलेश यादव की यह टिप्पणी एक ओर जहां राजनीतिक व्यंग्य से भरी है, वहीं दूसरी ओर वह केंद्र सरकार की विदेश नीति, किसानों की हालत और युवाओं की बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों की ओर भी ध्यान दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे समय में जब भारत वैश्विक मंच पर अहम कूटनीतिक फैसलों की ओर बढ़ रहा है, विपक्ष की ये आवाज़ें घरेलू असंतोष को भी रेखांकित कर रही हैं।
रिपोर्ट: डिजिटल डेस्क
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Akhilesh Yadav on Modi : ‘सीएम योगी को साथ चीन ले जाएं पीएम मोदी’: अखिलेश यादव का तंज, विदेश नीति और अर्थव्यवस्था पर भी उठाए सवाल
Akhilesh Yadav on Modi :प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगामी चीन दौरे को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस पर चुटकी लेते हुए सीएम योगी आदित्यनाथ को भी साथ ले जाने की मांग की है। संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अखिलेश ने तीखे तंज के साथ केंद्र सरकार की विदेश नीति, अर्थव्यवस्था और युवाओं की बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर भी सवाल उठाए।
“चीन का भी नाम बदल सकते हैं योगी”
अखिलेश यादव ने अपने चिर-परिचित व्यंग्यात्मक अंदाज़ में कहा, “अगर प्रधानमंत्री मोदी चीन जा रहे हैं तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी साथ लेकर जाएं। वो नाम बदलने में माहिर हैं, हो सकता है चीन का भी नाम बदल दें।” यह टिप्पणी सीधे तौर पर यूपी में शहरों, जिलों और ऐतिहासिक स्थलों के नाम बदलने को लेकर सीएम योगी की नीति पर कटाक्ष मानी जा रही है।
विदेश नीति और किसानों पर निशाना
अखिलेश ने भारत की विदेश नीति को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा,”जो लोग कहते थे कि भारत के दुनिया भर से अच्छे रिश्ते हैं, आज वही देश भारत पर पाबंदियां लगा रहे हैं। हमारी विदेश नीति पूरी तरह से विफल रही है।” उन्होंने किसानों की स्थिति पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि खेती-बाड़ी, उद्योग, व्यापार सब संकट में हैं। नौजवान बेरोजगार हैं और देश की अर्थव्यवस्था लगातार गिरावट की ओर बढ़ रही है। “अगर किसान बर्बाद हो जाए, नौजवान को नौकरी न मिले और कारोबार ठप हो जाए तो देश किस दिशा में जा रहा है?”, उन्होंने पूछा।
पीएम मोदी का चीन दौरा क्यों अहम?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 31 अगस्त से दो दिवसीय चीन यात्रा पर रहेंगे, जहां वे शंघाई सहयोग संगठन (SCO) की बैठक में भाग लेंगे। यह दौरा खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यह गलवान घाटी में भारत-चीन झड़प के बाद पीएम मोदी की पहली चीन यात्रा होगी। साथ ही, अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए टैरिफ और वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों के बीच यह दौरा भारत की कूटनीतिक रणनीति के लिहाज से भी अहम माना जा रहा है।
अखिलेश यादव की यह टिप्पणी एक ओर जहां राजनीतिक व्यंग्य से भरी है, वहीं दूसरी ओर वह केंद्र सरकार की विदेश नीति, किसानों की हालत और युवाओं की बेरोजगारी जैसे गंभीर मुद्दों की ओर भी ध्यान दिलाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे समय में जब भारत वैश्विक मंच पर अहम कूटनीतिक फैसलों की ओर बढ़ रहा है, विपक्ष की ये आवाज़ें घरेलू असंतोष को भी रेखांकित कर रही हैं।
रिपोर्ट: डिजिटल डेस्क
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