राजनीति

UP Politics: गोंडा में बृजभूषण शरण सिंह हुए भावुक, रितेश्वर महाराज ने मंच से भरी ‘दबदबे’ की हुंकार

UP Politics: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित नंदिनी निकेतन इन दिनों भक्ति और राष्ट्रभक्ति के संगम का केंद्र बना हुआ है। भारतीय कुश्ती संघ के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा के पूर्व कद्दावर सांसद बृजभूषण शरण सिंह द्वारा यहाँ आठ दिवसीय ‘राष्ट्रकथा’ का भव्य आयोजन किया गया है। कथा के दौरान एक ऐसा क्षण आया जब पूरा पंडाल सन्न रह गया और मंच पर बैठे पूर्व सांसद की आँखें नम हो गईं। यह भावुक पल तब आया जब विख्यात कथावाचक सतगुरु रितेश्वर महाराज ने बृजभूषण शरण सिंह के चर्चित ‘दबदबे’ का जिक्र करते हुए एक बड़ा बयान दे दिया।

UP Politics: “मैं इनका बाप हूँ, मेरा भी दबदबा रहेगा”: रितेश्वर महाराज की गर्जना

कथा के दौरान श्रोताओं को संबोधित करते हुए सतगुरु रितेश्वर महाराज ने बेहद आक्रामक और भावनात्मक लहजे में बृजभूषण शरण सिंह का पक्ष लिया। उन्होंने मंच से कहा, “पंडाल में बैठे लोगों, आपको कल भी चेतावनी दी थी और आज भी देता हूँ। अगर आप समझते हो कि बृजभूषण का दबदबा था, है और रहेगा, तो याद रखो यहाँ उनका बाप बैठा है। मेरा भी दबदबा था, दबदबा है और दबदबा रहेगा।” महाराज के मुख से ‘दबदबा’ शब्द सुनते ही पंडाल में मौजूद हजारों समर्थक जोश से भर गए और खड़े होकर अभिवादन करने लगे। वहीं, अपने लिए ऐसे शब्द सुनकर बृजभूषण शरण सिंह स्वयं को रोक नहीं पाए और सिसक पड़े।

UP Politics: राजनीति, आरोप और ‘दबदबे’ की कहानी

गौरतलब है कि बृजभूषण शरण सिंह पिछले काफी समय से विवादों और यौन शोषण के आरोपों के चलते सुर्खियों में रहे हैं। इन्ही विवादों के कारण भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनाव में उनका टिकट काटकर उनके बेटे को कैसरगंज से मैदान में उतारा था, जो वर्तमान में सांसद हैं। हालांकि, टिकट कटने के बावजूद बृजभूषण और उनके समर्थकों ने ‘दबदबा’ शब्द को अपनी पहचान बना लिया है। सोशल मीडिया पर अक्सर उनके दबदबे के वीडियो वायरल होते रहते हैं। ऐसे में एक धार्मिक मंच से रितेश्वर महाराज द्वारा इस शब्द का इस्तेमाल करना उनके समर्थकों के लिए संजीवनी जैसा साबित हुआ है।

“पैसे लेकर कथा नहीं करता”: रितेश्वर महाराज का खुला दावा

अपने संबोधन के दौरान रितेश्वर महाराज ने अपनी निष्पक्षता और सिद्धांतों पर भी बात की। उन्होंने भरे मंच से दावा किया कि वे कथा करने के लिए धन स्वीकार नहीं करते। उन्होंने कहा, “मेरी आयु 52 वर्ष हो गई है, लेकिन पूरे भारतवर्ष में कोई एक व्यक्ति खड़ा होकर यह नहीं कह सकता कि उसने मुझे पैसे दिए और मैंने कथा कही। मैं माँ भारती, राम और कृष्ण के लिए सनातन को जोड़ने का कार्य कर रहा हूँ।” उन्होंने आगे कहा कि यह सब ईश्वर की कृपा से चल रहा है और आगे भी ऐसे ही चलता रहेगा। उनके इस दावे ने भक्तों के बीच उनकी छवि को और अधिक मजबूत कर दिया है।

राष्ट्रकथा और सरयू की पावन धरती का महत्व

रितेश्वर महाराज ने राष्ट्रकथा कहने की पात्रता पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रकथा कहने का अधिकार उसी को है जिसने अपनी जवानी, वाणी और जिंदगानी राम और राष्ट्र पर न्योछावर कर दी हो। उन्होंने गोंडा की धरती और सरयू नदी के सानिध्य को सौभाग्यशाली बताते हुए कहा कि राष्ट्र की एकता और अखंडता को जोड़ने का यह प्रयास निरंतर जारी रहेगा। फिलहाल, महाराज के ‘दबदबे’ वाले बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैल रहा है और लोग इसे राजनीति व धर्म के अनूठे मेल के रूप में देख रहे हैं।

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