उत्तर प्रदेश में 11 एमएलसी सीटों पर मतदान से ठीक पहले वोटर लिस्ट में कथित अजीब नाम सामने आने से विवाद खड़ा हो गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जांच के निर्देश दिए हैं। भाजपा और सपा के बीच कड़े मुकाबले के बीच अब सबकी नजर आयोग की रिपोर्ट पर है।
उत्तर प्रदेश में 11 एमएलसी सीटों पर मतदान से ठीक पहले वोटर लिस्ट में कथित अजीब नाम सामने आने से विवाद खड़ा हो गया है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने जांच के निर्देश दिए हैं। भाजपा और सपा के बीच कड़े मुकाबले के बीच अब सबकी नजर आयोग की रिपोर्ट पर है।

UP MLC Election 2026 : उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए 23 अक्टूबर को मतदान कराया जाएगा। इनमें पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। मतदान से पहले 21 अक्टूबर को चुनाव प्रचार समाप्त हो गया। अंतिम दिन भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) ने मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए पूरी ताकत लगाई। इसी बीच इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित तौर पर दर्ज कुछ असामान्य नामों ने विवाद खड़ा कर दिया है।

मीडिया और सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट की मतदाता सूची में एक मतदाता का नाम ‘राम ने यादव को मारा’ और पिता का नाम ‘मूर्खचंद यादव’ दर्ज होने का दावा किया गया है। इसी तरह फतेहपुर में एक मतदाता के नाम वाले कॉलम में ‘अली के पास है’ लिखा होने की बात सामने आई है। मतदान से ठीक पहले इन कथित प्रविष्टियों ने मतदाता सूची की शुद्धता और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मामले को गंभीरता से लेते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने झांसी के मंडलायुक्त से जवाब मांगा है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा जानकारी के अनुसार, मंडलायुक्त को इस निर्वाचन क्षेत्र का निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी बताया गया है। उन्हें वायरल जानकारी की जांच कर दोपहर तक रिपोर्ट उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि संबंधित नाम वास्तव में आधिकारिक मतदाता सूची में दर्ज हैं या मामला किसी त्रुटि अथवा गलत जानकारी से जुड़ा है।
चुनाव आयोग के अनुसार, इन 11 सीटों पर कुल 152 उम्मीदवार मैदान में हैं। मतदान सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होगा और मतगणना 27 अक्टूबर को कराई जाएगी। मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल 6 दिसंबर 2026 को समाप्त हो रहा है। प्रदेश में मतदान के लिए 2,697 केंद्र बनाए गए हैं, जहां 14,81,310 मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकेंगे।
मतदाता संख्या के लिहाज से लखनऊ स्नातक निर्वाचन क्षेत्र सबसे आगे है। यहां 3,13,531 मतदाता पंजीकृत बताए गए हैं। वाराणसी स्नातक सीट पर 2,88,622 और इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट पर 2,64,233 मतदाता हैं। ये आंकड़े चुनाव के पैमाने और मतदाता सूची के सही प्रबंधन के महत्व को दर्शाते हैं।

स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ और इलाहाबाद-झांसी शामिल हैं। वहीं शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में लखनऊ, वाराणसी, आगरा, मेरठ, बरेली-मुरादाबाद और गोरखपुर-फैजाबाद मंडल शामिल हैं। इन सीटों पर स्नातक और शिक्षक मतदाता अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्र के उम्मीदवारों का चुनाव करेंगे।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले इन एमएलसी चुनावों को भाजपा और सपा के लिए अहम राजनीतिक मुकाबला माना जा रहा है। चुनाव प्रचार में योगी सरकार के कई मंत्रियों, सांसदों और विधायकों ने सक्रिय भूमिका निभाई। दोनों दलों ने मतदाताओं तक पहुंचने और अपने उम्मीदवारों के समर्थन में माहौल बनाने के लिए व्यापक अभियान चलाया।
पिछले चुनाव में सपा ने छह और भाजपा ने पांच सीटें जीती थीं। इस बार भाजपा की कोशिश अपनी सीटों की संख्या बढ़ाकर दो अंकों तक पहुंचाने की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर, वाराणसी, मिर्जापुर, आगरा और गाजियाबाद समेत कई जिलों में प्रचार किया। दूसरी ओर, सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जनसभाओं के बजाय सांसदों, विधायकों, जिला पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के जरिए मतदाताओं से संपर्क करने की रणनीति अपनाई।
मतदान से पहले मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी की जांच और दोनों प्रमुख दलों का चुनावी प्रदर्शन चर्चा के केंद्र में है। अब सबकी नजरें आयोग की जांच रिपोर्ट, 23 अक्टूबर के मतदान और 27 अक्टूबर को आने वाले नतीजों पर टिकी हैं। इन परिणामों से विधान परिषद में दलों की स्थिति पर असर पड़ सकता है।

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