Chinese Manjha Murder Case
Chinese Manjha Murder Case : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेश में प्रतिबंधित चाइनीज मांझे से हो रहे जानलेवा हादसों पर कड़ा संज्ञान लिया है। हाल ही में लखनऊ में एक युवक की गर्दन कटने से हुई दुखद मौत के बाद, मुख्यमंत्री ने सख्त निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसे किसी भी मामले को सामान्य दुर्घटना की श्रेणी में नहीं रखा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि चाइनीज मांझे की वजह से होने वाली जानहानि के लिए इसे बेचने और इस्तेमाल करने वालों को सीधे तौर पर जिम्मेदार माना जाएगा और उनके खिलाफ ‘हत्या’ (मर्डर) की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
इस सख्त फैसले के पीछे की वजह 4 फरवरी को लखनऊ के हैदरगंज फ्लाईओवर पर हुई एक दर्दनाक घटना है। दुबग्गा के सीते विहार कॉलोनी निवासी 35 वर्षीय मोहम्मद शोएब, जो पेशे से एक मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (MR) थे, अपनी स्कूटी से जा रहे थे। अचानक फ्लाईओवर पर उनके गले में चाइनीज मांझा फंस गया। मांझा इतना तेज और घातक था कि उनकी गर्दन गहराई तक कट गई। लहूलुहान अवस्था में उन्हें ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका। शोएब अपने परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे, जिनके पीछे उनकी पत्नी, दो नन्ही बेटियां और बुजुर्ग मां बेसहारा हो गई हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में तीखे सवाल किए कि जब यह मांझा प्रतिबंधित है, तो बाजारों में इसकी उपलब्धता कैसे बनी हुई है? मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ‘एक्शन मोड’ में आ गई है। प्रदेश के सभी जिलों के कप्तानों को निर्देश दिए गए हैं कि वे विशेष अभियान चलाकर मांझे के भंडारण, बिक्री और वितरण केंद्रों पर छापेमारी करें। पुलिस अब उस पूरे सिंडिकेट और सप्लाई चेन को ध्वस्त करने में जुटी है जो गुपचुप तरीके से इस ‘कातिल’ धागे को बाजारों तक पहुँचा रहे हैं।
चाइनीज मांझा, जो असल में प्लास्टिक या नायलॉन का सिंथेटिक धागा होता है, उस पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने पहले ही पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत इसके दोषियों को 5 साल की कैद और 1 लाख रुपये तक के दंड का प्रावधान है। अब उत्तर प्रदेश सरकार ने इसमें भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं को जोड़ने का निर्णय लिया है। सरकार का मानना है कि केवल जुर्माने से बात नहीं बनेगी, बल्कि अपराधियों को जेल की सलाखों के पीछे भेजकर एक नजीर पेश करनी होगी।
मुख्यमंत्री ने कानून के डंडे के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता की आवश्यकता पर भी बल दिया है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों को निर्देश दिया है कि स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक स्थानों पर विशेष जागरूकता अभियान चलाए जाएं। नागरिकों को समझाया जाए कि यह मांझा न केवल इंसानों के लिए बल्कि पशु-पक्षियों और पर्यावरण के लिए भी बेहद खतरनाक है। सरकार का उद्देश्य है कि लोग पतंगबाजी के लिए पारंपरिक सूती धागों का ही उपयोग करें ताकि मनोरंजन किसी के लिए काल न बने।
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