UNSC Reform: न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में व्यापक सुधार की भारत की मुहिम को संयुक्त राष्ट्र की ओर से समर्थन मिला है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने सुरक्षा परिषद में बदलाव के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कोशिशों की सराहना की। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र की प्रमुख संस्थाओं में सुधार की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही है।
UNSC की मौजूदा संरचना पर उठे सवाल
स्टीफन दुजारिक ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव लगातार सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते रहे हैं। उनके मुताबिक, UNSC अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा व्यवस्था का प्रमुख स्तंभ है, लेकिन इसकी मौजूदा संरचना आज की दुनिया की वास्तविकताओं को पूरी तरह प्रतिबिंबित नहीं करती। वर्तमान व्यवस्था में पांच स्थायी सदस्य हैं, जिसकी संरचना 1945 के वैश्विक परिदृश्य के अनुरूप बनी थी।
1945 नहीं, 2026 की वास्तविकता दिखाने की जरूरत
यूएन प्रवक्ता ने कहा कि सुरक्षा परिषद समेत अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को वर्तमान समय की वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप ढालना जरूरी है। उन्होंने कहा कि दुनिया 1945 की तुलना में काफी बदल चुकी है और अब 21वीं सदी की आर्थिक, राजनीतिक और जनसांख्यिकीय वास्तविकताओं को अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। इससे वैश्विक व्यवस्था अधिक प्रभावी और प्रतिनिधित्वपूर्ण बन सकती है।
अधिक प्रतिनिधित्व वाली वैश्विक व्यवस्था की जरूरत
दुजारिक ने इस बात पर जोर दिया कि अब समय आ गया है जब संयुक्त राष्ट्र की संस्थाओं को दुनिया की मौजूदा सच्चाई के अनुरूप बनाया जाए। उनका कहना था कि ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए जिसमें अधिक देशों और क्षेत्रों की आवाज प्रभावी तरीके से सुनी जा सके। इससे संयुक्त राष्ट्र को अधिक समावेशी, प्रतिनिधित्वपूर्ण और प्रभावी अंतरराष्ट्रीय संस्था बनाने में मदद मिलेगी।
BRICS और ग्लोबल साउथ की भूमिका पर जोर
BRICS के संदर्भ में दुजारिक ने कहा कि ग्लोबल साउथ के हितों की रक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में भी व्यापक सुधार जरूरी हैं। उन्होंने वैश्विक व्यापार व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत और संतुलित बनाने की आवश्यकता बताई। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था किसी एक देश या समूह के हितों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि सभी देशों को समान अवसर मिलने चाहिए।
भारत की BRICS अध्यक्षता को बताया सकारात्मक
संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता ने कहा कि महासचिव मजबूत बहुपक्षवाद के समर्थक हैं और देशों के बीच तनाव कम करने के लिए सकारात्मक क्षेत्रीय सहयोग को महत्वपूर्ण मानते हैं। उन्होंने कहा कि वैश्विक आबादी और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण हिस्सेदारी रखने के कारण BRICS की भूमिका लगातार बढ़ रही है। भारत की अध्यक्षता को उन्होंने पुल बनाने और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में सुधार की दिशा में सकारात्मक कदम बताया।
आतंकवाद के खिलाफ दोहरे मापदंड से बचने की अपील
दुजारिक ने आतंकवाद को वैश्विक चुनौती बताते हुए कहा कि इससे निपटने के लिए सभी देशों को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के पास आतंकवाद के खिलाफ सदस्य देशों की सहायता के लिए कई संस्थाएं और कार्यक्रम मौजूद हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में किसी भी तरह का दोहरा मापदंड नहीं होना चाहिए, क्योंकि इसका प्रभाव दुनिया के हर हिस्से पर पड़ सकता है।
पीएम मोदी ने UNSC सुधारों पर दिया स्पष्ट संदेश
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने BRICS शिखर सम्मेलन की शुरुआत करते हुए UNSC सुधारों को लेकर स्पष्ट रुख रखा था। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ग्लोबल साउथ को केवल नियमों का पालन करने वाला पक्ष नहीं, बल्कि नियम तय करने में भागीदार बनना होगा। पीएम मोदी ने कहा कि ग्लोबल साउथ संकटों की अग्रिम पंक्ति में है, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में अभी भी पीछे है।
सुरक्षा परिषद सुधार अब और टालना संभव नहीं
प्रधानमंत्री मोदी ने प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों को अब और टाला नहीं जा सकता। उन्होंने सुधार प्रक्रिया को स्पष्ट समयसीमा और ठोस परिणामों से जोड़ने की जरूरत बताई। उनका कहना था कि वैश्विक संस्थाओं को ऐसी व्यवस्था बनानी चाहिए जिसमें हर देश की आवाज और भागीदारी को उचित महत्व मिले।
वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में भी बदलाव की मांग
पीएम मोदी ने अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं में मतदान शक्ति, नेतृत्व के पदों और नीतिगत प्राथमिकताओं को मौजूदा आर्थिक वास्तविकताओं के अनुरूप बनाने की वकालत की। उन्होंने कहा कि वैश्विक आर्थिक वृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले देशों को वैश्विक आर्थिक शासन को आकार देने में भी उचित भूमिका मिलनी चाहिए। इससे अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की विश्वसनीयता और प्रतिनिधित्व दोनों मजबूत होंगे।
Read More : Fatty Liver Reversal: फैटी लिवर को रिवर्स करने के आसान तरीके, डॉक्टर ने बताए असरदार उपाय