UP Politics
UP Politics: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रयागराज के पावन माघ मेले में सपा संस्थापक स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव की प्रतिमा स्थापित करने की अनुमति न मिलने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। योगी सरकार और स्थानीय प्रशासन पर निशाना साधते हुए अखिलेश ने कहा कि कुछ अधिकारी केवल सरकार की ‘चापलूसी’ करने में व्यस्त हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जिस नियम का हवाला देकर नेताजी की मूर्ति रोकी जा रही है, वह नियम चापलूसी करने वाले अधिकारियों पर क्यों नहीं लागू होता? अखिलेश ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि प्रशासन ने नियमों के साथ खिलवाड़ बंद नहीं किया, तो सपा कार्यकर्ता वहां सभी देवी-देवताओं की मूर्तियाँ स्थापित करेंगे और साथ ही केदारेश्वर मंदिर की स्थापना की मांग को भी पुरजोर तरीके से उठाएंगे।
पार्टी मुख्यालय में आयोजित ‘बाटी-चोखा सहभोज’ कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि मिल-जुलकर बैठना और साथ भोजन करना ही उत्तर प्रदेश की असली संस्कृति और संस्कार है। इसी संदर्भ में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के ब्राह्मण विधायकों की हालिया बैठक पर चुटकी लेते हुए कहा कि अभी तो ये विधायक केवल बैठकर भोजन कर रहे हैं, लेकिन जिस दिन ये अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े हो गए, उस दिन योगी सरकार का क्या होगा? उन्होंने संकेत दिया कि भाजपा के भीतर असंतोष पनप रहा है और ब्राह्मण समुदाय के जनप्रतिनिधि सरकार की कार्यशैली से पूरी तरह खुश नहीं हैं।
अखिलेश यादव ने मतदाता पुनरीक्षण और आंकड़ों के प्रबंधन (SIR) को लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और निर्वाचन आयोग को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने मुख्यमंत्री के उस पुराने बयान का जिक्र किया जिसमें 4 करोड़ वोटों के कटने की बात कही गई थी। अखिलेश ने आरोप लगाया कि वर्तमान में जो आंकड़े सामने आ रहे हैं, वे संदिग्ध हैं। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग और संबंधित अधिकारियों को अपनी निष्पक्षता (Credibility) साबित करनी होगी। सपा अध्यक्ष ने आशंका जताई कि कहीं टेक्नोलॉजी और आंकड़ों के नाम पर आगामी चुनावों में किसी बड़ी हेरा-फेरी या बेईमानी की भूमिका तो नहीं तैयार की जा रही है?
अखिलेश यादव ने प्रशासनिक मशीनरी पर हमला जारी रखते हुए कहा कि अधिकारियों की कार्यप्रणाली लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई महत्वपूर्ण पदों पर बैठे लोग सीधे मुख्यमंत्री के इशारों पर विपक्ष को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं। अखिलेश ने निर्वाचन आयोग से ‘इंटेंसिव प्रोविजन’ के अर्थ और उसकी पारदर्शिता पर सवाल पूछे। उनका मानना है कि अगर आंकड़ों में इसी तरह का अंतर बना रहा, तो जनता का चुनावी प्रक्रिया से भरोसा उठ जाएगा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे हर स्तर पर सावधानी बरतें और बेईमानी की किसी भी कोशिश का डटकर मुकाबला करें।
पार्टी की नई रणनीति के तहत अखिलेश अब धार्मिक प्रतीकों को भी प्रमुखता दे रहे हैं। माघ मेले के आयोजन में केदारेश्वर मंदिर की स्थापना की मांग उठाकर उन्होंने संकेत दिया है कि वे केवल समाजवाद की बात नहीं करेंगे, बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए भी लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि आयोजनकर्ताओं को निष्पक्ष होना चाहिए और राजनीतिक भेदभाव से ऊपर उठकर कार्य करना चाहिए। मुलायम सिंह यादव की मूर्ति को लेकर छिड़ा यह विवाद आने वाले दिनों में प्रयागराज से लेकर लखनऊ तक की राजनीति को और अधिक गरमाने की संभावना रखता है।
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